13 करोड़ की साइबर ठगी का ग्वालियर से कनेक्शन, 110 सिम यूजर्स की जांच शुरू; फर्जी दस्तावेजों से सिम बेचने वालों पर शिकंजा

देशभर में हुए करोड़ों रुपए के फाइनेंशियल फ्रॉड के मामलों की जांच अब ग्वालियर तक पहुंच गई है। ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत पुलिस ने उन 110 सिम कार्ड यूजर्स की पड़ताल शुरू कर दी है जिनके नाम पर जारी मोबाइल सिम का इस्तेमाल देशभर में सामने आए करीब 170 साइबर ठगी के मामलों में किया गया। इन मामलों में ठगी की रकम करीब 13 करोड़ रुपए बताई जा रही है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि कई मामलों में जिन लोगों के नाम पर सिम कार्ड दर्ज थे, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। आशंका है कि उनके असली दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर सिम एक्टिव कराए गए और बाद में इन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाया गया।
6 थानों में दर्ज हुई FIR
ग्वालियर पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई तेज करते हुए जिले के मोहना, पुरानी छावनी, महाराजपुरा, बिजौली, हजीरा और सिरोल थानों में कार्रवाई शुरू की है। ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत अब तक सामने आए आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। डीएसपी क्राइम ब्रांच नागेंद्र सिंह सिकरवार के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों से मिले करीब 170 ठगी के मामलों में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड ग्वालियर के 110 लोगों के नाम पर दर्ज पाए गए। पुलिस अब इन सिम कार्ड के वास्तविक इस्तेमाल और उन्हें एक्टिव कराने वाले लोगों की कड़ियां जोड़ रही है।
जिनके नाम पर सिम, उन्हें ही नहीं थी जानकारी
जांच के दौरान पुलिस ने ऐसे लोगों से संपर्क किया, जिनके नाम पर सिम कार्ड जारी हुए थे। पूछताछ में कई लोगों ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उनके दस्तावेजों पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा है। पुलिस ने ऐसे लोगों के बयान दर्ज किए हैं। अब उन लोगों की तलाश की जा रही है जिन्होंने इन नागरिकों के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सिम कार्ड एक्टिव कराए और उन्हें आगे बेच दिया।
200 से 500 रुपए में बेची गईं सिम
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ सिम कार्ड महज 200 से 500 रुपए में साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए गए। मामले में लाखन धाकड़, सोनू धाकड़, संदीप राजावत और इशांत आनंद के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक इन आरोपियों पर दूसरे लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर सिम कार्ड जारी कराने और उन्हें आगे उपलब्ध कराने का आरोप है। लाखन और सोनू से पूछताछ में सिम कार्ड को कम कीमत में बेचने से जुड़ी जानकारी सामने आई है।
क्या है ऑपरेशन फास्ट 2.0?
ऑपरेशन फास्ट 2.0 यानी फोर्स्ड एक्टिवेटेड सिम टर्मिनेशन मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाया जा रहा विशेष अभियान है। इसका उद्देश्य साइबर अपराधियों तक पहुंचने वाली फर्जी या गलत तरीके से एक्टिवेट की गई सिम को चिन्हित करना और उनकी सप्लाई चेन पर कार्रवाई करना है। इस अभियान के तहत खास तौर पर ऐसे मामलों की जांच की जा रही है, जहां आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के वास्तविक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर सिम कार्ड जारी किए जाते हैं। बाद में इन सिम कार्ड को साइबर ठगी करने वाले गिरोहों तक पहुंचाने की आशंका रहती है।
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ठगी के साथ फर्जी बैंक खाते खोलने में भी इस्तेमाल
पुलिस की जांच में सामने आया है कि ग्वालियर से एक्टिवेट हुए इन 110 सिम कार्ड का इस्तेमाल केवल साइबर ठगी के लिए ही नहीं किया गया। इनमें से कुछ सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए तैयार किए जाने वाले बैंक खातों को खोलने में भी किए जाने की जानकारी सामने आई है। यही वजह है कि पुलिस अब सिम कार्ड जारी होने से लेकर उनके इस्तेमाल तक की पूरी कड़ी खंगाल रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन सिम कार्ड को किसने उपलब्ध कराया, इन्हें किस गिरोह ने इस्तेमाल किया और इनके जरिए किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया।
ठगी की रकम फंस जाए तो तुरंत शिकायत करें
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हो जाती है तो उसे बिना देरी किए संबंधित साइबर फ्रॉड शिकायत व्यवस्था पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय रहते शिकायत मिलने पर बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और पुलिस के बीच समन्वय के जरिए संदिग्ध खाते में मौजूद रकम को होल्ड या फ्रीज कराने का प्रयास किया जा सकता है। इससे ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और पीड़ित को पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
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सिम वेंडर से लेकर एजेंट तक पर होगी कार्रवाई
एसएसपी धर्मवीर सिंह ने कहा कि साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले वेंडर, एजेंट या किसी अन्य आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की मौजूदा जांच में अब 110 सिम कार्ड के पीछे मौजूद लोगों और पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने लाने पर फोकस है। यदि जांच में और लोग या सिम सप्लाई करने वाले एजेंट सामने आते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।




















