फर्जी FX Trade ऐप का जाल: सीहोर में 20 लाख की ठगी, तीन गिरफ्तार, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क का खुलासा

सीहोर। निवेश और ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का सपना दिखाकर लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने वाले साइबर गिरोह के खिलाफ सीहोर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कोतवाली थाना पुलिस ने शहर की शीतल बिहार कॉलोनी में पिछले छह महीने से संचालित हो रहे कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह ने लोगों को जाल में फंसाने के लिए ‘FX Trade’ नाम का फर्जी ट्रेडिंग ऐप तैयार कर रखा था। प्रारंभिक जांच में 20 लाख रुपए से अधिक की ठगी सामने आई है, जबकि पुलिस को रकम करोड़ों रुपए तक पहुंचने की आशंका है।
लोन का लालच देकर बैंक खाते ही बना दिए ठगी का हथियार
पुलिस जांच की शुरुआत शाजापुर जिले के मोहम्मदपुर निवासी 20 वर्षीय अभिषेक मुकाती की शिकायत से हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी सतीश ने अभिषेक को लोन दिलाने का झांसा दिया और उसके बैंक खाते से जुड़े जरूरी दस्तावेज, पासबुक, एटीएम कार्ड तथा बैंक खाते से लिंक सिम अपने कब्जे में ले लिया। बाद में अभिषेक को पता चला कि उसके खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है। इस शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस ने अपराध क्रमांक 587/26 के तहत धारा 318(4) बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
शीतल बिहार कॉलोनी में छह महीने से चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर
पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और जांच के आधार पर शीतल बिहार कॉलोनी स्थित ठिकाने पर दबिश दी। यहां कथित तौर पर पिछले छह महीने से फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। बाहर से सामान्य कार्यालय जैसा दिखने वाला यह सेटअप साइबर ठगी का पूरा केंद्र बना हुआ था। यहां से लोगों को फोन कर निवेश, शेयर बाजार और ट्रेडिंग में कम समय में भारी मुनाफे का लालच दिया जाता था।
‘FX Trade’ ऐप बना ठगी का सबसे बड़ा हथियार
गिरोह ने ठगी को विश्वसनीय दिखाने के लिए ‘FX Trade’ नाम का फर्जी ट्रेडिंग ऐप तैयार किया था। आरोपियों द्वारा फोन पर लोगों को ऐप के बारे में बताया जाता और उन्हें निवेश के नाम पर उसमें रकम जमा करने के लिए तैयार किया जाता था। पीड़ितों को ऐप पर निवेश और मुनाफे का आभासी खेल दिखाकर भरोसे में लिया जाता, जबकि वास्तविक रकम आरोपियों द्वारा नियंत्रित बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी।
किराए के बैंक खाते, एटीएम से तुरंत नकदी निकालने का खेल
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य दूसरों के बैंक खाते हासिल कर उन्हें ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। ठगी की रकम इन खातों में पहुंचते ही आरोपी एटीएम के माध्यम से नकदी निकाल लेते थे। इस तरीके का उद्देश्य रकम के डिजिटल ट्रेल को तोड़ना और असली संचालकों तक पुलिस की पहुंच मुश्किल बनाना था। पुलिस अब ऐसे सभी खातों और उनसे जुड़े लेन-देन की विस्तृत पड़ताल कर रही है।
NCRP जांच ने खोली अंतरराज्यीय ठगी की परतें
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने जब जब्त किए गए बैंक खातों की जानकारी राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर जांची तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, इन खातों के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। इससे आशंका मजबूत हुई कि सीहोर में चल रहा कॉल सेंटर किसी स्थानीय ठगी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।
छह कर्मचारी और रोज 100 लोगों को फंसाने का टारगेट
एएसपी प्रशांत चौबे ने बताया कि फर्जी कॉल सेंटर में छह कर्मचारी काम करते थे। प्रत्येक कर्मचारी को रोजाना करीब 100 लोगों को फोन करने का लक्ष्य दिया गया था। यानी हर दिन सैकड़ों संभावित पीड़ितों तक पहुंचने की रणनीति तैयार की गई थी। फोन पर निवेश और ट्रेडिंग में असाधारण मुनाफे का लालच देकर लोगों को फंसाया जाता था। पुलिस अब कॉल सेंटर में काम करने वाले अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
ब्लड डोनेशन डायरेक्ट्री से जुटाया डाटा, डार्कनेट की भी जांच
जांच में पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि आरोपियों ने देशभर के संपन्न और संभावित निवेशकों के मोबाइल नंबर हासिल करने के लिए ब्लड डोनेशन संबंधी डायरेक्ट्री का इस्तेमाल किया। इसके अलावा अधिक राशि निवेश करने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए डार्कनेट से डाटा लेने की बात भी सामने आई है। पुलिस इस पहलू की तकनीकी जांच कर रही है कि डाटा कहां से और किस माध्यम से हासिल किया गया।
20 लाख की ठगी सामने, करोड़ों तक पहुंच सकता है आंकड़ा
पुलिस पूछताछ में अब तक 20 लाख रुपए से अधिक की राशि फर्जी निवेश के नाम पर ठगे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि NCRP पर मिले रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच के बाद पुलिस को ठगी की कुल रकम करोड़ों रुपए तक पहुंचने की आशंका है। अलग-अलग राज्यों में दर्ज शिकायतों को जोड़कर गिरोह की वास्तविक आर्थिक गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
कॉल सेंटर से कंप्यूटर-मोबाइल और बैंकिंग दस्तावेज जब्त
दबिश के दौरान पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर से पांच कंप्यूटर सिस्टम, एक लैपटॉप, पांच कीपैड मोबाइल फोन, दो स्मार्टफोन और तीन अन्य मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इसके अलावा कई पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड तथा ‘FX Trade’ से संबंधित आईडी कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे हैं। जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच से गिरोह के संपर्कों, लेन-देन और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क के अन्य किरदारों की तलाश
पुलिस ने इस मामले में सतीश पिता कमल सिंह मेवाड़ा, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम भैंसरोद, जिला शाजापुर; कल्याण पिता स्वर्गीय करण मेवाड़ा, उम्र 21 वर्ष, निवासी ग्राम भैंसरोद, जिला शाजापुर तथा शुभम वर्मा पिता द्वारका प्रसाद वर्मा, उम्र 21 वर्ष, निवासी ग्राम सेमरा दांगी, सीहोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका खंगाली जा रही है।
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पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विशेष टीम ने की कार्रवाई
कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सीहोर श्रीमती सोनाक्षी सक्सेना के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे और नगर पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिनंदन शर्मा के मार्गदर्शन में की गई। थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक रविन्द्र यादव के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। कार्रवाई में उपनिरीक्षक विक्रम आदर्श, उपनिरीक्षक विवेक आर्य सहित थाना पुलिस और साइबर सेल के कर्मचारियों की भूमिका रही।
पुलिस की सख्त चेतावनी-बैंक खाता किराए पर देना पड़ सकता है भारी
सीहोर पुलिस ने आम लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी व्यक्ति को कमीशन, नौकरी, लोन या मुनाफे के लालच में बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक अथवा बैंक से लिंक मोबाइल सिम न दें। साइबर अपराधी ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम मंगाने के लिए करते हैं और खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकता है।
फर्जी ट्रेडिंग ऐप और मुनाफे के लालच से रहें सावधान
पुलिस ने नागरिकों से कहा है कि WhatsApp, Telegram या अनजान लिंक से मिले ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड न करें। निवेश से पहले ऐप और संबंधित संस्था की विश्वसनीयता की जांच करें। सोशल मीडिया या फोन कॉल पर कम समय में असाधारण मुनाफे का दावा करने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतें। ऑनलाइन ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।
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जांच आगे बढ़ी, करोड़ों की ठगी और बड़े नेटवर्क से उठ सकता है पर्दा
फिलहाल पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर फर्जी कॉल सेंटर का सेटअप जब्त कर लिया है, लेकिन मामला यहीं खत्म होता दिखाई नहीं दे रहा। जब्त मोबाइल, कंप्यूटर, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद गिरोह के मास्टरमाइंड, फर्जी ऐप तैयार करने वालों, बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों और देशभर में फैले संभावित संपर्कों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ इस साइबर नेटवर्क से जुड़े कई और नाम तथा करोड़ों रुपए के लेन-देन का खुलासा होने की संभावना है।












