भोपाल में 1.73 लाख छात्रों की अपार आईडी लंबित, प्रदेश के 55 जिलों में सबसे पीछे राजधानी

रामचन्द्र पाण्डेय, भोपाल। राजधानी के हजारों स्कूली विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान यानी अपार आईडी अब तक नहीं बन पाई है। जिले में कुल 5,86,288 विद्यार्थियों में से 4,13,169 की अपार आईडी तैयार हुई है। इस तरह भोपाल में 70.5 प्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी बन चुकी है, जबकि 1,73,119 छात्र अब भी इससे वंचित हैं। प्रदेश के 55 जिलों के आंकड़ों में भोपाल सबसे निचले पायदान पर है। वहीं, आदिवासी बहुल डिंडोरी और बालाघाट जैसे जिले अपार आईडी बनाने के मामले में आगे हैं। प्रदेशभर के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 1,47,03,036 विद्यार्थियों में से 1,17,04,707 की अपार आईडी बन चुकी है। यह कुल नामांकन का 79.6 प्रतिशत है। दूसरी ओर, 29,98,329 विद्यार्थियों यानी करीब 20.4 प्रतिशत छात्रों की अपार आईडी अभी लंबित है। ऐसे में डिजिटल शैक्षणिक पहचान तैयार करने की प्रक्रिया में प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को अभी शामिल किया जाना बाकी है।
अपार आईडी बनाने में भोपाल की स्थिति कमजोर
राजधानी में अपार आईडी तैयार करने की रफ्तार प्रदेश के कई जिलों की तुलना में कम है। भोपाल में जहां 70.5 प्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी बनी है, वहीं झाबुआ में 72.8 प्रतिशत, इंदौर में 73.9 प्रतिशत, धार में 74.2 प्रतिशत और भिंड में 74.3 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार हुई है। इन आंकड़ों के आधार पर भोपाल प्रदेश के सबसे निचले स्थान पर है। इसके उलट डिंडोरी में 93.8 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी बन चुकी है। बालाघाट 91.5 प्रतिशत के साथ दूसरे और उज्जैन 91.1 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है। मंडला में 90.8 प्रतिशत और पांढुर्णा में 87.9 प्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी तैयार हो चुकी है। इन जिलों के आंकड़े बताते हैं कि अपार आईडी बनाने की प्रक्रिया में जिलों के बीच काफी अंतर है।
आधार और स्कूल रिकॉर्ड में नाम का अंतर बन रहा बाधा
अपार आईडी बनाने की प्रक्रिया में विद्यार्थियों के स्कूल रिकॉर्ड और आधार कार्ड में दर्ज जानकारी का मिलान जरूरी है। नाम में अंतर, आधार सत्यापन पूरा नहीं होना और विद्यार्थी की प्रोफाइल में त्रुटि होने के कारण कई मामलों में आईडी जनरेट नहीं हो पा रही है।
केस-1: नाम में अंतर के कारण अटकी आईडी
राजधानी के साकेत नगर क्षेत्र के छात्र मनीष सक्सेना की अपार आईडी स्कूल रिकॉर्ड और आधार कार्ड में दर्ज नाम अलग-अलग होने के कारण लंबित है। नाम का मिलान और जरूरी सुधार होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
केस-2: आधार सत्यापन पूरा होने का इंतजार
एक अन्य छात्र सुरेश चौबे की अपार आईडी आधार सत्यापन पूरा नहीं होने के कारण जनरेट नहीं हो सकी है। छात्र का स्कूल रिकॉर्ड उपलब्ध है, लेकिन सत्यापन की प्रक्रिया लंबित होने से उसकी डिजिटल शैक्षणिक पहचान तैयार नहीं हो पाई है।
क्या है अपार आईडी?
अपार यानी ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री विद्यार्थियों के लिए स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान की व्यवस्था है। इसके तहत विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड, उपलब्धियों और प्रमाणपत्रों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने की सुविधा मिलती है। अपार आईडी बनने के लिए स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज विद्यार्थी के नाम का आधार में दर्ज नाम से मिलान जरूरी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को एकीकृत करना है, ताकि स्कूल या शैक्षणिक संस्थान बदलने की स्थिति में भी रिकॉर्ड को आगे ले जाना आसान हो सके। इसके साथ ही अकादमिक क्रेडिट की पहचान और हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं में भी यह व्यवस्था उपयोगी है।
अपार आईडी नहीं बनने से हो सकती है परेशानी
अपार आईडी नहीं बनने पर विद्यार्थी के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से एकीकृत करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। भविष्य में प्रवेश, छात्रवृत्ति, परीक्षा, प्रमाणपत्रों के सत्यापन और उच्च शिक्षा के दौरान रिकॉर्ड हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं में अतिरिक्त दस्तावेज देने या अलग से सत्यापन कराने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि अपार आईडी लंबित होने का अर्थ यह नहीं है कि विद्यार्थी इन सुविधाओं से स्वतः वंचित हो जाएगा। संबंधित प्रक्रिया और नियमों के अनुसार आवश्यक दस्तावेज या सत्यापन की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। फिलहाल नाम में अंतर, आधार सत्यापन लंबित होना और प्रोफाइल संबंधी तकनीकी त्रुटियां आईडी तैयार करने में प्रमुख बाधाओं के रूप में सामने आ रही हैं।
प्रदेश के टॉप-5 जिले
अपार आईडी बनाने के प्रतिशत के मामले में डिंडोरी प्रदेश में सबसे आगे है। जिले में 1,34,808 विद्यार्थियों के नामांकन के मुकाबले 1,26,472 की अपार आईडी बन चुकी है। इसके बाद बालाघाट, उज्जैन, मंडला और पांढुर्णा का स्थान है।
| जिला | कुल नामांकन | बनी अपार आईडी | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| डिंडोरी | 1,34,808 | 1,26,472 | 93.8% |
| बालाघाट | 3,15,320 | 2,88,495 | 91.5% |
| उज्जैन | 3,90,212 | 3,55,598 | 91.1% |
| मंडला | 1,93,534 | 1,75,790 | 90.8% |
| पांढुर्णा | 59,904 | 52,670 | 87.9% |
अपार आईडी बनाने में सबसे पीछे पांच जिले
प्रदेश के निचले पांच जिलों में भोपाल के अलावा झाबुआ, इंदौर, धार और भिंड शामिल हैं। इन जिलों में अपार आईडी बनाने का प्रतिशत 70.5 से 74.3 के बीच है।
| जिला | कुल नामांकन | बनी अपार आईडी | प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| भोपाल | 5,86,288 | 4,13,169 | 70.5% |
| झाबुआ | 2,85,780 | 2,07,991 | 72.8% |
| इंदौर | 8,59,867 | 6,35,604 | 73.9% |
| धार | 4,63,212 | 3,43,757 | 74.2% |
| भिंड | 2,48,754 | 1,84,870 | 74.3% |
रिकॉर्ड का सही मिलान जरूरी
शिक्षाविद् डॉ. एनएन राय के अनुसार अपार आईडी विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को एकीकृत करने वाली महत्वपूर्ण डिजिटल व्यवस्था है। इससे विद्यार्थियों की अकादमिक पहचान और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। इसके लिए आधार और स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज नाम का सही मिलान होना बेहद जरूरी है। लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण होने से विद्यार्थियों को भविष्य में डिजिटल शैक्षणिक सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
स्कूल स्तर पर चिह्नित किए जा रहे लंबित मामले
भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य ने बताया कि तकनीकी कारणों से अपार आईडी के कुछ मामले लंबित हैं। ऐसे मामलों को स्कूल स्तर पर चिह्नित किया जा रहा है। आधार सत्यापन, नाम में अंतर और अन्य तकनीकी समस्याओं को दूर कर विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश में करीब 30 लाख विद्यार्थियों की अपार आईडी लंबित होने और भोपाल में सबसे कम प्रगति दर्ज होने के कारण स्कूल स्तर पर रिकॉर्ड की जांच और तकनीकी समस्याओं का समाधान महत्वपूर्ण है। इससे लंबित मामलों को निपटाने और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को डिजिटल शैक्षणिक पहचान से जोड़ने में मदद मिल सकती है।




















