रायपुर में रेल मंत्री का दौरा रद्द, तैयारियों में करोड़ों के खर्च पर उठे सवाल,पटरियों से स्लीपर तक रंगाई,अब कौन देगा जवाब?

रायपुर: केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का 12 अक्टूबर को प्रस्तावित रायपुर दौरा रद्द होने से रेलवे प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने और रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ करने के लिए रेल मंत्री का आगमन प्रस्तावित था। उनके स्वागत के लिए पिछले एक महीने से तैयारियां चल रही थीं। रेलवे स्टेशन से लेकर कार्यक्रम स्थल तक रंग-रोगन, सड़क निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं पर बड़े पैमाने पर काम कराया जा रहा था। अब दौरा रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन तैयारियों पर खर्च किए जा रहे सरकारी धन का हिसाब कौन देगा?

मंत्री नहीं आए, लेकिन तैयारियों का बिल तो जनता के पैसे से ही बनेगा
रेल मंत्री के दौरे को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, करीब दो घंटे के कार्यक्रम और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर लगभग 4 से 5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान जताया गया था। वहीं, RPF स्थापना दिवस समारोह के लिए अकेले 85 लाख रुपये का बजट मिलने की बात कही गई है। ऐसे में दौरा रद्द होने के बाद खर्च की वास्तविक राशि, भुगतान और तैयारियों की उपयोगिता को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।

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पहली बार नहीं बदली तारीख, अब दौरा ही रद्द
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का रायपुर दौरा पहले 9 अक्टूबर को प्रस्तावित था। बाद में कार्यक्रम को स्थगित कर 12 अक्टूबर की तारीख तय की गई। रेलवे प्रशासन इसी कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयारियों में जुटा रहा, लेकिन अब दौरा रद्द कर दिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने दौरा रद्द होने की पुष्टि की है।

पटरियों के स्लीपर और गिट्टियों तक पर रंग-रोगन
रेल मंत्री के स्वागत की तैयारियों के दौरान रेलवे ट्रैक के आसपास सीमेंट स्लीपर और गिट्टियों तक पर रंग-रोगन किए जाने की जानकारी सामने आई। स्टेशन परिसर और कार्यक्रम से जुड़े क्षेत्रों में साफ-सफाई, सजावट तथा मरम्मत के काम भी कराए जा रहे थे। इन तैयारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वीआईपी कार्यक्रम के नाम पर ऐसी सजावट जरूरी थी? क्या यही संसाधन यात्रियों की सुविधाओं, स्टेशन की स्वच्छता और बुनियादी रेल व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में लगाए जा सकते थे?

डामरीकरण से नई सीसी रोड तक, रातों-रात बदली व्यवस्था
तैयारियों के तहत रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर अधिकारियों के कक्षों के दरवाजों की रंगाई और पर्दे लगाने का काम भी कराया जा रहा था। DRM कार्यालय से WRS ग्राउंड तक जाने वाली सड़क का डामरीकरण किया गया। वहीं, कार्यक्रम स्थल पर नई सीसी रोड बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई। इन कामों की जरूरत और स्थायी उपयोगिता पर अब चर्चा हो रही है। सवाल यह है कि क्या ये कार्य पहले से निर्धारित विकास योजना का हिस्सा थे या इन्हें मुख्य रूप से रेल मंत्री के आगमन को ध्यान में रखकर कराया गया?
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RPF के 85 लाख रुपये के बजट पर भी निगाहें
RPF स्थापना दिवस समारोह रेलवे के लिए महत्वपूर्ण आयोजन है, लेकिन इस कार्यक्रम के लिए बताए जा रहे 85 लाख रुपये के बजट ने भी खर्च की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। समारोह पर वास्तव में कितनी राशि खर्च हुई, कौन-कौन से कार्य स्वीकृत किए गए, किन एजेंसियों को जिम्मेदारी मिली और अब तक कितना भुगतान किया गया—इन बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है। दौरा रद्द होने का अर्थ यह नहीं कि पहले से किए गए सभी कार्य बेकार हो गए। सड़क, मरम्मत और अन्य स्थायी सुविधाएं यात्रियों के काम आ सकती हैं। हालांकि, केवल आयोजन के लिए किए गए अस्थायी रंग-रोगन और सजावट की उपयोगिता का आकलन भी जरूरी है।

रेलवे स्टेशन के कार्यक्रम निरस्त, बाकी आयोजनों पर स्थिति स्पष्ट नहीं
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, रेल मंत्री का दौरा रद्द होने के बाद रायपुर रेलवे स्टेशन पर प्रस्तावित कार्यक्रम निरस्त कर दिए गए हैं। वहीं, दौरे से जुड़े अन्य कार्यक्रमों को लेकर अधिकारियों ने बाकी व्यवस्थाएं यथावत रहने की बात कही है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि किन कार्यक्रमों को पूरी तरह रद्द किया गया है और किन गतिविधियों को पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार जारी रखा जाएगा।

रायपुर-राजिम और रायपुर-रावघाट ट्रेन को हरी झंडी दिखाने की उम्मीद पर भी सवाल
दौरे से पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि रेल मंत्री रायपुर-राजिम और रायपुर-रावघाट रेल सेवाओं को हरी झंडी दिखा सकते हैं। हालांकि, इन ट्रेनों के शुभारंभ को लेकर अंतिम आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे तय कार्यक्रम नहीं माना जा सकता। अब दौरा रद्द होने के बाद इन रेल सेवाओं के शुभारंभ की नई तारीख और आगे की प्रक्रिया पर रेलवे की आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।
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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से उठ रहे हैं सीधे सवाल
रेलवे प्रशासन को अब यह स्पष्ट करना चाहिए कि आयोजन की तैयारियों पर कुल कितनी राशि स्वीकृत की गई थी, अब तक कितना खर्च हो चुका है और कौन-कौन से कार्य नियमित विकास योजना के तहत किए गए। साथ ही, दौरा रद्द होने के बाद शेष तैयारियों और भुगतान की क्या स्थिति है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

मुख्य सवाल ये हैं:
4 से 5 करोड़ रुपये के अनुमानित खर्च का मदवार ब्योरा क्या है?
RPF स्थापना दिवस के लिए बताए गए 85 लाख रुपये के बजट में किन मदों पर खर्च होना था?
रंग-रोगन, सजावट, सड़क निर्माण और मरम्मत के कामों में कितनी राशि खर्च हुई?
क्या इन कार्यों की उपयोगिता और गुणवत्ता का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा?
रायपुर-राजिम और रायपुर-रावघाट रेल सेवाओं के शुभारंभ की अगली तारीख क्या होगी?
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निष्कर्ष: स्वागत की चमक से आगे, खर्च का हिसाब भी जरूरी
रेल मंत्री का दौरा रद्द होना अपने आप में किसी वित्तीय अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन जब किसी बड़े सरकारी आयोजन के लिए करोड़ों रुपये के संभावित खर्च की चर्चा हो, तब पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी हो जाती है। रेलवे प्रशासन को वास्तविक खर्च, स्वीकृत बजट और कराए गए कार्यों का विवरण सामने लाना चाहिए, ताकि स्पष्ट हो सके कि तैयारियों पर खर्च हुआ पैसा यात्रियों और रेलवे के दीर्घकालीन हित में कितना उपयोगी साबित होगा।




















