जामिया में छात्रसंघ बहाली के आंदोलन के बीच ऑनलाइन होंगी सभी कक्षाएं, अगले आदेश तक फैसला लागू

नई दिल्ली। दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगले आदेश तक सभी कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित करने का फैसला लिया है। प्रशासन ने मौजूदा परिस्थितियों और छात्रों की सुरक्षा का हवाला देते हुए इस संबंध में नोटिस जारी किया है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्र आंदोलन के दौरान कथित धक्का-मुक्की, टेंट हटाए जाने और धमकियां दिए जाने के आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। छात्र पिछले कई हफ्तों से जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) को बहाल करने और छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी छात्रों ने मुख्य प्रॉक्टर को पद से हटाने की मांग भी उठाई है। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी को लेकर विवाद के बीच विश्वविद्यालय परिसर का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है।
छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर कई हफ्तों से आंदोलन
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांग जामिया में छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराना है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ को दोबारा सक्रिय किया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं उठाने और प्रतिनिधित्व हासिल करने का मंच मिल सके। आंदोलन के दौरान छात्रों ने मुख्य प्रॉक्टर को हटाने की मांग भी रखी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। छात्रसंघ की बहाली का मुद्दा अब विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच टकराव का प्रमुख विषय बन गया है।
12 अक्टूबर से पांच छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
छात्रों के मुताबिक 12 अक्टूबर को पांच विद्यार्थियों ने छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। भूख हड़ताल पर बैठने वाले छात्रों में एबिन बेसिल, मोहम्मद जासिम खान, रेहान हैदर, रेहान पवार और फैजान अली खान शामिल हैं। छात्रों का दावा है कि भूख हड़ताल शुरू होने के बाद आंदोलन ने जोर पकड़ लिया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की एक बड़ी टीम प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत करने पहुंची। इस टीम में बड़ी संख्या में प्रोफेसर और गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल थे।
बातचीत के दौरान धक्का-मुक्की और धमकी देने के आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि प्रशासन की टीम ने शुरुआत में उन्हें आंदोलन समाप्त करने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन बाद में उन पर दबाव बनाया गया। छात्रों के मुताबिक इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई, प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए टेंट उखाड़ दिए गए और उन्हें धमकियां भी दी गईं। हालांकि ये आरोप छात्रों की ओर से लगाए गए हैं। इन घटनाओं को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट होने के लिए प्रशासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
प्रशासन ने अगले आदेश तक ऑनलाइन कक्षाओं का फैसला लिया
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मौजूदा परिस्थितियों और छात्रों की सुरक्षा का हवाला देते हुए सभी कक्षाओं को अगले आदेश तक ऑनलाइन मोड में संचालित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब परिसर में छात्रसंघ की बहाली को लेकर प्रदर्शन जारी है और नारेबाजी को लेकर भी विवाद सामने आया है। ऑनलाइन कक्षाओं का निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक संचालन पर आंदोलन के असर को भी दर्शाता है।
मार्च 2006 में भंग हुआ था जामिया का छात्रसंघ
जामिया मिल्लिया इस्लामिया का छात्रसंघ मार्च 2006 में भंग कर दिया गया था। अब करीब दो दशक बाद छात्रसंघ की बहाली और चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्र छात्रसंघ को बहाल करने के साथ मुख्य प्रॉक्टर को हटाने की मांग भी उठा रहे हैं। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने फिलहाल ऑनलाइन कक्षाओं का निर्णय लिया है। ऐसे में आंदोलन और प्रशासन के बीच आगे की बातचीत पर सबकी नजर रहेगी।




















