Naresh Bhagoria
7 Feb 2026
Shivani Gupta
7 Feb 2026
नवीन यादव, इंदौर। लोग वीआईपी नंबरों पर इतना पैसा क्यों खर्च करते हैं? इसकी वजह सिर्फ रसूख नहीं है। कई लोग व्यक्तिगत ब्रांडिंग और अंक ज्योतिष पर गहरा यकीन रखते हैं, इसलिए भी ज्यादा पैसा खर्च कर इन नंबरों को खरीदते हैं। ये नंबर आसानी से याद भी रहते हैं। मप्र में सबसे अधिक वाहन पंजीयन करने वाले इंदौर आरटीओ ने 2025 में वीआईपी और फैंसी नंबरों की नीलामी से 11.40 करोड़ रुपए की कमाई की। इस दौरान करीब 20,237 फैंसी और वीआईपी नंबर लोगों ने खरीदे। 2024 में इंदौर आरटीओ ने वीआईपी नंबरों की नीलामी से 10 करोड़ से अधिक कमाए थे।
करीब पांच साल पहले वीआईपी नंबरों की नीलामी की व्यवस्था केंद्र सरकार के वाहन पोर्टल से शुरू हुई। दो पहिया वाहन के लिए न्यूनतम राशि 5 हजार और कार के लिए 15 हजार है। 0001 नंबर (कार के लिए) की शुरुआती राशि एक लाख है। इसके बाद जिसकी अधिकतम बोली होती है, उसे नंबर दिया जाता है।
एजेंट के अनुसार, 0001, 0007 और 0009 नंबर लोगों का पसंदीदा नंबर है। 9000, 9999, 7777 और ऐसे नंबर जिनके अंत में 00 होता है, की भी काफी मांग रहती है।
2025 में सबसे महंगी बोली 5,55,000 की लगी। यह MP-09/AV-0001 नंबर के लिए लगी, जो साल का सबसे महंगा वीआईपी नंबर रहा। 0001 जैसे चुनिंदा नंबरों की मांग आज भी बनी हुई है।
मेरा भाग्यांक नंबर 1 है। ज्योतिष ने बताया था कि कोई भी नंबर रखें, तो 1 नंबर जरूर होना चाहिए। इसलिए मैंने गाड़ी नंबर 0001 लिया है। मेरी सभी गाड़ियों में 1 नंबर ही मिलेगा, जो अब मेरी पहचान भी बन गया है।
दीपक दरियानी, व्यवसायी
मेरे बेटे का जन्मदिन 11 नवंबर 2011 है। उसके जन्मदिन पर गाड़ी खरीदनी थी। सोचा क्यों न गाड़ी का ऐसा नंबर ले, जो यादगार बन जाए। हमने अपनी गाड़ी का नंबर 1111 लिया है। मेरे पास इसी नंबर की और भी गाड़ियां हैं।
सुनील अग्रवाल, बिल्डर