यूजीसी नए नियम पर सुनवाई चार हफ्ते टली: सीजेआई बोले- नीति ऐसी हो कि सभी युवा संतुष्ट रहें

यूजीसी नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चार सप्ताह के लिए टल गई। केंद्र सरकार ने कहा कि वह इन नियमों की समीक्षा कर रही है। एक कमिटी भी बनाई जा सकती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह बात सीजेआई सूर्यकांत की बेंच को बताई। सीजेआई ने कहा कि नीति ऐसी हो, जिससे सभी युवा संतुष्ट महसूस करें।
ये है पूरा मामला
मामला 'अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ' और जुड़े मामलों का है। सुनवाई सीजेआई (CJI – Chief Justice of India) सूर्यकांत की बेंच कर रही है। यूजीसी (UGC – University Grants Commission) ने 13 जनवरी को नए नियम जारी किए। UGC के नए नियम से सवर्ण वर्ग के छात्रों में जबरदस्त नाराजगी फैल गई। मामला अदालत पहुंचा और सुनवाई अब चार हफ्ते आगे खिसक गई है।
2019 की याचिका और दो छात्रों की कहानी
याचिका 2019 में रोहित वेमुला और पायल तडवी की माताओं ने दायर की। दोनों ने कैंपस में कथित जातिगत भेदभाव का सामना किया था। बाद में उन्होंने आत्महत्या कर ली। याचिका में ऐसे भेदभाव के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग थी।
यूजीसी जातिगत भेदभाव नियम में क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने नियम बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद यूजीसी ने नए नियम लाए। इनके तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समता कमिटी बनाना अनिवार्य किया गया।
इस कमिटी में छात्र जातिगत भेदभाव की शिकायत कर सकते हैं। एससी (SC – Scheduled Caste) और एसटी (ST – Scheduled Tribe) छात्रों को यह अधिकार पहले भी था। UGC caste discrimination rules में ओबीसी (OBC – Other Backward Classes) वर्ग भी जुड़ा।
UGC नियमों पर बैठक के बाद बड़ा फैसला, मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद टली सवर्ण महापंचायत
समता कमिटी में किसे मिली जगह?
कमिटी में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधि होने चाहिए। लेकिन खबर के मुताबिक सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधि होना जरूरी नहीं है। UGC equity regulations का यही हिस्सा सामान्य वर्ग के छात्रों को खटका।
झूठी शिकायत पर कार्रवाई का प्रावधान
विवाद का दूसरा कारण झूठी शिकायत है। पहले प्रावधान था कि झूठी शिकायत करने वाले पर कार्रवाई होगी। यूजीसी जातिगत भेदभाव नियम में यह प्रावधान खत्म कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट यूजीसी नियम पर रोक क्यों?
कोर्ट ने 29 जनवरी को 2026 के नियमों पर रोक लगा दी थी। Supreme Court UGC rules आदेश की वजह थे सामान्य वर्ग से भेदभाव के आरोप। कोर्ट ने कहा था कि इस दौरान 2012 के नियम ही लागू रहेंगे। एक रिपोर्ट में कोर्ट का मानना था कि भाषा साफ नहीं है। रिपोर्ट में दुरुपयोग की आशंका का भी जिक्र है। कोर्ट ने सरकार को कमिटी बनाने का सुझाव भी दिया था।
याचिकाकर्ताओं की चिंता क्या है?
मुख्य चिंता रेगुलेशन 3(1)(c) में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को लेकर थी। इसमें एससी, एसटी और ओबीसी के साथ अनुचित व्यवहार पर ध्यान दिया गया था। UGC regulations 2026 की यही परिभाषा सबसे बड़ा सवाल बनी।
सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह ढांचा भेदभावपूर्ण है। उनके मुताबिक इससे गैर-आरक्षित छात्रों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है। कुछ अन्य याचिकाकर्ताओं ने विशेष सुरक्षा उपायों की जरूरत का समर्थन किया। सवाल सीधा है। सुरक्षा का दायरा कितना बड़ा हो?
UGC के नए नियमों के खिलाफ जुटे हजारों लोग, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन; RAF ने संभाला मोर्चा
केंद्र का भरोसा: होगी पूरी समीक्षा
सॉलिसिटर जनरल ने बेंच को बताया कि सरकार मामले की समीक्षा कर रही है। उनका कहना था कि मकसद छात्रों की चिंताओं का समाधान है।
"हम इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान हो और किसी भी वर्ग में असंतोष या चिंता न रहे।"
– तुषार मेहता, सॉलिसिटर जनरल, भारत सरकार
केंद्र ने अगस्त 2026 में भी कोर्ट को यही बताया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक समीक्षा के लिए कमिटी बनाई जा सकती है।
सीजेआई की राय: सभी युवा संतुष्ट हों
"नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे सभी युवा संतुष्ट महसूस करें।"
– सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक सीजेआई ने हर छात्र के हितों की रक्षा जरूरी बताई। नियम बनाते समय देश की युवा पीढ़ी का ध्यान रखा जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट यूजीसी नियम की याचिकाओं पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए टल गई है। अब सबकी नजर अगली तारीख पर है। क्या सरकार समीक्षा कमिटी बनाएगी? क्या यूजीसी रेगुलेशन 2026 की भाषा बदलेगी? फिलहाल जवाब अदालत और सरकार के अगले कदम में छिपे हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की नजर भी इसी पर रहेगी।




















