अमित शाह बोले- क्या प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जेल से सरकार चला सकते हैं? सत्ता का रास्ता जेल से होकर नहीं जाता

नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक को लेकर विपक्ष के विरोध को गलत ठहराया है। शाह ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल से सरकार नहीं चला सकता। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस प्रावधान का विरोध केवल इसलिए कर रहा है ताकि भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों में फंसे नेता जेल से भी पद पर बने रह सकें।
न्यूज एजेंसी ANI के इंटरव्यू में शाह ने जगदीप धनखड़ का इस्तीफा, खुद की गिरफ्तारी, संसद में विपक्ष के विरोध पर चर्चा समेत कई मुद्दों पर खुलकर बात रखी।
विधेयक पर शाह का बचाव
शाह ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान केवल विपक्ष पर लागू नहीं होगा, बल्कि एनडीए के नेताओं पर भी लागू होगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी दल का नेता 30 दिन से अधिक समय तक जेल में रहेगा और अपराध में पांच साल या उससे ज्यादा की सजा का प्रावधान होगा, तो उसे पद छोड़ना होगा। शाह ने कहा कि यह नियम न्याय और राजनीतिक नैतिकता दोनों के लिए जरूरी है।
जेल से सरकार चलाने की परंपरा पर सवाल
गृह मंत्री ने कहा कि राजनीति में अब नई परंपरा बन गई है कि जेल में रहते हुए भी मुख्यमंत्री और मंत्री पद से इस्तीफा नहीं देते। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और तमिलनाडु के कुछ मंत्रियों ने जेल में रहते हुए भी पद नहीं छोड़ा। शाह ने कहा कि पहले आरोप लगते ही नेता इस्तीफा दे देते थे और निर्दोष साबित होने के बाद ही राजनीति में लौटते थे।
धनखड़ के इस्तीफे पर बयान
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर शाह ने कहा कि इसे अनावश्यक रूप से मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि धनखड़ ने निजी स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है।
विपक्ष और संसद में सुरक्षा व्यवस्था
संसद में CISF की तैनाती पर शाह ने कहा कि विपक्ष केवल बहाने ढूंढ रहा है। उन्होंने कहा कि संसद के भीतर पहले भी गंभीर सुरक्षा घटनाएं हो चुकी हैं, इसी वजह से सख्त कदम उठाए गए हैं। शाह ने आरोप लगाया कि तीन बार चुनाव हारने के बाद विपक्ष जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
अध्यादेश और राहुल गांधी का जिक्र
शाह ने 2013 में कांग्रेस सरकार के अध्यादेश की चर्चा करते हुए कहा कि उस समय सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं पर रोक लगाई थी। कांग्रेस ने इस फैसले को पलटने के लिए अध्यादेश लाया था, लेकिन राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से उसे फाड़ दिया। शाह ने सवाल उठाया कि अगर उस समय नैतिकता थी तो अब क्यों नहीं दिखाई जा रही है।
खुद की गिरफ्तारी और इस्तीफे का जिक्र
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में अपनी गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि उन पर जैसे ही आरोप लगे और CBI का समन आया, उन्होंने तुरंत इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि उन्हें 96वें दिन बेल मिली, लेकिन तब तक उन्होंने कोई संवैधानिक पद नहीं संभाला। शाह ने कहा कि बाद में अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया और यह साबित हुआ कि मामला केवल राजनीतिक बदले की भावना से दर्ज किया गया था।





















