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दिल्ली की जहरीली हवा से बढ़ रहा डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा, डॉक्टरों ने बताया प्रदूषण का शरीर पर असर

दिल्ली में AQI 482 पहुंचने के बीच डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है।
दिल्ली की जहरीली हवा से बढ़ रहा डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा, डॉक्टरों ने बताया प्रदूषण का शरीर पर असर
जहरीली हवा से बढ़ रहा डायबिटीज और हार्ट डिजीज का खतरा

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा और घने स्मॉग के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने वायु प्रदूषण के गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चेतावनी दी है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण केवल सांस से जुड़ी बीमारियों को ही नहीं बढ़ाता, बल्कि टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकता है। मैक्स हेल्थकेयर के एंडोक्रिनोलॉजी और डायबेटोलॉजी विभाग के ग्रुप चेयरमैन डॉ. अम्बरीश मिथल ने वायु प्रदूषण को टाइप-2 डायबिटीज का एक स्थापित पर्यावरणीय कारक बताया है। वहीं मेदांता के डॉ. रणदीप गुलेरिया ने इसे 'साइलेंट किलर' बताते हुए कहा कि यह पहले से मौजूद बीमारियों को और गंभीर बना सकता है। गुरुवार 5 नवंबर की सुबह दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) सुबह 8:01 बजे 482 दर्ज किया गया। कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में रही। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदूषण का असर बच्चों, बुजुर्गों, सांस और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के साथ-साथ स्वस्थ व्यक्तियों पर भी पड़ सकता है।

एक महीने का PM2.5 एक्सपोजर भी बढ़ा सकता है ब्लड शुगर

डॉ. अम्बरीश मिथल के मुताबिक वायु प्रदूषण और डायबिटीज के बीच सीधा संबंध सामने आया है। उन्होंने बताया कि भारत में हुए अध्ययनों में PM2.5 के संपर्क और डायबिटीज के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर की व्यापकता के बीच संबंध देखा गया है। उनके अनुसार PM2.5 के संपर्क में केवल एक महीने रहने से भी ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने पर डायबिटीज का जोखिम 22 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में पहले से ही डायबिटीज के मामले बड़ी संख्या में हैं, ऐसे में वायु प्रदूषण इस स्वास्थ्य चुनौती को और गंभीर बना सकता है।

फेफड़ों से खून तक पहुंचते हैं प्रदूषण के बारीक कण

डॉ. मिथल ने बताया कि PM2.5 जैसे बेहद छोटे प्रदूषक कण सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचते हैं और वहां से रक्त प्रवाह में शामिल हो सकते हैं। इनमें नाइट्रेट, सल्फेट, भारी धातुएं और कार्बन जैसे तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ये कण रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी दीवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे सूजन, हाई ब्लड प्रेशर और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इनका असर अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज पर भी पड़ सकता है, जहां इंसुलिन का निर्माण होता है। इससे इंसुलिन के स्राव और उसके काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ना भी टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़ा है।

प्रदूषण पहले से बीमार लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक

मेदांता के इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल मेडिसिन, रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन के चेयरमैन डॉ. रणदीप गुलेरिया ने वायु प्रदूषण को 'साइलेंट किलर' बताया। उनके मुताबिक, प्रदूषण कई बार सीधे जानलेवा स्थिति पैदा करने के बजाय पहले से मौजूद बीमारियों को बिगाड़कर शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि जब AQI गंभीर या बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंच जाता है, तो क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे समय में अस्पतालों के इमरजेंसी विभाग में सांस लेने में परेशानी और खांसी की शिकायत वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। कुछ मरीजों को वार्ड या ICU में भर्ती करने की भी जरूरत पड़ती है।

स्वस्थ लोगों को भी हो सकती है सांस लेने में परेशानी

डॉ. गुलेरिया के अनुसार प्रदूषण का असर केवल पहले से बीमार लोगों तक सीमित नहीं रहता। हवा की गुणवत्ता बेहद खराब होने पर स्वस्थ लोगों को भी सीने में जकड़न, सांस फूलने, आंखों से पानी आने और खांसी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं COPD अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों में प्रदूषण के कारण फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं में सूजन बढ़ सकती है। इससे उनकी मौजूदा बीमारी गंभीर हो सकती है शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घट सकता है और सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो सकती है।

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सर्दियों में बढ़ जाता है प्रदूषण

डॉ. गुलेरिया ने प्रदूषण बढ़ने के पीछे उत्सर्जन के साथ मौसम की परिस्थितियों को भी जिम्मेदार बताया। उनके मुताबिक, भारत का इंडो-गंगेटिक मैदान समुद्र से दूर स्थित क्षेत्र है। सर्दियों में ठंडी हवा और कम हवा की गति के कारण प्रदूषक जमीन के करीब जमा हो जाते हैं। हवा की रफ्तार कम होने से ये कण आसानी से दूर नहीं जा पाते और प्रदूषण लंबे समय तक बना रहता है। उन्होंने प्रदूषण के प्रमुख कारणों में पराली जलाने, डीजल के बढ़ते इस्तेमाल, सड़कों पर वाहनों की संख्या, पटाखों और निर्माण गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन को शामिल किया। उनका कहना है कि प्रदूषण से निपटने के लिए इन सभी स्रोतों पर एक साथ काम करना जरूरी है। पराली जलाने और पटाखों के इस्तेमाल में कमी लाने से प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

बच्चों के फेफड़ों के विकास पर भी पड़ता है असर

डॉ. गुलेरिया ने लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, वायु प्रदूषण जीवन प्रत्याशा को कम कर सकता है और बच्चों के फेफड़ों के विकास को प्रभावित कर सकता है। अध्ययनों में खराब हवा के संपर्क में रहने वाले बच्चों के फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होने की बात सामने आई है। इसलिए बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषण के दिनों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर उन लोगों को सतर्क रहना चाहिए, जिन्हें पहले से सांस या दिल से जुड़ी कोई बीमारी है।

प्रदूषण से बचने के लिए डॉक्टरों ने दी ये सलाह

डॉ. गुलेरिया ने खराब AQI के दौरान स्वास्थ्य जोखिम कम करने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

  • घर के अंदर रहें: AQI बहुत खराब होने पर अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें।
  • N95 मास्क पहनें: बाहर जाना जरूरी हो तो N95 मास्क का इस्तेमाल करें।
  • खुली हवा में व्यायाम न करें: प्रदूषण के दौरान बाहर दौड़ने, टहलने और एक्सरसाइज करने से बचें।
  • दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें: प्रदूषित हवा को घर के अंदर आने से रोकने की कोशिश करें।
  • एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें: घर के अंदर हवा की गुणवत्ता बेहतर रखने के लिए एयर प्यूरीफायर मददगार हो सकता है।
  • दवाएं नियमित लें: अस्थमा या सांस की बीमारी के मरीज अपनी दवाएं और इनहेलर समय पर लेते रहें।
  • लक्षण बढ़ने पर डॉक्टर से मिलें: सांस फूलने या दूसरी परेशानियां बढ़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

डॉ. गुलेरिया ने यह भी सलाह दी कि बाहर निकलना जरूरी हो तो धूप निकलने और मौसम गर्म होने के बाद ही निकलें।

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दिल्ली के कई इलाकों में AQI 400 के पार

गुरुवार सुबह दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही। सुबह 8:01 बजे राजधानी का औसत AQI 482 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक सात निगरानी केंद्रों पर AQI 400 से ऊपर रहा।

इनमें प्रमुख इलाके इस प्रकार रहे:

  • पंजाबी बाग: 446
  • नरेला: 434
  • रोहिणी: 431
  • आरके पुरम: 416
  • बवाना: 412
  • दिल्ली विश्वविद्यालय नॉर्थ कैंपस: 408
  • पटपड़गंज: 405

इसके अलावा ओखला फेज-2 और इंडिया गेट में AQI 399, ITO में 397, द्वारका सेक्टर-8 में 396, चांदनी चौक में 356 और वसुंधरा एन्क्लेव में 330 दर्ज किया गया। आनंद विहार में AQI 293 और IMD लोधी रोड केंद्र पर 268 रहा। इन दोनों इलाकों की हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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