भोपाल में व्यापार और विकास को लेकर एक अहम मुलाकात हुई। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से Bhopal Chamber of Commerce and Industries (BCCI) के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। इस संगठन का नेतृत्व चेंबर के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने किया।
इस मुलाकात में शहर के भविष्य, व्यापार की चुनौतियों और आम लोगों की सुविधाओं को लेकर गंभीर बातचीत हुई। बैठक में कई अहम मुद्दों पर बात हुई। शहर में बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के कारण व्यापारियों को रोज नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में संगठन ने प्रशासन के सामने जमीनी हकीकत रखी।

चेंबर के सदस्यों ने साफ कहा कि अगर शहर को स्मार्ट बनाना है, तो व्यापार को भी व्यवस्थित करना होगा। सड़कें, ट्रैफिक, बाजार व्यवस्था ये सब एक-दूसरे से जुड़े हैं।
बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा था बैरागढ़ यानी संत हिरदाराम नगर क्षेत्र की ट्रांसपोर्ट समस्या। यहां लंबे समय से ट्रकों और बड़े वाहनों की वजह से जाम की स्थिति बनी रहती है।
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प्रतिनिधिमंडल ने सुझाव दिया कि ट्रांसपोर्ट गतिविधियों को शहर के बीच से हटाकर कृषि मंडी परिसर में शिफ्ट किया जाए। इससे दो फायदे होंगे शहर के अंदर ट्रैफिक कम होगा और व्यापारिक गतिविधियां भी बेहतर तरीके से चल सकेंगी।
पुराने भोपाल की गलियां पहले से ही संकरी हैं। ऐसे में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या ने ट्रैफिक को और मुश्किल बना दिया है। चेंबर ने प्रशासन से मांग की कि ई-रिक्शा के संचालन को नियमों के तहत लाया जाए। इसके लिए रूट तय किए जाएं, संख्या नियंत्रित हो और पार्किंग की व्यवस्था भी बने।
हमीदिया रोड स्थित मेडिकल स्ट्रीट और दवा बाजार भोपाल के सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्रों में आते हैं। यहां रोज हजारों लोग आते हैं- मरीज, उनके परिजन और व्यापारी। लेकिन इतनी भीड़ के बावजूद यहां सार्वजनिक शौचालयों की कमी है।
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चेंबर प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाया और कहा कि यह सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जरूरी जरूरत है। अगर इन जगहों पर साफ-सुथरे और पर्याप्त शौचालय बनाए जाते हैं, तो इससे लोगों को राहत मिलेगी।
बैठक में एक और बड़ा मुद्दा सामने आया- कमर्शियल लाइसेंस शुल्क। मंडल ने बताया कि यह शुल्क सिर्फ भोपाल में लागू है, जबकि दूसरे शहरों में ऐसा नहीं है। इससे स्थानीय व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। चेंबर ने मांग की कि इस शुल्क को खत्म किया जाए, ताकि व्यापारियों को राहत मिले और व्यापार को बढ़ावा मिल सके।
इस बैठक का एक बड़ा संदेश यह भी रहा कि शहर को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन और व्यापारियों के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है। जहां एक तरफ प्रशासन नीतियां बनाता है, वहीं व्यापारी उन्हें जमीन पर लागू होते देखते हैं। दोनों के बीच संवाद जितना मजबूत होगा, समाधान उतना ही बेहतर निकलेगा।
इस मुलाकात में चेंबर के कई पदाधिकारी और डायरेक्टर्स शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से उपाध्यक्ष अरविंद जैन, महामंत्री ललित तांतेड़, मंत्री संजीव जैन, कोषाध्यक्ष प्रदीप सेवानी इसके अलावा कई डायरेक्टर्स भी मौजूद रहे, जिनमें वात्सायन जैन, अनिल मिश्रा, आयुष मोदी, मनोज साहू, दर्शन गर्ग, सुलभ मित्तल, सुनील पंजाबी, आदित्य सिंघई, दिनेश बतरा, अनुराग जैन पवैया, नवीन अग्रवाल, राजेश गुप्ता, सचिन संगतानी और जवाहर कोटवानी शामिल थे। इन सभी ने अपने-अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।