रूस के ड्रोन अब और भी खतरनाक, बड़े एंटी-जैमर एंटेना से लैस कर रहा मास्को, यूक्रेन के लिए मुश्किल होगा रोकना

कीव। रूस यूक्रेन की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का मुकाबला करने के लिए अपने हमलावर ड्रोनों को बड़े एंटी-जैमर एंटेना से लैस कर रहा है। इससे कीव के लिए रूसी हमलों को बाधित करना और भी मुश्किल हो सकता है। इन अपग्रेड का उद्देश्य सैटेलाइट नेविगेशन सिग्नलों को हस्तक्षेप से बचाना है, जिससे ड्रोन यूक्रेनी जैमिंग सिस्टम से प्रभावित क्षेत्रों में भी अपने तय उड़ान पथ पर बने रह सकें। डिफेंस न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार रूस अपने ड्रोनों को रूसी कंपनी वीएनआईआईआर-प्रोग्रेस द्वारा विकसित उन्नत कोमेटा सैटेलाइट नेविगेशन मॉड्यूल से लैस कर रहा है। ये मॉड्यूल इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप की पहचान और उसे दबाने के लिए कई एंटेना एलिमेंट का उपयोग करते हैं, जिससे ड्रोन अपने सैटेलाइट सिग्नलों को बाधित करने के प्रयासों के बावजूद नेविगेशन बनाए रख सकते हैं।
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नए उन्नत ड्रोन का भी पता चला
रूस पहले से ही बड़े पैमाने पर 16-एलिमेंट वाले एंटेना एरे का उपयोग कर रहा है और 20- एलिमेंट वाले एडिशन के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट में यूक्रेनी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध विशेषज्ञ सेरही बेस्क्रेस्तनोव के हवाले से कहा गया है कि यूक्रेनी सेना ने कीव पर हमलों के दौरान बड़े 32-एलिमेंट वाले एरे ले जाने वाले शाहिद ड्रोनों का भी पता लगाया है।
कोमेटा मॉड्यूल कैसे करता है काम
उन्नत कोमेटा मॉड्यूल में कई छोटे रिसीविंग एलिमेंट का उपयोग किया जाता है। इन्हें पैच एंटेना के रूप में जाना जाता है, यह एक सरणी में व्यवस्थित होते हैं। ये एलिमेंट ड्रोन को यूक्रेनी जैमिंग सिस्टम द्वारा उत्पन्न हस्तक्षेप से असली सैटेलाइट-नेविगेशन सिग्नलों को अलग करने में मदद करते हैं। हस्तक्षेप की दिशा की पहचान करके सिस्टम अवांछित सिग्नलों को दबा सकता है, जबकि सैटेलाइट-नेविगेशन डेटा प्राप्त करना जारी रख सकता है। एंटेना एलिमेंट की संख्या बढ़ाने से सिस्टम की कई दिशाओं से हस्तक्षेप को फिल्टर करने की क्षमता में सुधार होता है। बड़े एंटेना सरणियों से रूसी ड्रोनों के खिलाफ पारंपरिक GPS जैमिंग कम प्रभावी हो सकती है।
यूक्रेन अपनी रक्षा के लिए ड्रोनों को भटकाता है
यूक्रेन ने सैटेलाइट-नेविगेशन सिग्नलों को बाधित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध पर व्यापक रूप से भरोसा किया है। इससे आने वाले ड्रोन अपने मार्ग से भटक जाते हैं या उनकी सटीकता कम हो जाती है। यूक्रेनी विशेषज्ञ अलग-अलग सैटेलाइट-नेविगेशन फ्रीक्वेंसी पर सिग्नलों को बाधित करने के लिए मल्टी-बैंड जैमिंग की जांच कर रहे हैं। एक अन्य विकल्प GPS स्पूफिंग है, जिसमें ड्रोन के नेविगेशन सिस्टम को गुमराह करने और उसे उसके इच्छित मार्ग से मोड़ने के लिए गलत स्थिति की जानकारी प्रसारित करना शामिल है।
रूस के बढ़ते ड्रोन शस्त्रागार से खतरा
एंटीना को अपग्रेड करना, रूस की ड्रोन युद्ध क्षमताओं के व्यापक विस्तार का हिस्सा है। मॉस्को अपने शहीद प्रकार के ड्रोन हमलों का दायरा बढ़ा रहा है। साथ ही 'गेरान-3', 'गेरान-4' और 'गेरान-5' जैसे तेज गति वाले जेट-संचालित ड्रोन भी शामिल कर रहा है। पारंपरिक प्रोपेलर-संचालित ड्रोनों के विपरीत ये ड्रोन टर्बोजेट इंजन का इस्तेमाल करते हैं। इसके कुछ मॉडल 600 किमी प्रति घंटे तक की गति पकड़ सकते हैं। इनकी तेज गति के कारण, यूक्रेन की वायु-रक्षा इकाइयों (air-defence units) को आने वाले खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और रोकने के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। जेट-संचालित ड्रोनों का बढ़ता इस्तेमाल यूक्रेन के वायु-रक्षा नेटवर्क पर दबाव डाल रहा है। यूक्रेन, रूसी हवाई हमलों का मुकाबला करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, मोबाइल वायु-रक्षा टीमों और अपेक्षाकृत सस्ते इंटरसेप्टर ड्रोनों पर निर्भर है।




















