PU Special :50 दिन में तबादले से दुखी हुई IAS नेहा मारव्या, लिखा-अधीनस्थ ही अफसर का ट्रांसफर करा दें तो कैसे चलेगा सिस्टम?

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। जॉइन करने के 50 दिन के भीतर ही तबादला किए जाने पर नेहा मारव्या ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक साल में यह चौथी बार है, जब उनका नाम ट्रांसफर लिस्ट में आया है। मारव्या ने कहा कि एमपी आईएएस ऑफिसर एसोसिएशन का काम सिर्फ जन्मदिन की बधाई या मुबारकबाद देना नहीं है। उनकी पोस्ट के बाद कई पूर्व अपर मुख्य सचिव सहित पूर्व अधिकारियों ने अपने तबादलों और प्रशासनिक जीवन के अनुभव साझा किए। मारव्या इससे पहले भी एसोसिएशन के ग्रुप में अपनी पीड़ा बयान कर चुकी हैं। अब उनकी पोस्ट ने अधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारियों के बीच विवाद और तबादले को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।
50 दिन में तबादला,एक साल में चौथी बार नाम आया
5 सितंबर 2026 की ट्रांसफर लिस्ट में अपना नाम दोबारा देखकर नेहा मारव्या ने कहा कि वह बहुत परेशान और निराश हैं। उन्होंने बताया कि जॉइन करने के 50 दिनों के अंदर ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया। मारव्या के मुताबिक, एक साल में यह चौथी बार है, जब उनका नाम ट्रांसफर लिस्ट में आया है। उन्होंने कहा कि इस बार वह बहुत निराश महसूस कर रही हैं। इसी के साथ उन्होंने एमपी आईएएस ऑफिसर एसोसिएशन की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
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कर्मचारियों की बगावत और ट्रांसफर को लेकर सवाल
मारव्या ने अपनी पोस्ट में कहा कि जिन कर्मचारियों का कंट्रोल उनके पास नहीं, बल्कि विभाग के पास है, उन्होंने उनके खिलाफ बगावत कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारी उनकी डेस्क पर हाथ पटककर उन्हें ट्रांसफर करवाने की धमकी देते हैं। मारव्या के मुताबिक, उन्होंने सही चैनल के जरिए कर्मचारियों की बदतमीजी की रिपोर्ट की थी। उन्हें उम्मीद थी कि इस मामले में जरूरी कार्रवाई होगी, लेकिन इसके बजाय उनका ही ट्रांसफर कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि इससे क्या संदेश जाएगा और क्या एक आईएएस ऑफिसर इतना कमजोर होता है कि उसके कर्मचारी बगावत करके उसका ट्रांसफर करवा सकते हैं।
खामोशी और सब्र के बाद फिर सामने रखी पीड़ा
नेहा मारव्या ने कहा कि उन्होंने कई सालों तक खामोशी और सब्र बनाए रखा। उनके मुताबिक, उन्हें किनारे कर दिया गया और कोई काम नहीं दिया गया, लेकिन उन्होंने उम्मीद रखी कि हालात सुधरेंगे। उन्होंने कहा कि हमेशा साजिश करने वाले जीतते हैं और वह हार जाती हैं। मारव्या ने यह भी लिखा कि सिस्टम उन्हें बचाने में नाकाम रहा है। इससे पहले भी वह एसोसिएशन के ग्रुप में अपनी पीड़ा और अनुभव साझा कर चुकी हैं।
पूर्व आईएएस जुलानिया की सलाह पर लिखी पोस्ट
पूर्व आईएएस राधेश्याम जुलानिया की सलाह पर मारव्या ने कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर फिर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि जब उनके साथ काम करने वाले कर्मचारी, जिनका एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल उनके पास नहीं बल्कि विभाग के पास है, इस तरह का व्यवहार करें तो उन्हें क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी कभी भी ऑफिस से चले जाते हैं और बिना मंजूरी के छुट्टी पर पूरे ऑफिस के कर्मचारियों के चले जाने की बात भी सामने रखी। उन्होंने फाइलों को दबाकर रखने और जरूरी फाइल मांगने पर संबंधित व्यक्ति के छुट्टी पर चले जाने का भी जिक्र किया।
पूर्व अफसरों ने अपने अनुभव किए साझा
मारव्या की पोस्ट के बाद पूर्व एसीएस एसएन मिश्रा ने लिखा कि अच्छा काम करेंगी तो गवर्नमेंट आपको हमेशा बचाएगी। विमल जुल्का ने कहा कि ट्रांसफर पर जाने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। राधेश्याम जुलानिया ने कहा कि उनके साथ काम करने के अनुभव का आत्मपरीक्षण करना चाहिए और चीफ सेक्रेटरी बर्णवाल को संवेदनशील बताया। पीके दास ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि कलेक्टर बनने के बाद उन्हें 19-20 दिन में हटा दिया गया था, लेकिन बाद में सब ठीक हो गया।
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एसोसिएशन अध्यक्ष की नसीहत के बाद थमा लिखने का दौर
पूर्व अधिकारी अनीता दास ने मारव्या को एसोसिएशन के प्रेसीडेंट से मिलने और सपोर्ट मिलने की बात कही। इस पर धीरज माथुर, अवनि वैश्य और संदीप खन्ना ने समर्थन किया। केएम आचार्य ने कहा कि यह बात यहां नहीं आनी चाहिए, क्योंकि यहां की बातें बाहर निकल जाती हैं। रश्मि अरुण शमी ने जवाब में कहा कि खबर बाहर जा चुकी है और एक लिंक भी शेयर किया। बाद में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव की नसीहत के बाद ग्रुप में लिखने का दौर थम गया। मारव्या की पोस्ट ने अब यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसी अधिकारी और उसके अधीनस्थों के बीच विवाद होने पर समाधान का रास्ता क्या होना चाहिए। क्या शिकायतों की निष्पक्ष जांच पहले होनी चाहिए या अधिकारी का तबादला ही इसका समाधान है। उनके द्वारा उठाए गए सवालों ने प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारी और अधीनस्थ कर्मचारियों के बीच नियंत्रण और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है।



















