ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन को हाई कोर्ट में चुनौती, रेडिट बोला - यह राजनीतिक बहस पर बड़ी रोक है

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट पर लगाया गया दुनिया का पहला प्रतिबंध "बिना सोचे-समझे" लिया गया फैसला है। इस कानून को चुनौती देने वाली पहली कानूनी सुनवाई के दौरान, रेडिट (Reddit) की ओर से पेश वकील ने देश की शीर्ष अदालत से कहा कि यह प्रतिबंध "राजनीतिक बहस पर एक बहुत बड़ी रोक" लगाता है। रेडिट और एक लिबर्टेरियन (व्यक्तिगत स्वतंत्रता समर्थक) समूह ने इस कानून को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह कानून प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 16 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने की अनुमति देने से रोकता है। 2025 के आखिर में लागू हुए इस कानून को माता-पिता का समर्थन तो मिला, लेकिन टेक्नोलॉजी कंपनियों ने इसका विरोध किया।
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दूसरे देशों में भी लगाई जा रही रोक
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अगर अदालत इस कानून के खिलाफ फैसला सुनाती है तो इससे प्रभावित प्लेटफॉर्म्स और भी कानूनी चुनौतियां पेश कर सकते हैं। साथ ही दुनिया भर में इस तरह के प्रतिबंधों को लागू करने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ सकती है। ब्रिटेन और मलेशिया जैसे देश भी युवाओं की मानसिक और शारीरिक भलाई की सुरक्षा के लिए ऐसे ही कदम उठा रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई सरकार और उसके संचार मंत्री ने कहा है कि वे इस चुनौती का डटकर सामना करेंगे। उन्हें इस मामले में प्रतिवादी (defendant) बनाया गया है। रेडिट का तर्क है कि यह प्रतिबंध युवाओं की आवाज को दबाता हैरेडिट की ओर से पेश वकील पेरी हर्जफेल्ड ने अदालत को बताया कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट रखने से रोकने का मतलब है कि वे आधुनिक दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण संचार प्लेटफॉर्म्स पर न तो कोई कंटेंट बना सकते हैं और न ही किसी कंटेंट पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
आरोप- कानून को बिना सोचे-समझे बनाया
हर्जफेल्ड ने कहा- यह ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक बहस पर एक बहुत ही गंभीर प्रतिबंध है। उन्होंने आगे कहा कि यह कानून युवाओं के लिए काफी हद तक पाबंदियां लगाता है। उन्होंने कहा कि रेडिट युवा उपयोगकर्ताओं को नुकसान से बचाने के उद्देश्य का समर्थन करता है, लेकिन उनका तर्क था कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह कानून एक प्रभावी तरीका नहीं है। इस कानून को बिना सोचे-समझे बनाया गया और यह अक्षम है। हर्जफेल्ड ने कहा कि इसमें नाबालिगों को इन प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचने से रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं बताए गए हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इन प्रतिबंधों में अन्य ऑनलाइन जगहें शामिल नहीं हैं जहां साइबर बुलिंग (ऑनलाइन परेशान करना) होती है, जैसे कि गेमिंग वेबसाइट्स।
सरकार पर आरोप रेग्यूलेट नहीं कर रही
हर्जफेल्ड ने बताया कि हालांकि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने या टिप्पणी करने के लिए आमतौर पर उपयोगकर्ताओं को अपने अकाउंट में लॉग इन करना पड़ता है। हालांकि काफी सारा कंटेंट ऐसा है जिसे बिना लॉगइन किए भी देखा जा सकता है। उन्होंने अदालत से कहा- अगर सरकार (कॉमनवेल्थ) को सोशल मीडिया के कुछ खास फीचर्स को लेकर चिंता है तो उसे उन फीचर्स को रेगुलेट करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यह नहीं किया है।
ऑस्ट्रेलिया ने कानून लागू करने के उपायों को सख्त किया
प्रतिबंध लागू होने के बाद से कई अध्ययनों से पता चला है कि तय उम्र सीमा से कम उम्र के अधिकांश किशोर अभी भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया के ई-सेफ्टी कमिश्नर की रिसर्च भी शामिल है। इसके जवाब में, सरकार ने कानून का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म्स के लिए अधिकतम जुर्माना दोगुना करके A$99 मिलियन (ऑस्ट्रेलियन डॉलर,$69.5 मिलियन) कर दिया है। साथ ही सरकार ने जानकारी हासिल करने के लिए ई-सेफ्टी कमिश्नर की शक्तियों का दायरा भी बढ़ा दिया है। इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि वह कुछ सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।




















