अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत, बेटी की शादी में शामिल होने के लिए 4 दिसंबर तक बढ़ी सरेंडर की समय सीमा

मोकामा से विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दुलार चंद यादव हत्याकांड में आरोपी अनंत सिंह के आत्मसमर्पण करने की समय सीमा अदालत ने बढ़ाकर 4 दिसंबर 2026 कर दी है। इससे पहले उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था। समय सीमा बढ़ने के बाद अब अनंत सिंह 25 नवंबर को अपनी बेटी शिवांगी सिंह की शादी में शामिल हो सकेंगे। अनंत सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश वकील ने अदालत को बताया कि उनकी बेटी शिवांगी सिंह का विवाह 25 नवंबर 2026 को होना है। परिवार में शादी की तैयारियों और मांगलिक कार्यक्रमों को देखते हुए आत्मसमर्पण के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की गई थी। अदालत ने इस दलील पर विचार करते हुए सरेंडर की समय सीमा बढ़ाने का आदेश दिया।
4 दिसंबर तक जांच अधिकारी या अदालत के सामने करना होगा सरेंडर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अनंत सिंह अपनी बेटी की शादी और उससे जुड़े पारिवारिक रीति-रिवाजों में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, उन्हें 4 दिसंबर 2026 तक संबंधित जांच अधिकारी या अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना अनिवार्य होगा। अदालत की ओर से दी गई यह मोहलत निर्धारित समय तक ही है।
दुलार चंद यादव हत्याकांड से जुड़ा है मामला
अनंत सिंह के खिलाफ यह मामला अक्टूबर 2025 में हुए दुलार चंद यादव हत्याकांड से जुड़ा है। इस मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया है। पटना हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। हालांकि पीड़ित परिवार की ओर से दुलार चंद यादव के पोते ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर लगाई थी रोक
याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को फिलहाल निलंबित कर दिया था। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी कि हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को जमानत देते समय अपराध की गंभीरता और उनके खिलाफ दर्ज करीब 67 आपराधिक मुकदमों की पृष्ठभूमि पर उचित तरीके से विचार नहीं किया।
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पुलिस को चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस और जांच अधिकारी को दुलार चंद यादव हत्याकांड की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने और पूरक आरोपपत्र दाखिल करने का सख्त निर्देश भी दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद मामले पर दोबारा सुनवाई की जाएगी।




















