बालोद में रिश्तों का कत्ल,बहू और प्रेमी ने ससुर को करंट लगाकर मार डाला, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ससुर की हत्या के मामले में अदालत ने बहू और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार, बहू गीता निर्मलकर और उसके प्रेमी लेखराम निषाद ने ससुर मनोहर निर्मलकर की करंट लगाकर हत्या की थी। प्रेमी के घर आने और हारमोनियम सिखाने को लेकर ससुर विरोध करता था। हत्या के बाद आरोपियों ने मौत को साइकिल से गिरने के कारण हुआ हादसा बताने की कोशिश की, लेकिन अंतिम संस्कार से पहले शरीर पर चोट और जलने के निशान देखकर ग्रामीणों को संदेह हुआ। पुलिस की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले का खुलासा हुआ।
विरोध बना हत्या की साजिश की वजह
बालोद जिले के डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम खड़ेनाडीह में सामने आया यह मामला पारिवारिक रिश्तों को झकझोरने वाला है। पुलिस जांच के अनुसार, गांव की रहने वाली गीता निर्मलकर (30) की मुलाकात सेवा मंडली में भजन गाने के दौरान पड़ोसी गांव के संगीतकार लेखराम निषाद (25) से हुई थी। लेखराम उसे हारमोनियम सिखाता था। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं।

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घर आने पर ससुर जताता था नाराजगी
मृतक मनोहर निर्मलकर (63) को लेखराम का घर आना पसंद नहीं था। हारमोनियम सिखाने के बहाने उसके आने पर विवाद और गाली-गलौज की स्थिति बनती थी। अभियोजन के मुताबिक, इसी विरोध से नाराज होकर गीता और लेखराम ने ससुर की हत्या की साजिश रची।
सोते समय करंट लगाकर हत्या का आरोप
मामले में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, 16 जुलाई 2025 की रात करीब 12 बजे सो रहे मनोहर निर्मलकर को करंट लगाकर मार दिया गया। इसके बाद आरोपियों ने मौत की असली वजह छिपाने और घटना को सामान्य हादसा दिखाने की कोशिश की।

सुबह सुनाई साइकिल से गिरने की कहानी
17 जुलाई की सुबह गीता ने ग्रामीणों को बताया कि उसके ससुर रात में शराब पीकर साइकिल से गिर गए थे, जिसके कारण उनकी मौत हो गई। शरीर पर चोटों के निशान देखकर सवाल उठे तो उसने गिरने से चोट लगने और हल्दी लगाने की बात कही। शुरुआत में मौत को हादसा बताने की कोशिश की गई, लेकिन शव पर दिख रहे निशानों ने संदेह बढ़ा दिया।
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जल्द अंतिम संस्कार कराने की कोशिश से बढ़ा शक
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद लेखराम निषाद अंतिम संस्कार जल्द कराने की कोशिश कर रहा था। उसने श्मशान में लकड़ियां भिजवाने और अर्थी की तैयारी में भी सक्रियता दिखाई। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि मृतक का बेटा या करीबी रिश्तेदार नहीं होने के बावजूद वह अंतिम संस्कार की इतनी जल्दबाजी क्यों कर रहा है। इसी दौरान जब शव को चिता पर रखने से पहले कपड़ा हटाया गया, तो चेहरे, माथे और गले सहित शरीर पर चोट तथा जलने के निशान दिखाई दिए। इससे ग्रामीणों को अनहोनी की आशंका हुई और पुलिस को सूचना दी गई। इस तरह अंतिम संस्कार से पहले सामने आए संदेह ने हत्या की जांच की दिशा बदल दी।
पोस्टमॉर्टम और तकनीकी साक्ष्यों से खुला राज
पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की। पोस्टमॉर्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत का कारण करंट लगना सामने आया। इसके बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया गया और परिवार के सदस्यों की गतिविधियों, कॉल डिटेल तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की गई। जांच के दौरान पुलिस ने बिजली का तार, रबर के दस्ताने, खून लगा गमछा और मोबाइल फोन सहित अन्य सामग्री जब्त की। पुलिस के मुताबिक, जुटाए गए साक्ष्यों और तकनीकी जानकारी के आधार पर दोनों आरोपियों की भूमिका सामने आई। इसके बाद न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया।

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अदालत ने दोनों को सुनाई उम्रकैद
मामले की सुनवाई के बाद एडीजे न्यायालय ने गीता निर्मलकर और लेखराम निषाद को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश सिंह ने की थी। राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक घनश्याम सिंह साहू ने न्यायालय में पैरवी की।




















