Peoples Update Special :2036 तक चार गुना बढ़ेगी मध्यप्रदेश की बिजली जरूरत, MPERC ने 10 साल के मेगा रोडमैप को दी मंजूरी

संतोष चौधरी, भोपाल। मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए राज्य सरकार और मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने अगले एक दशक के लिए व्यापक ऊर्जा रणनीति तैयार की है। उद्देश्य साफ है कि भविष्य में राज्य के किसी भी हिस्से में बिजली संकट न हो और उद्योगों से लेकर किसानों तथा आम उपभोक्ताओं तक सभी को 24 घंटे निर्बाध और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराई जा सके। इसी दिशा में MPERC ने वर्ष 2025-26 से 2036-37 तक के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा तैयार 'रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान' को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत मध्यप्रदेश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 88,206 मेगावॉट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में प्रदेश की अधिकतम बिजली मांग करीब 23,800 मेगावॉट है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नई उत्पादन परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी और निजी कंपनियों के साथ दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते (PPA) भी किए जाएंगे।
हर साल 5.7% की दर से बढ़ेगी बिजली की मांग
योजना के अनुसार आने वाले वर्षों में प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ेगी। अनुमान है कि 2036-37 तक पीक डिमांड 36,418 मेगावॉट तक पहुंच जाएगी। यानी जिस समय बिजली की सबसे अधिक जरूरत होगी, उस समय भी पर्याप्त उत्पादन और सप्लाई सुनिश्चित करने की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। आयोग के मुताबिक प्रदेश में बिजली की मांग औसतन 5.7 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ेगी।
कोयले पर निर्भरता घटेगी, सौर ऊर्जा बनेगी सबसे बड़ा आधार
ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव बिजली उत्पादन के स्रोतों में देखने को मिलेगा। वर्तमान में प्रदेश की लगभग 53 प्रतिशत बिजली कोयला आधारित संयंत्रों से आती है लेकिन अगले दस वर्षों में इसका हिस्सा घटकर करीब 26 प्रतिशत रह जाएगा। इसके विपरीत सौर ऊर्जा राज्य की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक तकनीक बन जाएगी। योजना के तहत वर्ष 2036-37 तक 38,787 मेगावॉट क्षमता सौर ऊर्जा से विकसित की जाएगी।
रात में भी नहीं रुकेगी बिजली, लगेंगे विशाल बैटरी स्टोरेज प्लांट
सौर ऊर्जा की सबसे बड़ी चुनौती रात के समय बिजली उपलब्ध कराना होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने 11,525 मेगावॉट क्षमता के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और पंप स्टोरेज परियोजनाओं की योजना बनाई है।इन परियोजनाओं के जरिए दिन में तैयार अतिरिक्त बिजली को स्टोर किया जाएगा और रात या बादल वाले दिनों में जरूरत के अनुसार उपयोग किया जाएगा। इससे 24 घंटे बिजली आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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2036-37 तक बिजली उत्पादन का स्वरूप
वर्ष 2036-37 तक विभिन्न स्रोतों से प्रस्तावित बिजली उत्पादन क्षमता इस प्रकार होगी-
- सौर ऊर्जा: 38,787 मेगावॉट
- कोयला आधारित उत्पादन: 22,477 मेगावॉट
- बैटरी एवं पंप स्टोरेज: 11,525 मेगावॉट
- पवन ऊर्जा: 8,679 मेगावॉट
- जल विद्युत: 3,861 मेगावॉट
आम उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा
इस ऊर्जा रोडमैप का सीधा लाभ प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं को मिलेगा। घरों, उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सकेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के चार्जिंग स्टेशन, कृषि क्षेत्र में सोलर पंप और लिफ्ट सिंचाई योजनाओं को पर्याप्त बिजली उपलब्ध होगी। सौर ऊर्जा की लागत कम होने से भविष्य में बिजली दरों पर दबाव कम रहेगा, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। कम मांग वाले महीनों में अतिरिक्त बिजली उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब सहित अन्य राज्यों को बेचकर मध्यप्रदेश अतिरिक्त राजस्व भी अर्जित कर सकेगा।
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ऊर्जा विशेषज्ञ ने जवाबदेही पर भी उठाए सवाल
विद्युत मामलों के जानकार निर्मल लोहिया का कहना है कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए दस वर्षीय ऊर्जा मास्टर प्लान तैयार करना और उसे MPERC से मंजूरी मिलना महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इससे बिजली उत्पादन लगभग चार गुना तक बढ़ाने का रास्ता साफ होगा और भविष्य में उपभोक्ताओं को विश्वसनीय, निर्बाध तथा पर्यावरण-अनुकूल बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बिजली वितरण कंपनियों की कार्यकुशलता और जवाबदेही तय करना भी जरूरी है। उनके अनुसार बिजली कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ रहा है, जिसकी भरपाई हर साल उपभोक्ताओं पर की जाती है। इसलिए उत्पादन बढ़ाने के साथ वितरण व्यवस्था में सुधार और वित्तीय अनुशासन भी उतना ही आवश्यक है।












