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भोपाल:सरपंच प्रभार विवाद पहुंचा पंचायत मंत्री तक, उप सरपंच ने लगाए अधिकार नहीं देने के आरोप

भोपाल जिले की ग्राम पंचायत अर्रावती में सरपंच प्रभार को लेकर गहराया विवाद अब पंचायत मंत्री तक पहुंच गया है जहां उप सरपंच ने अधिकार नहीं दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
सरपंच प्रभार विवाद पहुंचा पंचायत मंत्री तक, उप सरपंच ने लगाए अधिकार नहीं देने के आरोप

भोपाल जिले की ग्राम पंचायत अर्रावती में सरपंच पद के प्रभार को लेकर विवाद अब पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल तक पहुंच गया है। पंचायत की उप सरपंच सविता चौहान ने मंत्री से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें सरपंच पद का प्रभार तो दिया गया लेकिन पिछले 10 महीनों से अधिकार नहीं सौंपे गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने जांच के निर्देश दिए हैं।

आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद हटाए गए थे सरपंच

जानकारी के अनुसार 4 अगस्त 2025 को तत्कालीन सरपंच गंगाराम अहिरवार के खिलाफ बैरसिया थाने में आपराधिक मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। नियमों के अनुसार सरपंच पद का प्रभार उप सरपंच सविता चौहान को दिया जाना था लेकिन आरोप है कि बैरसिया जनपद पंचायत के तत्कालीन सीईओ ने शुरुआत में उन्हें प्रभार नहीं सौंपा।

जिला पंचायत सीईओ ने दिए थे आदेश

मामला सामने आने के बाद 14 अगस्त 2025 को जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम के तहत सविता चौहान को सरपंच पद का प्रभार सौंपने के निर्देश जारी किए थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और बाद में स्थिति और विवादित हो गई।

प्रभार मिला लेकिन अधिकार नहीं

उप सरपंच सविता चौहान का कहना है कि उन्हें औपचारिक रूप से प्रभार तो दिया गया, लेकिन सरपंच पद से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार नहीं दिए गए। उनका आरोप है कि पंचायत के कई महत्वपूर्ण फैसले और वित्तीय प्रक्रियाएं उनकी जानकारी और सहमति के बिना संचालित की गईं। उन्होंने बताया कि अधिकार नहीं मिलने के कारण उन्हें कई बार अधिकारियों से शिकायत करनी पड़ी।

सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा मामला

सविता चौहान के अनुसार जब लंबे समय तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सरपंच और सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर वाला बैंक खाता खोला गया। हालांकि उनका आरोप है कि इसी दौरान पंचायत के लाखों रुपए के बिल उनकी जानकारी के बिना पास किए गए।

दूसरे व्यक्ति को सरपंच घोषित करने पर विवाद

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में लेखराज अहिरवार को सरपंच घोषित कर दिया गया जबकि जिला पंचायत सीईओ पहले ही सविता चौहान को प्रभार देने का आदेश जारी कर चुकी थीं। इसी निर्णय को लेकर विवाद और गहरा गया है।

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जनप्रतिनिधियों ने भी उठाए सवाल

मामले को लेकर कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी पंचायत मंत्री से मुलाकात की है। उनका कहना है कि जब जिला पंचायत सीईओ ने नियमानुसार सविता चौहान को सरपंच पद का प्रभार सौंप दिया था तो फिर किसी अन्य व्यक्ति को प्रभार या अधिकार देने का निर्णय कैसे लिया गया। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

अब यह मामला पंचायत मंत्री, कलेक्टर और जिला पंचायत प्रशासन तक पहुंच चुका है। जांच के आदेश जारी होने के बाद सभी की नजर रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि नियमों का पालन हुआ या नहीं और सरपंच पद के अधिकारों को लेकर उठे विवाद में किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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