बेहतर प्रबंधन, अनुकूल माहौल ने मप्र में वन्य जीवन को बनाया समृद्ध

भोपाल। वन्य प्राणियों के मामले में मध्य प्रदेश काफी समृद्ध है। यहां लॉयन को छोड़कर बिग कैट फैमिली के बाकी सदस्य-बाघ, तेंदुआ और चीता मौजूद हैं। बाघ और तेंदुओं की संख्या मप्र में सर्वाधिक है। चीते सिर्फ श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। कभी देश में लुप्तप्राय रहे गिद्धों की संख्या भी प्रदेश में सर्वाधिक है। आखिर मप्र, वन्य प्राणियों के मामले में इतना समृद्ध क्यों है, इस बारे में पीपुल्स समाचार ने वन विभाग के मौजूदा और पूर्व अधिकारियों के अलावा एनटीसीए के पूर्व सदस्य और अन्य विशेषज्ञों से बातचीत की। उनका मानना है कि बेहतर वाइल्ड लाइन मैनेजमेंट और अनुकूल आबोहवा इसकी बड़ी वजह है। इसके अलावा नेशनल पार्कों में बसे गांवों को हटाकर मानवीय दखल को खत्म किया गया है।
बाघ: टाइगर सेंसस 2022 के अनुसार, मप्र में 785 बाघ हैं, जबकि 2018 में इनकी संख्या 526 थी। 2006 में मप्र को पहली बार टाइगर स्टेट का दर्जा मिला था, जो एक बार छोड़कर लगातार बना हुआ है। इधर, भोपाल को अर्बन टाइगर कैपिटल सिटी का दर्जा हासिल है। यहां पर बाघ और मनुष्य साथ-साथ रह रहे हैं।
तेंदुआ: मप्र को लैपर्ड स्टेट का दूसरी बार दर्जा मिला है। बीते सप्ताह जारी तेंदुआ स्टेटस रिपोर्ट-2022 के मुताबिक, मप्र में इनकी संख्या 3,907 हैं। देशभर में इनकी संख्या 13,874 है। देश के जिन 3 टाइगर रिजर्व में तेंदुओं की संख्या ज्यादा है, उनमें सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और पन्ना टाइगर रिजर्व शामिल हैं।
चीता: मप्र, देश का इकलौता राज्य है, जहां चीते को बसाया जा रहा है। करीब 5 दशक बाद पिछले साल इसकी एंट्री कूनो अभ्यारण्य में हुई। द.अफ्रीका और नाबीमिया से 20 चीते लाए गए थे। इनमें से 7 की मौत हो चुकी है। यहां आने के बाद 11 शावकों का जन्म हुआ। इनमें से 8 जीवित हैं।
गिद्ध: मप्र को गिद्ध स्टेट का तमगा मिलने वाला है। देश में सबसे ज्यादा गिद्ध यहीं हैं। हाल में गिद्ध गणना के प्रारंभिक आंकड़ों में 11 हजार के आसपास गिद्ध मप्र में हैं। किसी भी प्रदेश के मुकाबले यह सर्वाधिक है। 2021 में इनकी संख्या 9,446 थी। अधिकृत आंकड़े जारी होने के बाद एमपी को वल्चर स्टेट का दर्जा मिल जाएगा।
बाघों के बाद तेंदुए और गिद्धों की संख्या बढ़ना मप्र के लिए उपलब्धि है। इनकी बढ़ती संख्या का बड़ा कारण वन विभाग का बेहतर प्रबंधन है। हालांकि इसके साथ विभाग की चुनौतियां और जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही हैं। वर्तमान में बाघ और तेंदुए के शिकार पर रोक लग जाए तो इनकी संख्या और भी अधिक हो सकती है। - अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट, भोपाल
अन्य राज्यों की तुलना में मप्र में टाइगर रिजर्व की संख्या ज्यादा है। मैनेजमेंट बहुत ही अच्छा है। केंद्र और राज्य सरकार लगातार बजट जारी कर रही हैं। एनटीसीए सीधे निगरानी करता है। लैंड स्कैप और वाइल्ड लाइफ, इको सिस्टम बेस मैनेजमेंट अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। एक कमी दिखाई देती है, वह यह है वन्य प्राणियों के कॉरिडोर की। - अनूप नायक, पूर्व सदस्य, एनटीसीए, भुवनेश्वर ओडिसा
मप्र में बाघ, तेंदुए सहित अन्य वन्य प्राणियों के लिए अनुकूल माहौल है। इनके लिए ग्रासलैंड, पानी, हैबिटेट और पर्याप्त संख्या में शिकार के लिए वन्य प्राणी हैं। मप्र में वन्य प्राणियों का प्रभावी तरह से संरक्षण, सुरक्षा और पर्याप्त मॉनिटरिंग हो रही है, इस कारण मप्र में वन्य प्राणियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और मप्र के खाते में उपलब्धियां दर्ज हो रही हैं। - असीम श्रीवास्तव, वन बल प्रमुख, मप्र
सरकार और आम लोगों के प्रयास, संरक्षित वन क्षेत्र में तगड़ा नेटवर्क, टाइगर रिजर्व से 200 गांवों को बाहर निकालने के साथ ही एक्टिव वाइल्ड लाइफ मैनजमेंट को सक्रिय करने जैसे कई कारणों से मप्र वाइल्फ लाइफ के लिए अनुकूल है। सुरक्षा मैकेनिज्म मजबूत है और कई शिकारियों को जेल भेजा गया। वाइल्ड लाइफ क्राइम रेट कम हो रहा है। अब एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में वन्य प्राणियों के आने जाने के लिए कॉरिडोर बनाने की जरूरत है, ताकि जीन जेनेटिक μलो बना रहे। - जेएस चौहान, पूर्व वाइल्ड लाइफ वार्डन, मप्र





















