PU Special :MP में बदलेंगी जिलों, तहसीलों और ब्लॉक की सीमाएं! 150 किमी दूर मुख्यालय की परेशानी दूर करने की तैयारी

मध्यप्रदेश में प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग जिलों, तहसीलों और विकासखंडों की सीमाओं की समीक्षा कर रहा है। 51 जिलों में सुनवाई पूरी हो चुकी है। बुधनी, सांची, नागदा और सिहोरा जैसे क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों के बीच आयोग मार्च तक सरकार को रिपोर्ट सौंपने की तैयारी में है।
MP में बदलेंगी जिलों, तहसीलों और ब्लॉक की सीमाएं! 150 किमी दूर मुख्यालय की परेशानी दूर करने की तैयारी
MP में बदलेंगी जिलों, तहसीलों और ब्लॉक की सीमाएं!

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश में जिलों, तहसीलों और विकासखंडों की प्रशासनिक सीमाओं की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। प्रदेश में कई ऐसे इलाके हैं, जहां लोगों को सरकारी कामकाज के लिए जिला मुख्यालय तक पहुंचने में 100 से 150 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ता है। कुछ जगहों पर नजदीक दूसरे जिले का मुख्यालय होने के बावजूद मौजूदा प्रशासनिक सीमाओं के कारण लोगों को दूर जाना पड़ता है। अब इन विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की तैयारी की जा रही है। धार, छिंदवाड़ा, पन्ना, उज्जैन, सागर, जबलपुर और छतरपुर सहित कई जिलों में प्रशासनिक सीमाओं, क्षेत्रफल और मुख्यालयों से दूरी को लेकर बदलाव की जरूरत सामने आई है। मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग ने अब तक 51 जिलों में भ्रमण कर सुनवाई और सुझाव लेने का काम पूरा कर लिया है। अगले सप्ताह भोपाल, इंदौर, जबलपुर सहित शेष चार जिलों में सुनवाई की जाएगी। आयोग इसके बाद संभागीय मुख्यालयों पर बैठकें कर सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से सुझाव लेगा। आयोग की योजना प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा कर जिलों, तहसीलों और विकासखंडों की सीमाओं को अधिक व्यावहारिक बनाने की है।

कहीं पास में दूसरा जिला, फिर भी करना पड़ता है लंबा सफर

आयोग की सुनवाई के दौरान जिला और तहसील मुख्यालयों की दूरी तथा प्रशासनिक सीमाओं में विसंगतियों का मुद्दा सामने आया है। सीहोर जिले का बुधनी और रायसेन जिले का सांची इसके उदाहरण हैं। इन क्षेत्रों के नजदीक दूसरे जिलों के मुख्यालय स्थित हैं, लेकिन प्रशासनिक सीमाओं के कारण लोगों को अपने सरकारी कामकाज के लिए अपेक्षाकृत दूर जाना पड़ सकता है। बुधनी के नजदीक नर्मदापुरम और सांची के नजदीक विदिशा जिला मुख्यालय है। ऐसे मामलों में मांग उठ रही है कि प्रशासनिक सीमाएं तय करते समय स्थानीय जरूरतों और आवागमन की सुविधा को भी प्राथमिकता दी जाए।

आयोग के सामने चुनौती केवल जिलों का क्षेत्रफल घटाने या बढ़ाने की नहीं है। आबादी, भौगोलिक स्थिति, सड़क संपर्क, प्रशासनिक पहुंच और नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं को ध्यान में रखकर सीमाओं का निर्धारण करना होगा, ताकि सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हो सके।

नागदा और सिहोरा को जिला बनाने की मांग पर भी नजर

प्रशासनिक पुनर्गठन की चर्चा के बीच उज्जैन जिले के नागदा और जबलपुर जिले के सिहोरा को जिला बनाने की मांग भी महत्वपूर्ण है। दोनों क्षेत्रों को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में सिहोरा को जिला बनाने की घोषणा की गई थी। बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने भी यह मांग रखी गई। वहीं, नागदा को जिला बनाने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में हुई थी। अब इन मांगों पर आगे की स्थिति प्रशासनिक पुनर्गठन की प्रक्रिया और आयोग की सिफारिशों के बाद स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, नए जिले बनाने या मौजूदा सीमाओं में बदलाव का अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना होगा।

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तहसील और विकासखंड की सीमाओं में बेहतर तालमेल की तैयारी

आयोग जिला स्तर के साथ तहसीलों और विकासखंडों की सीमाओं की भी समीक्षा कर रहा है। पुनर्गठन के तहत इन इकाइयों की संख्या और उनके क्षेत्राधिकार में बेहतर तालमेल बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति से बचना है, जिसमें नागरिकों को राजस्व संबंधी काम के लिए एक कार्यालय और विकास योजनाओं से जुड़े काम के लिए दूसरे क्षेत्र में जाना पड़े। यदि प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव होता है, तो स्थानीय आबादी और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार सरकारी कार्यालयों की पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि तहसील और विकासखंड की सीमाओं को एकरूप करने के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और राज्य सरकार के परीक्षण के बाद ही होगा।

आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बेहतर प्रशासन पर जोर

प्रशासनिक पुनर्गठन के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत जिला स्तर पर डेटा विश्लेषण, डेटा प्रबंधन और आईटी विशेषज्ञों से जुड़े पदों की जरूरत का आकलन किया जा सकता है।

आयोग की रिपोर्ट में जनसंख्या, क्षेत्रफल और प्रशासनिक कार्यभार के आधार पर अलग-अलग विभागों में पदों और संसाधनों के निर्धारण से जुड़ी सिफारिशें भी शामिल हो सकती हैं। इससे प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार कर्मचारियों और सुविधाओं की उपलब्धता तय करने में मदद मिल सकती है। पुनर्गठन का उद्देश्य केवल नक्शे पर सीमाएं बदलना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को लोगों की जरूरतों के अनुरूप बनाना है। नई व्यवस्था का असर तभी दिखाई देगा, जब नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए कम दूरी तय करनी पड़े और उनका समय व खर्च बचे।

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मार्च तक सरकार को सौंपी जा सकती है रिपोर्ट

मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के प्रभारी अध्यक्ष एसएन मिश्रा के अनुसार जिलों में सुनवाई, डेटा जुटाने और सुझाव लेने का काम लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि तीन से चार जिले अभी शेष हैं और इस महीने तक वहां भी प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास है। मिश्रा के मुताबिक, आयोग नवंबर तक सभी संभागीय मुख्यालयों पर बैठकें कर अपनी रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। रिपोर्ट राज्य सरकार को मार्च तक सौंपने की तैयारी है। रिपोर्ट में जिलों, तहसीलों और विकासखंडों की सीमाओं के साथ प्रशासनिक संसाधनों और व्यवस्था में जरूरी बदलावों को लेकर सिफारिशें हो सकती हैं। इसके बाद सरकार इन प्रस्तावों की समीक्षा कर आगे का निर्णय लेगी।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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