PU Special :बंडा में जहरीली शराब से 14 लोगों की मौत, मप्र में फिर उठे सवाल; दूसरे प्रदेशों से आ रही अवैध शराब पर शिकंजा क्यों नहीं?

सागर जिले के बंडा में अवैध और जहरीली शराब के सेवन से हुई 14 लोगों की मौत ने मध्यप्रदेश की एक्साइज सिस्टम पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में पड़ोसी राज्यों की तुलना में वैध शराब के दाम अत्यधिक होना, ग्रामीण क्षेत्रों में बेखौफ ओवररेटिंग और सीमाओं पर निगरानी नहीं होने से विभाग के अफसरों की नाकामी सामने आई है।
बंडा में जहरीली शराब से 14 लोगों की मौत, मप्र में फिर उठे सवाल; दूसरे प्रदेशों से आ रही अवैध शराब पर शिकंजा क्यों नहीं?
बंडा में जहरीली शराब से 14 लोगों की मौत

संतोष चौधरी, भोपाल। वर्ष 2021 में मंदसौर में जहरीली शराब पीने से 6 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद तत्कालीन अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने देशी शराब और सस्ती अंग्रेजी शराब की दरें नहीं बढ़ाने की स्पष्ट सिफारिश की थी, लेकिन हर साल आबकारी ठेकों की ऊंची नीलामी के चलते शराब के दाम बढ़ते चले गए। वहीं पड़ोसी राज्यों से मूल्य अंतर का फायदा उठाकर अंतरराज्यीय माफिया मप्र में शराब और उसका कच्चा माल खपा रहा है।

राजौरा कमेटी की सिफारिश भी दरकिनार

वर्ष 2021 में मंदसौर में जहरीली शराब पीने से 6 लोगों की मौत हो गई थी। इसको लेकर तत्कालीन अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने स्पष्ट सिफारिश की थी कि राज्य में देशी शराब और सस्ती अंग्रेजी शराब की दरें नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। तर्क साफ था-ऊंचे टैक्स के कारण जब वैध शराब महंगी बिकती है, तो ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग सस्ती कच्ची और अवैध शराब की ओर रुख करता है। इसके बावजूद, हर साल आबकारी ठेकों की ऊंची नीलामी के चलते शराब के दाम बढ़ते चले गए। बंडा में अवैध और जहरीली शराब के सेवन से हुई 14 लोगों की मौत के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि वैध शराब की कीमतों और अवैध शराब के बीच बढ़ते अंतर को लेकर आबकारी नीति की समीक्षा क्यों नहीं की गई। 

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पड़ोसी राज्यों से अंतर और तस्करी का खेल

बुंदेलखंड से सटे उत्तर प्रदेश, मालवा-निमाड़ से सटे राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में आबकारी ड्यूटी कम होने से शराब सस्ती है। इस मूल्य अंतर का फायदा उठाकर अंतरराज्यीय माफिया मप्र में शराब और उसका कच्चा माल, केमिकल और ओपी खपाया रहा है। हाल ही में हरियाणा से शराब भरकर आया ट्रक पकड़ा जाना और मंदसौर कांड में राजस्थान कनेक्शन का सामने आना इस अंतरराज्यीय नेटवर्क का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इससे सीमांत जिलों में अवैध शराब की तस्करी को लेकर निगरानी पर सवाल खड़े होते हैं। इंदौर के बीच शहर में पिछले दिनों दो ट्रक अवैध शराब के बरामद होने पर भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि जब शहर के बीचों बीच अवैध शराब की बड़ी खेप पहुंच रही है, तो अंतरराज्यीय सीमाओं पर निगरानी की स्थिति क्या है। मूल्य अंतर और सीमाओं पर निगरानी की कमी का फायदा अवैध शराब के नेटवर्क को मिल रहा है।

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ग्राउंड मॉनिटरिंग ठप,अमला सिर्फ औपचारिक

तत्कालीन आबकारी प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी खुद गुप्त रूप से दुकानें टेस्ट करवाकर ओवररेटिंग पर शिकंजा कसती थीं। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था ध्वस्त है। ठेकेदारों की मनमानी से ग्रामीण इलाकों में शराब तय एमआरपी से काफी ऊपर बिक रही है। आबकारी विभाग का अमला 50-60 लीटर कच्ची शराब जब्त कर छापे की खानापूर्ति करता है। जबकि अवैध सप्लाई की मुख्य जड़ों तक कार्रवाई नहीं पहुंच पाती। ओवररेटिंग पर ठोस कार्रवाई की जगह विभागीय अमले की खानापूर्ति की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में बेखौफ ओवररेटिंग और अवैध शराब की सप्लाई को रोकने में आबकारी विभाग की ग्राउंड मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

निगरानी और आबकारी नीति पर उठे सवाल

राजौरा कमेटी की सिफारिश में देशी शराब के दाम न बढ़ाने का सुझाव था, जिसे दरकिनार किया गया। यूपी, राजस्थान और हरियाणा की तुलना में मप्र में भारी टैक्स के कारण मूल्य अंतर बना हुआ है। सीमांत जिलों में अंतरराज्यीय सीमाओं से अवैध शराब की सुगम तस्करी हो रही है। वहीं ओवररेटिंग पर ठोस कार्रवाई की जगह विभागीय अमले की खानापूर्ति सवालों के घेरे में है। बंडा में 14 लोगों की मौत के बाद आबकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली को लेकर यह बहस फिर तेज हो गई है। सिर्फ छापे और थोड़ी मात्रा में कच्ची शराब जब्त करने से अवैध सप्लाई की मुख्य जड़ों तक पहुंचना मुश्किल है। इसके लिए सीमाओं की निगरानी, शराब के दाम, टैक्स स्ट्रक्चर और अंतरराज्यीय नेटवर्क पर एक साथ काम करने की जरूरत है।

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सिर्फ निलंबन से खत्म नहीं होगी समस्या

आबकारी मामलों के जानकार भुवन तोषनीवाल का कहना है कि सिर्फ आबकारी अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। सरकार को पड़ोसी राज्यों के रेट, टैक्स स्ट्रक्चर और तस्करी नेटवर्क की व्यापक समीक्षा कर आबकारी नीति का पोस्टमार्टम करना होगा। बंडा की घटना के बाद यह जरूरी हो गया है कि अवैध और जहरीली शराब की सप्लाई के पीछे मौजूद नेटवर्क तक कार्रवाई पहुंचे। साथ ही वैध शराब के दाम और ओवररेटिंग के मुद्दे पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा। बंडा में हुई 14 मौतों ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि आबकारी व्यवस्था में सिर्फ कार्रवाई दिखाने के बजाय सिस्टम की खामियों को दूर करने पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। राजौरा कमेटी की सिफारिशों से लेकर पड़ोसी राज्यों के मूल्य अंतर और अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क तक, पूरे आबकारी सिस्टम की व्यापक समीक्षा की जरूरत महसूस हो रही है।

अनुराग सुजानिया, जहरीली शराब और ये इत्तेफाक 

मुरैना के तत्कालीन एसपी अनुराग सुजानिया के समय 11 जनवरी 2021 को जहरीली शराब से 24 लोग मरे थे। अब अनुराग सुजानिया सागर एसपी हैं और आज वहां भी 11 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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