आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से झटका, अब हाई कोर्ट में होगी याचिका पर सुनवाई; ED ने जेल से निकलते किया था गिरफ्तार

आजम खान को 29 अक्टूबर को जेल से रिहाई के महज 40 मिनट बाद ED ने गिरफ्तार कर लिया था। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ा। आजम खान ने ED की गिरफ्तारी के साथ 1 नवंबर को स्पेशल कोर्ट की ओर से न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश को भी चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट भेजी आजम खान की याचिका
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने गुरुवार को आजम खान की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने का फैसला सुनाया। कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि 16 नवंबर को मामला डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन के भीतर केस से जुड़े दस्तावेज हाईकोर्ट भेजने को भी कहा है।
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जेल से रिहाई के 40 मिनट बाद ED ने किया गिरफ्तार
आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी को चुनौती दी है। आरोप है कि 29 अक्टूबर को जेल से बाहर आने के महज 40 मिनट बाद ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले उन्हें दूसरे मामलों में जमानत मिल चुकी थी। आजम खान ने गिरफ्तारी के अलावा 1 नवंबर को स्पेशल कोर्ट की ओर से न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश को भी चुनौती दी है और अंतरिम राहत के तौर पर जेल से रिहाई की मांग की है।
कपिल सिब्बल ने गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई
सुनवाई के दौरान आजम खान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ED की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बाकी मामलों में जमानत मिलने के बाद आजम खान को जेल से बाहर आते ही गिरफ्तार कर लिया गया। सिब्बल ने आशंका जताई कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें जेल में रखने के इरादे से यह कार्रवाई की गई है।
2006 की घटना पर 2019 में FIR दर्ज होने का उठाया सवाल
कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा कि जिस घटना से जुड़ा मामला है, वह साल 2006 का है, जबकि इसकी FIR 2019 में दर्ज की गई थी। उन्होंने शिकायतों में बकरियों और गायों को भी अपराध से कमाई गई संपत्ति यानी अपराध की कमाई बताए जाने का मुद्दा उठाया। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि दलीलों में कुछ दम हो सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं देना चाहता।




















