सूत्रों के अनुसार दोनों बंदियों के बीच किसी पुराने विवाद को लेकर बहस शुरू हुई थी। देखते ही देखते दोनों आक्रामक हो गए और जेल परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बन गई। मामला बिगड़ता देख जेल प्रहरी तुरंत मौके पर पहुंचे और दोनों को अलग किया। इसके बाद वरिष्ठ जेल अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। फिलहाल जेल प्रशासन इस मामले में आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी देने से बच रहा है।
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डॉक्टर पर हमले की साजिश में जेल में बंद है हेमंत यादव
हेमंत यादव का नाम हाल ही में विजयनगर क्षेत्र में डॉक्टर पर हमले की साजिश रचने के मामले में सामने आया था। विजयनगर थाना में 16 दिसंबर को डॉ. शिवकुमार यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि दो बदमाशों ने उनकी कार रोककर हमला किया और लोहे की रॉड से कार का शीशा तोड़ दिया। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय जानकारी के आधार पर खुलासा हुआ कि इस हमले की साजिश जेल में बंद हेमंत यादव ने रची थी।
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पुलिस के अनुसार हेमंत ने जेल में बंद साजिद, मोहसिन और कालू के साथ मिलकर योजना बनाई थी। आरोप है कि उसने आरोपियों की जमानत कराने और वारदात के लिए पैसे देने की भी बात कही थी। पुलिस जांच में सामने आया कि हेमंत यादव की डॉक्टर एस.के. यादव से पुरानी रंजिश थी। वर्ष 2022 में डॉक्टर ने उसके बेटे मोहित यादव का इलाज किया था, जिसमें पैर काटना पड़ा था। हेमंत यादव इसे डॉक्टर की लापरवाही मानता था और इसी रंजिश के चलते उसने हमला करवाने की साजिश रची।
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कई गंभीर मामलों में आरोपी है हेमंत यादव
हेमंत यादव पर 26 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। वर्ष 1996 में जानलेवा हमले के मामले में वह लंबे समय तक फरार रहा। जमानत के लिए हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक अपील की गई, लेकिन राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर के निर्देश दिए थे, लेकिन उसने आत्मसमर्पण नहीं किया। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सूत्रों के मुताबिक हेमंत यादव पर तुकोगंज थाने और कोर्ट से केस से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब करवाने के आरोप भी लगे थे। हालांकि इस मामले में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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‘लव जिहाद’ फंडिंग मामले में जेल में है अनवर कादरी
वहीं पूर्व पार्षद अनवर कादरी ‘लव जिहाद’ फंडिंग और अन्य आपराधिक मामलों में जेल में बंद है। बाणगंगा पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों साहिल शेख और अल्ताफ शाह ने पूछताछ में दावा किया था कि अनवर कादरी ने हिंदू युवतियों को फंसाने और शादी करने के लिए आर्थिक मदद दी थी।इन आरोपों के बाद इंदौर नगर निगम ने नवंबर 2025 में उसकी पार्षद सदस्यता समाप्त कर दी थी और उसे पांच साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया था।
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कैसे पढ़ा था नाम डकैत
अनवर कादरी पर पहले भी कई गंभीर मामले दर्ज रहे हैं। वर्ष 1996 में उज्जैन के महाकाल थाने में डकैती का मामला दर्ज होने के बाद वह “अनवर डकैत” के नाम से चर्चित हुआ। वर्ष 2011 में कांग्रेस पार्षद रहते हुए जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने उसे, उसके भाई और एक अन्य आरोपी को एक-एक साल की सजा सुनाई थी। उस मामले में पुलिस ने हथियार भी बरामद किए थे।