विधायक आरिफ मसूद बोले-अदालतों से आस्थाओं पर फैसले हो रहे तो उज्जैन की शाही मस्जिद और हनुमान मंदिर के लिए अलग रवैया क्यों?

भोपाल। राम मंदिर से लेकर कई मामलों तक अदालत ने धार्मिक आस्थाओं को सर्वोपरि रखा। इन्हीं के आधार पर अपना फैसला दिया। यही व्यवहार उज्जैन की शाही जामा मस्जिद और हनुमान मंदिर के बारे में क्यों नहीं अपनाया जा रहा है। क्या वह आस्थाएं अलग थीं, यह आस्थाएं अलग तरह की हैं।विधायक आरिफ मसूद ने सोमवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में यह सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उज्जैन शाही जामा मस्जिद को लेकर जब चर्चा का दौर जारी है तो पुलिस प्रशासन को उतावलापन दिखाने की जरूरत क्या है?
'प्रदेश के गृह मंत्री संज्ञान लें'
विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि प्रदेश के गृहमंत्री को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। ऐसी घटनाओं पर भविष्य में रोक लगाने की पहल भी उन्होंने की है। मसूद ने इस बात को खारिज किया कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वालों की तरफ से पुलिस पर पत्थर उछाले गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन की यह कहानी पुरानी हो चुकी कि पत्थर भी खुद ही उछालो और इल्जाम भी यहीं धर दो।
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'यह आजादी के पहले की मीनार'
निर्माण और विकास के नाम पर मस्जिद की मीनार को निशाना बनाए जाने पर मसूद ने कहा कि यह आजादी से पहले की मीनार है, जिसको ढहाने की कई कोशिश हो चुकी। प्रशासन को संविधान और उसके तहत किए गए प्रावधानों के साथ कोई कदम बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शाही जामा मस्जिद मामले में पहले 6 फीट अतिक्रमण माना जा रहा था, बातचीत के बीच यह दायरा 3 फीट तक आ गया। दुकानों के छज्जे गिराने तक बात स्वीकार की जा सकती है, लेकिन कोई भी कार्यवाही सिर्फ द्वेषता से की जाए, यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
'हनुमान मंदिर के लिए भी हम आगे आए'
मसूद ने इस कार्यवाही के घेरे में आ रहे हनुमान मंदिर को लेकर भी रोष जताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था किसी भी वर्ग की आहत न की जाए। उन्होंने कहा कि विकास अनिवार्य हो सकता है, सुविधाएं आगे रखी जा सकती हैं लेकिन उनको आस्थाओं को कुचलकर पूरा नहीं किया जाना चाहिए।
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