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Air India Flight में 4 सेकंड तक गायब हुआ कंट्रोल! तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम फेल, पायलट का कमांड भी नहीं कर रहा था काम

फुकेट से दिल्ली आ रही Air India की AI2379 फ्लाइट में कुछ सेकंड के लिए विमान का कंट्रोल सिस्टम बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच गया। शुरुआती तकनीकी जांच में तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में गड़बड़ी सामने आई है। इसके कारण एलिवेटर, एलेरॉन और स्पॉयलर प्रभावित हुए और ऑटोपायलट भी बंद हो गया।
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Air India Flight में 4 सेकंड तक गायब हुआ कंट्रोल! तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम फेल, पायलट का कमांड भी नहीं कर रहा था काम
Air India A320neo में तकनीकी गड़बड़ी

नई दिल्ली। Air India की फुकेट-दिल्ली उड़ान AI2379 में हुई तेज झटकों वाली घटना को लेकर जांच आगे बढ़ रही है। शुरुआती तकनीकी जानकारी से पता चला है कि विमान के फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम ने कुछ सेकंड के लिए सामान्य तरीके से काम नहीं किया। इस दौरान A320neo के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव से जुड़ी गड़बड़ी दर्ज हुई। विमान की नाक ऊपर उठी और ऑटोपायलट अलग हो गया। को-पायलट ने विमान को नीचे लाने के लिए साइड-स्टिक का इस्तेमाल किया, लेकिन उस वक्त कमांड का असर तुरंत नहीं हुआ। कुछ सेकंड बाद सिस्टम वापस सक्रिय हुए और पायलटों ने विमान को संभाल लिया।

जांच में सामने आई तकनीकी गड़बड़ी

फुकेट से दिल्ली आ रही Air India की AI2379 फ्लाइट में हुई घटना ने विमान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती तकनीकी जांच में सामने आया है कि उड़ान के दौरान विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में लगभग एक सेकंड के अंतर में गड़बड़ी आई। इसके बाद करीब चार सेकंड तक विमान की मुख्य कंट्रोल सतहों ने पायलट के आदेश पर सामान्य प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी दौरान विमान की नाक ऊपर उठी और ऑटोपायलट भी डिस्कनेक्ट हो गया।

पहले ग्रीन हाइड्रोलिक सिस्टम में आई गड़बड़ी

A320neo विमान में ग्रीन, ब्लू और येलो नाम के तीन हाइड्रोलिक सिस्टम होते हैं। इनका काम विमान की अलग-अलग कंट्रोल सतहों को चलाने के लिए जरूरी दबाव देना है। घटना के दौरान सबसे पहले ग्रीन सिस्टम में समस्या सामने आई। इसके कारण कुछ एलिवेटर, एलेरॉन और स्पॉयलर प्रभावित हुए। विमान ने तुरंत अपने बैकअप सिस्टम का इस्तेमाल किया लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा देर तक काम नहीं कर सकी।

अगले ही पल ब्लू और येलो सिस्टम भी हुए प्रभावित

ग्रीन सिस्टम में परेशानी के करीब एक सेकंड बाद ब्लू और येलो सिस्टम में भी दबाव से जुड़ी समस्या दर्ज हुई। इसके बाद विमान की मुख्य कंट्रोल सतहों के पास सामान्य हाइड्रोलिक पावर नहीं बची। करीब चार सेकंड तक एलिवेटर और एलेरॉन ने पायलट के इनपुट पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी। दबाव खत्म होने पर कुछ सतहें हवा के दबाव के कारण अपने आप घूमती हुई भी दिखाई दीं।

पायलट ने नाक नीचे करने की कोशिश की

इसी दौरान विमान का ऑटोपायलट डिस्कनेक्ट हो गया। कॉकपिट में स्टॉल की चेतावनी मिलने की संभावना भी जांच का हिस्सा है। ऐसी स्थिति में विमान की नाक नीचे करना जरूरी हो सकता है, ताकि पंखों को पर्याप्त हवा मिल सके। इसी वजह से को-पायलट ने साइड-स्टिक आगे किया। लेकिन उस समय कंट्रोल सतहों पर हाइड्रोलिक दबाव नहीं होने के कारण कमांड का तुरंत असर नहीं हुआ।

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कुछ सेकंड बाद वापस मिला विमान पर कंट्रोल

घटना के कुछ सेकंड बाद हाइड्रोलिक सिस्टम दोबारा सक्रिय होने लगे। सबसे पहले ब्लू सिस्टम के वापस आने के बाद अन्य सिस्टम भी सामान्य स्थिति में लौटे। इसके साथ ही विमान की कंट्रोल सतहों ने फिर से काम करना शुरू किया और पायलटों ने विमान को संभाल लिया। अचानक ऊंचाई में बदलाव के कारण यात्रियों और क्रू को तेज झटके लगे और कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।

सेंसर खराब थे या सच में दबाव घटा था?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीनों सिस्टम में दबाव की समस्या वास्तव में क्यों आई। शुरुआती तकनीकी जानकारी में प्रेशर स्विच और सेंसर से जुड़े संकेतों का उल्लेख है। इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि हाइड्रोलिक तेल का रिसाव या पंप की खराबी ही हुई हो। यह भी जांचना जरूरी है कि कहीं सेंसर, वायरिंग या प्रेशर मापने वाली व्यवस्था ने गलत संकेत तो नहीं दिए।

Airbus और AAIB कर रहे हैं आगे की जांच

Air India ने घटना से जुड़ा फ्लाइट डेटा Airbus की तकनीकी टीम को भेजा है। विमान के डिजिटल फ्लाइट रिकॉर्डर से मिले आंकड़ों का भी अध्ययन किया जा रहा है। Airbus ने हाइड्रोलिक सिस्टम, प्रेशर स्विच, प्रेशर ट्रांसड्यूसर और संबंधित वायरिंग की जांच की सलाह दी है। विमान के ऑटोमैटिक फ्लाइट सिस्टम और एयरफ्रेम की जांच भी जरूरी बताई गई है। भारत में आधिकारिक जांच Aircraft Accident Investigation Bureau यानी AAIB की निगरानी में आगे बढ़ रही है।

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पायलटों की भूमिका पर भी जांच जारी

घटना से जुड़ी तकनीकी जांच के साथ कॉकपिट में उस समय क्या हुआ, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है। पायलटों की विस्तृत रिपोर्ट से यह समझने में मदद मिलेगी कि चेतावनी कब मिली और किस क्रम में कौन-सा कमांड दिया गया। पायलटों के नशे से जुड़े आरोपों की जांच अलग पहलू है लेकिन शुरुआती तकनीकी जानकारी यह संकेत देती है कि फ्लाइट में हुई गड़बड़ी को केवल एक कारण से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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