रायपुर SIR में बड़ी चूक,पूर्व महापौर अंबिका यदु का जेंडर बदला, महिला को रिकॉर्ड में बना दिया पुरुष,वोटर लिस्ट की जांच पर उठे सवाल

रायपुर: छत्तीसगढ़ में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बीच मतदाता रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। बीरगांव की पूर्व महापौर अंबिका यदु के मतदाता विवरण में महिला की जगह पुरुष दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि संबंधित रिकॉर्ड में नाम, उम्र और अन्य विवरण सही बताए जा रहे हैं, लेकिन जेंडर की जानकारी गलत दर्ज है। अब सवाल उठ रहा है कि घर-घर जाकर जानकारी जुटाने और डिजिटल पोर्टल पर अपलोड करने के दौरान इस गलती की पहचान क्यों नहीं हो सकी।

संबंधित खबर: SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का फैसला, 17 राज्यों की वोटर लिस्ट होगी अपडेट
रिकॉर्ड में ऐसी चूक, सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का उद्देश्य मतदाता सूची के विवरण का सत्यापन करना और पात्र मतदाताओं से जुड़ी जानकारियों को दुरुस्त करना है। लेकिन अंबिका यदु के मामले में जेंडर संबंधी गलत प्रविष्टि सामने आने से रिकॉर्ड की जांच और डेटा एंट्री की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग के पोर्टल पर अंबिका यदु का नाम, रिश्तेदार के रूप में चेतराम यदु का नाम और उम्र 60 वर्ष दर्ज है। संसदीय क्षेत्र के स्थान पर रायपुर, छत्तीसगढ़ का उल्लेख है। हालांकि, जेंडर वाले कॉलम में महिला की जगह पुरुष दर्ज होने की बात सामने आई है।

BLO की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की भूमिका अहम होती है। वे मतदाताओं से संबंधित जानकारियों के सत्यापन और सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में किसी मतदाता के जेंडर जैसी बुनियादी जानकारी में गलती सामने आने पर सत्यापन के तरीके पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इस मामले में गलती किस स्तर पर हुई, क्या यह डेटा एंट्री की त्रुटि है या सत्यापन के दौरान चूक हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि और जांच का विवरण सामने आना बाकी है। इसलिए जिम्मेदारी तय करने से पहले संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रिया की जांच जरूरी है।

SIR के डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर बहस
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और विवरणों को संशोधित करने जैसी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में डिजिटल रिकॉर्ड में सामने आने वाली गलतियां मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा कर सकती हैं। अंबिका यदु के मामले ने यह सवाल उठाया है कि ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज जानकारी को अंतिम रूप देने से पहले कितनी सावधानी बरती जा रही है। यदि सत्यापन के बाद भी इस तरह की त्रुटियां बनी रहती हैं, तो रिकॉर्ड की दोबारा जांच और सुधार की व्यवस्था को प्रभावी बनाना जरूरी होगा।

संबंधित खबर: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सोहागपुर में कांग्रेस का हल्ला, सड़क पर उतरे कार्यकर्ता
अब क्या होगा आगे?
इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि मतदाता रिकॉर्ड में जेंडर की गलत प्रविष्टि को कब और किस प्रक्रिया के तहत सुधारा जाएगा। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और गलती सामने आने के बाद सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे मतदाता रिकॉर्ड में सामने आई एक गंभीर त्रुटि के रूप में देखा जा रहा है। आधिकारिक स्पष्टीकरण और सुधार की स्थिति सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि चूक कैसे हुई और इसके लिए कौन-सी प्रक्रिया जिम्मेदार रही।




















