बेटमा में विवाद सुलझा :टेकरी क्षेत्र से हटेगा STP प्लांट, तीन विवादित प्लॉटों का आवंटन निरस्त

बेटमा (राहुल देवड़ा)। सलमपुर स्थित ऐतिहासिक मां अमन-चमन मंदिर परिसर, दशहरा मैदान एवं टेकरी क्षेत्र में प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और विवादित प्लॉट आवंटन को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल समाप्त होता दिखाई दे रहा है। करणी सेना और स्थानीय ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन के साथ हुई वार्ता में तीनों विवादित प्लॉटों का आवंटन निरस्त करने तथा प्रस्तावित STP प्लांट को अन्य स्थान पर स्थापित करने पर सहमति बनी है।
क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मामला
कई एकड़ में फैली ऐतिहासिक टेकरी बेटमा की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र मानी जाती है। इसी क्षेत्र में मां अमन-चमन मंदिर स्थित है। यहां प्रतिवर्ष मध्य प्रदेश के प्रमुख दशहरा मेलों में शामिल पारंपरिक दशहरा मेला, ऐतिहासिक घुड़दौड़ और निशानेबाजी प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है।
ग्रामीणों और करणी सेना ने जताया था विरोध
स्थानीय लोगों का आरोप था कि मंदिर एवं दशहरा मैदान के समीप सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने और कुछ भूखंडों का व्यावसायिक आवंटन किए जाने से धार्मिक आस्था एवं ऐतिहासिक धरोहर प्रभावित होगी। इसी मांग को लेकर करणी सेना ने लगातार विरोध दर्ज कराया और प्रशासन को तीन चरणों में ज्ञापन सौंपे। संगठन ने चेतावनी दी थी कि मांगें नहीं मानी गईं तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा। करणी सेना के जिला अध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया, तहसील अध्यक्ष महेश हाड़ा तथा गोविंद दरबार सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल भूमि का नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने का विषय है।
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बैठक में इन बिंदुओं पर बनी सहमति
प्रशासन के साथ हुई बैठक के बाद जिन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी, उनमें टेकरी एवं दशहरा मैदान क्षेत्र के भीतर आवंटित तीनों विवादित प्लॉटों का आवंटन निरस्त करना, प्रस्तावित STP प्लांट को अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करना तथा मंदिर, दशहरा मैदान, घुड़दौड़ और निशानेबाजी स्थल की सीमा निर्धारित कर भविष्य में इस परिधि के भीतर नए निर्माण एवं भू-आवंटन नहीं किए जाने की व्यवस्था शामिल है।

निर्णय से क्षेत्रवासियों में संतोष
निर्णय के बाद क्षेत्र के श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने संतोष व्यक्त किया। करणी सेना के पदाधिकारियों ने इस निर्णय का श्रेय क्षेत्रवासियों की एकजुटता और शांतिपूर्ण जनआंदोलन को दिया। वहीं, स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी बेटमा की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।
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