Peoples Update Special :रिश्ते तय करने के पहले शर्तें रखने में विश्वास कर रहे जेन जी, प्रदेश के प्रमुख शहरों में छह माह में 50 से ज्यादा मामले काउंसलिंग में

पल्लवी वाघेला, भोपाल। पहले शादी सात वचनों पर टिकी हुई मानी जाती थी, लेकिन अब उसकी जगह युवा शर्तों और कॉन्ट्रैक्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह खुलासा करते हैं काउंसलर्स के पास पहुंच रहे मामले, जिनमें जेन जी के माता-पिता शादी को लेकर बच्चों की सोच और उनकी शर्तों से परेशान होकर मदद मांग रहे हैं। काउंसलर्स से बातचीत करने पर सामने आया कि इस साल जून माह तक प्रदेश के चार प्रमुख जिलों इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर क्षेत्रों में ऐसे 53 मामले काउंसलिंग के लिए पहुंचे हैं। चिंताजनक यह कि काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे ज्यादातर मामलों में युवक-युवतियों की उम्र 30 या इससे अधिक होने को है।
केस- 1 भोपाल की युवती, नोएडा में रहकर जॉब कर रही है। युवती के माता-पिता ने उसकी काउंसलिंग के लिए बात करते हुए बताया कि युवती हर लड़के से शर्त रखती है कि शादी के बाद उसके मेल और फीमेल फ्रेंड के साथ उसे लेट नाइट पार्टी, ड्रिंक और स्मोक की इजाजत दें।
केस- 2 इंदौर के मामले में लड़की ने शर्त रखी कि फेरे के पहले लड़के के हिस्से की प्रॉपर्टी के पेपर उसे हैंडओवर करने होंगे। साथ ही लड़का यह भी बताया कि उसके नाम कितने लोन है और वह अपना बैंक सिविल भी बताए।
केस- 3 सगाई के दो दिन पहले लड़का कॉन्ट्रैक्ट लेकर पहुंचा। इसमें लिखा था कि यदि तलाक की स्थिति बनती है तो पत्नी एक तय एलुमनी से ज्यादा की मांग नहीं करेगी। साथ ही उसने मंगेतर के पहले से प्रेम संबंध का ब्यौरा भी मांगा।
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लड़के रख रहे शर्तें
- यदि लड़की परिवार से अलग रहने की जिद करती है तो घर खर्च में उसकी हिस्सेदारी बढ़ जाएगी।
- यदि लड़की के किसी भी दूसरे संबंध की जानकारी मिलती है तो पति तलाक के लिए स्वतंत्र होगा और बदले में पत्नी को एलुमनी में कुछ नहीं देगा। भले ही पत्नी का अब उस युवक से कोई संबंध न हो।
- लड़की भी अपनी तनख्वाह का बराबर हिस्सा घर खर्च में देगी।
- प्रेम संबंध के बिना भी शादी न चलने की स्थिति में एलुमनी की रकम और अन्य अधिकार पहले से तय हों।
लड़कियों की शर्तें
- उसे शादी के बाद अपनी लाइफ अपने हिसाब से जीने की आजादी मिलेगी इसमें ड्रिंकिंग स्मोकिंग और पार्टी की आजादी शामिल है।
- सिक्योरिटी के तौर पर संपत्ति का कुछ हिस्सा शादी होते ही पत्नी को सौंपा जाए।
- शादी के पहले युवक अपनी सैलरी स्लिप और लोन आदि की जानकारी दे और शादी के बाद उसकी तनख्वाह में पत्नी की हिस्सेदारी पहले से तय हो।
- दोनों पक्षों के माता-पिता के प्रति जिम्मेदारी भी लिखित रूप में दी जाए।
अभिभावकों को रखना होगा ध्यान
काउंसलर सरिता राजानी का कहना है कि जो मामले सामने आ रहे हैं, वह चिंताजनक है। अभिभावकों को डर है कि बेटियों का यह रूप समाज के सामने आया तो क्या होगा? साथ ही उन्हें शादी ना करने वाली बेटियों के भविष्य की भी चिंता है। वहीं, बेटे के मन में शादी के लिए डर और उनकी शर्तें भी अभिभावकों को परेशान कर रही हैं। हम काउंसलिंग में अभिभावकों को सलाह दे रहे हैं कि बच्चों से संबंधित बातें छिपाकर शादी न करें। साथ ही अभिभावकों की यह भी जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को विशेष रूप से बेटियों को पढ़ाई-लिखाए, कॅरियर बनाने की आजादी भी दें, लेकिन उनकी लाइफस्टाइल की जानकारी भी रखें और बच्चों के सामने शादी के सकारात्मक उदाहरण भी रखें।
यह है स्थिति
इंदौर – 23
भोपाल – 18
जबलपुर – 7
ग्वालियर - 5











