लव जिहाद फंडिंग के बाद फर्जी शस्त्र लाइसेंस की जांच, कॉंग्रेस के पूर्व पार्षद को जम्मू ले गई पुलिस

इंदौर । लव जिहाद के लिए कथित फंडिंग के मामले में गिरफ्तार पूर्व पार्षद और कुख्यात बदमाश अनवर कादरी उर्फ अनवर डकैत की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जिस अनवर कादरी का नाम कुछ समय पहले हिंदू युवतियों को कथित तौर पर पहचान बदलकर प्रेमजाल में फंसाने और इसके लिए युवकों को आर्थिक मदद देने के मामले में सामने आया था, अब उसकी फाइल का एक और अध्याय पुलिस को जम्मू-कश्मीर तक ले गया है। फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में सदर बाजार पुलिस अनवर को लेकर रामबन और कठुवा पहुंची है।पुलिस के अनुसार ने वर्ष 2008 में जम्मू-कश्मीर के रामबन से शस्त्र लाइसेंस बनवाया था। पूछताछ के दौरान उसने लाइसेंस बनवाने में मदद करने वाले एक एजेंट के बारे में जानकारी दी है। अब पुलिस उसकी बताई जानकारी की मौके पर तस्दीक करने के साथ ही लाइसेंस से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगाल रही है।
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पहले लव जिहाद फंडिंग ने बढ़ाई थी मुश्किलें
अनवर कादरी का नाम इससे पहले लव जिहाद के लिए कथित फंडिंग से जुड़े मामले में सामने आया था। पुलिस जांच के दौरान साहिल शेख और अल्ताफ के नाम सामने आए थे। आरोप है कि दोनों ने सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बदलकर हिंदू युवतियों से संपर्क किया था। पुलिस के अनुसार मामले की जांच में अनवर कादरी पर दोनों युवकों को आर्थिक मदद देने के आरोप भी सामने आए थे।
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जांच में यह आरोप सामने आया था कि साहिल को कथित तौर पर दो लाख रुपए और अल्ताफ को एक लाख रुपए दिए गए थे। इसके बाद दोनों ने सोशल मीडिया पर अलग नामों से प्रोफाइल तैयार किए। साहिल ने कथित तौर पर अपना नाम अर्जुन और अल्ताफ ने राज रखा था। युवतियों से संपर्क और पहचान छिपाने से जुड़े आरोपों के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि और अनवर कादरी की वास्तविक भूमिका पुलिस जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
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अब हथियार लाइसेंस की जांच ने खोली दूसरी कड़ी
लव जिहाद फंडिंग मामले की जांच के बाद अब अनवर कादरी से जुड़ा फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला पुलिस के सामने है। सदर बाजार थाना प्रभारी पीएल शर्मा के अनुसार अनवर ने पूछताछ में बताया कि उसने वर्ष 2008 में रामबन से शस्त्र लाइसेंस बनवाया था।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि लाइसेंस हासिल करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे, प्रक्रिया किस माध्यम से पूरी हुई और इसमें एजेंट की क्या भूमिका थी। अनवर द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस टीम उसे रामबन और कठुवा लेकर जा रही है।
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एजेंट की तलाश से खुल सकते हैं पुराने राज
पुलिस का फोकस अब उस एजेंट तक पहुंचने पर है, जिसका नाम पूछताछ में सामने आया है। टीम संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सत्यापन करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वर्ष 2008 में लाइसेंस जारी कराने के दौरान नियमों का पालन हुआ था या नहीं।यदि जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं या लाइसेंस जारी कराने में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो पुलिस मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी जांच सकती है।
पुराने मामलों के बाद फिर जांच के केंद्र में अनवर
अनवर कादरी के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज होने और विवादों में नाम आने के बाद लव जिहाद फंडिंग प्रकरण ने उसकी मुश्किलें बढ़ाई थीं। अब फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में जांच का दायरा इंदौर से निकलकर जम्मू-कश्मीर तक पहुंच गया है।












