'बॉस स्कैम' से सावधान...व्हाट्सएप पर सीईओ बनकर हो रही करोड़ों की ठगी, पुलिस ने जारी किया अलर्ट

तिरुवनंतपुरम। केरल पुलिस कंपनियों, व्यापारिक संस्थानों और कार्पोरेट कर्मचिरयों के लिए अलर्ट जारी किया है। केरल पुलिस के अनुसार, 'बॉस स्कैम' को 'सीईओ इंपर्सनेशन फ्रॉड' भी कहा जाता है। इस साइबर धोखाधड़ी में अपराधी कंपनी के सीईओ या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर वित्त विभाग के कर्मचारियों को तत्काल भुगतान करने का निर्देश देते हैं। मैसेज इतने वास्तविक लगते हैं कि कर्मचारी बिना पुष्टि किए ही रकम ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
फर्जी संदेश और मैलवेयर से बनाई जाती है साजिश
पुलिस ने बताया कि साइबर अपराधी सबसे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या किसी सरकारी ऑडिट टीम के नाम पर फर्जी और जरूरी संदेश भेजते हैं। इसके बाद कर्मचारियों से मैलवेयर युक्त ZIP, EXE या DLL फाइलें खुलवाई जाती हैं। इन फाइलों के जरिए हैकर्स कंपनी के कंप्यूटर नेटवर्क में घुसकर सिस्टम पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे या तो अधिकारियों के अकाउंट हैक करते हैं या उनकी फर्जी प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को व्हाट्सएप वेब के माध्यम से भुगतान के निर्देश भेजते हैं।
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धोखाधड़ी से बचने के लिए क्या करें?
केरल पुलिस ने कंपनियों को सलाह दी है कि केवल व्हाट्सएप या ई-मेल के आधार पर किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन को मंजूरी न दें। भुगतान से पहले संबंधित अधिकारी से फोन कॉल या किसी अन्य सत्यापित माध्यम से पुष्टि अवश्य करें। साथ ही कर्मचारियों को नियमित रूप से अपने व्हाट्सएप के Linked Devices सेक्शन की जांच करनी चाहिए, ताकि कोई अनजान डिवाइस उनके अकाउंट से जुड़ा न हो।
कंपनियों के लिए सुरक्षा उपाय जरूरी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस ने कंपनियों को मल्टी-लेवल अप्रूवल सिस्टम लागू करने की सलाह दी है, ताकि बड़ी रकम का भुगतान एक व्यक्ति के निर्णय पर न हो सके। इसके अलावा अनजान स्रोतों से आई ZIP, EXE और DLL फाइलें कभी न खोलें। कर्मचारियों को समय-समय पर साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण देना और सिस्टम को अपडेट रखना भी ऐसे हमलों से बचाव का प्रभावी तरीका माना गया है।
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ठगी का शिकार होने पर तुरंत करें शिकायत
यदि कोई व्यक्ति या कंपनी इस तरह की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होती है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि समय पर शिकायत मिलने पर संदिग्ध लेन-देन को रोकने और चोरी हुई राशि वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।












