Jio, Airtel, Vi या BSNL... सिम के खराब नेटवर्क से पाएं छुटकारा! किसी भी कंपनी में पोर्ट करें अपना नंबर, जानें आसान तरीका

फोन पर बात करते-करते अचानक कॉल कट जाना या जरूरी काम के बीच इंटरनेट बंद हो जाना किसी को भी परेशान कर सकता है। कई बार मोबाइल कंपनी के महंगे रिचार्ज प्लान भी लोगों की जेब पर भारी पड़ते हैं। अगर आप भी ऐसी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, तो आपके लिए एक आसान विकल्प है। अब आप अपना मोबाइल नंबर बदले बिना दूसरी टेलीकॉम कंपनी की सर्विस ले सकते हैं। इसके लिए मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP) की सुविधा दी गई है। आइए जानते हैं सिम पोर्ट कराने का पूरा तरीका, कितना खर्च आएगा और किन नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।
क्या है मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (MNP)?
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी यानी MNP एक ऐसी सुविधा है, जिसके जरिए आप अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर बदले बिना दूसरी टेलीकॉम कंपनी में जा सकते हैं। मान लीजिए आप Jio का सिम इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उसके नेटवर्क या रिचार्ज प्लान से खुश नहीं हैं। ऐसे में आप उसी नंबर को Airtel, Vi या BSNL में पोर्ट करा सकते हैं। इससे आपको नया मोबाइल नंबर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आपके पुराने नंबर पर ही नई कंपनी की सर्विस शुरू हो जाएगी।
SIM पोर्ट कराने का आसान तरीका
स्टेप 1: सबसे पहले भेजें SMS
अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में जाएं और PORT लिखकर एक स्पेस दें। इसके बाद अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर लिखें। उदाहरण के लिए, PORT 9876543210 लिखकर 1900 पर SMS भेज दें।
स्टेप 2: मिलेगा यूनिक पोर्टिंग कोड
SMS भेजने के बाद आपके मोबाइल पर 1901 नंबर से एक यूनिक पोर्टिंग कोड (UPC) आएगा। यह कोड बेहद जरूरी है, क्योंकि इसके बिना आप दूसरी कंपनी में अपना नंबर पोर्ट नहीं करा पाएंगे।
स्टेप 3: नई टेलीकॉम कंपनी चुनें
अब आप जिस कंपनी का नेटवर्क इस्तेमाल करना चाहते हैं, उसके अधिकृत स्टोर या रिटेलर के पास जाएं। वहां आपको कस्टमर एक्विजिशन फॉर्म (CAF) और मोबाइल नंबर पोर्टिंग से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
स्टेप 4: KYC और जरूरी दस्तावेज
नई कंपनी के स्टोर पर अपना UPC कोड दें और पहचान सत्यापन यानी KYC की प्रक्रिया पूरी करें। अगर कंपनी पोर्टिंग फीस लेती है, तो उसका भुगतान करना होगा। इसके बाद आपकी पोर्टिंग रिक्वेस्ट जमा हो जाएगी और इसकी जानकारी SMS से मिलेगी।
स्टेप 5: पोर्टिंग रिक्वेस्ट कैंसिल भी कर सकते हैं
अगर आपने सिम पोर्ट कराने का मन बदल लिया है, तो रिक्वेस्ट जमा करने के 24 घंटे के भीतर इसे कैंसिल कर सकते हैं। इसके लिए CANCEL लिखकर स्पेस दें और अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर डालें। फिर यह मैसेज 1900 पर भेज दें। ध्यान रखें कि पोर्टिंग रिक्वेस्ट वापस लेने पर पहले जमा की गई फीस वापस नहीं मिलती।
सिम पोर्ट कराने में कितने दिन लगते हैं?
TRAI के नियमों के मुताबिक, एक ही टेलीकॉम सर्किल में मोबाइल नंबर पोर्ट होने में आमतौर पर 3 वर्किंग डे लगते हैं। अगर आप दूसरे टेलीकॉम सर्किल में नंबर पोर्ट करा रहे हैं, तो इसमें करीब 5 वर्किंग डे लग सकते हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के कुछ क्षेत्रों में इस प्रक्रिया में 15 वर्किंग डे तक का समय लग सकता है। पोर्टिंग पूरी होने की तारीख और समय की जानकारी ग्राहक को SMS के जरिए दी जाती है।
SIM पोर्ट कराने में कितना खर्च आएगा?
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के FAQ के अनुसार, नया टेलीकॉम ऑपरेटर नंबर पोर्ट कराने के लिए अधिकतम 6.46 रुपये शुल्क ले सकता है। हालांकि, यह फीस नए सिम कार्ड के रिचार्ज प्लान और दूसरी सेवाओं के खर्च से अलग हो सकती है। इसलिए सिम पोर्ट कराने से पहले नई कंपनी से कुल खर्च की जानकारी जरूर लें।
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पोर्टिंग के बाद कब चालू होगा नया SIM?
पोर्टिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुरानी कंपनी का नेटवर्क बंद हो जाएगा। इसके बाद आपको नई कंपनी का सिम फोन में लगाना होगा। जरूरी वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आपका पुराना नंबर नए नेटवर्क पर चालू हो जाएगा। पोर्टिंग के दौरान कुछ समय के लिए कॉल और इंटरनेट सेवाएं बंद रह सकती हैं।
SIM पोर्ट कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सिम पोर्ट कराने के लिए आपका नंबर सामान्य तौर पर मौजूदा ऑपरेटर के नेटवर्क पर कम से कम 90 दिन पुराना होना चाहिए। अगर आपने हाल ही में अपना सिम बदला है या सिम रिप्लेसमेंट कराया है, तो पोर्टिंग के लिए कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है। पोस्टपेड ग्राहकों को पुराने ऑपरेटर का बकाया बिल भी चुकाना जरूरी है। इसलिए कंपनी बदलने से पहले नेटवर्क कवरेज, रिचार्ज प्लान और पोर्टिंग से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर ले लें।




















