रायसेन। जिले के बरेली में शुक्रवार को सुबह एक दिल दहला एवं इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। जहां नगर परिषद के कचरा वाहन में एक नवजात बच्ची मिलने से हड़कंप मंच गया। बताया जा रहा है कि हेल्पर ने वाहन से बच्चे के रोने की आवाज सुनी और ड्राइवर को बताया। इसके बाद गाड़ी रोकी गई और कचरे के ढेर को हटाया गया, तो वहां मासूम बच्ची मिली। बच्ची को तत्काल बरेली सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हालत फिलहाल स्थिर है।
कचरा वाहन के ड्राइवर इरशाद और हेल्पर रवि रोज की तरह वार्ड नंबर 13 और 14 से कचरा उठा रहे थे। तभी रवि ने वाहन के पिछले हिस्से से रोने की आवाज सुनी। पहले तो उसने सोचा कि यह भ्रम हो सकता है, लेकिन आवाज लगातार सुनाई देने पर उसने ड्राइवर को बताया। जब दोनों ने गाड़ी रोककर देखा तो कचरे के बीच नवजात बच्ची पड़ी थी।
सूचना मिलते ही एनजीओ "पहल" के कुछ सदस्य मौके पर पहुंचे और बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। बरेली सिविल अस्पताल के डॉक्टर हेमंत यादव ने बताया कि बच्ची का वजन 2.5 किलो है और वह हायपोथर्मिया ( शरीर का तापमान अचानक कम हो जाना या बढ़ जाना) जैसी बीमारी से पीड़ित है। कचरे में गीले वातावरण और ठंडेपन की वजह से उसके शरीर का तापमान कम हो गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची को कुछ खरोंचें भी आई हैं, लेकिन फिलहाल वह होश में है और रो रही है। विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। जिसके बाद बरेली थाना प्रभारी कपिल गुप्ता ने बताया कि कचरा वाहन के रूट और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, पुरानी बस्ती होने से कई जगह कैमरे मौजूद नहीं हैं। लेकिन पुलिस अब क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं की सूची भी जांच रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हाल ही में किसकी डिलीवरी हुई है।
स्थानीय लोगों और पार्षदों का कहना है कि यह घटना समाज के लिए गहरी चिंता का विषय है। मासूम को कचरे में फेंकना न सिर्फ अमानवीय है बल्कि यह सामाजिक सोच पर भी सवाल खड़े करता है। साथ ही एनजीओ सदस्यों ने भी लोगों से अपील की है कि यदि कोई बच्चा पालने में असमर्थ हो, तो उसे इस तरह फेंकने के बजाय अस्पताल, पुलिस या किसी सामाजिक संस्थानों को सौंप दें।
घटना को लेकर राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने इस पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा- मानवता को शर्मसार न करो। उन्होंने समाज से अपील की कि मासूम बच्चों के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।