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MP:आदिवासी समुदाय के लिए डिजिटल सशक्तिकरण, सीएम मोहन यादव ने लॉन्च किया शालिनी ऐप, जाने इसके लाभ

शालिनी ऐप के माध्यम से अब आदिवासी समुदाय सरकारी योजनाओं से जुड़ी आवेदन प्रक्रिया को आसानी से जान सकता है और अपने आवेदन की स्थिति भी देख सकता है। इसके साथ ही इस ऐप की मदद से आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों की सटीक लोकेशन की जानकारी भी सरलता से प्राप्त की जा सकती है।
आदिवासी समुदाय के लिए डिजिटल सशक्तिकरण, सीएम मोहन यादव ने लॉन्च किया शालिनी ऐप, जाने इसके लाभ
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मध्य प्रदेश सरकार ने आदिवासी लोगों के लिए एक नया ऐप शालिनी लॉन्च किया है। इसे खास तौर पर आदिवासी समुदाय के लिए बनाया गया है। इस ऐप से आदिवासियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी आसानी से मिलेगी और उनकी संस्कृति व इतिहास से जुड़ाव भी बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस समारोह में इस ऐप का शुभारंभ किया था। 

    शालिनी एप का शुभारंभ

    भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। इस मौके पर जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में ‘शालिनी एप’ लॉन्च किया गया। यह एप आदिवासी समुदाय को सरकारी योजनाओं और सेवाओं की जानकारी आसानी से हिंदी में पढ़ने और सुनने की सुविधा देगा। एप में चैटबॉट और कॉल की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे किसी भी प्रकार की जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकती है।

    सरकारी योजना 

    शालिनी एप के माध्यम से आदिवासी समुदाय सरकारी योजनाओं के बारे में आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन की स्थिति आसानी से जान सकता है। इसके साथ ही आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों की सटीक लोकेशन की जानकारी भी उपलब्ध होगी। एप में छात्रों और छात्राओं के लिए जनजातीय नायकों की प्रेरक कहानियों का खजाना भी है, जो उन्हें अपने इतिहास और संस्कृति से जोड़ता है और उन्हें अपने क्षेत्र के प्रति गर्व महसूस कराता है।

    छात्रावासों के नाम में गौरवमय बदलाव

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की कि जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित सभी कन्या छात्रावास और आश्रमों का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखा जाएगा। वहीं, बालक छात्रावासों को अब महाराजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के नाम पर संचालित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि 2026 तक 5 हजार छात्रावास अधीक्षकों की भर्ती की जाएगी, ताकि छात्रावासों का संचालन और बेहतर हो सके और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं रहन-सहन की सुविधाएँ मिलें।

    शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका में विकास

    शालिनी एप केवल योजनाओं की जानकारी तक ही सीमित नहीं है। यह आदिवासी समुदाय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराएगा। इसके तहत 662 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लाभ सीधे आदिवासी क्षेत्रों में पहुंचेगा। एप के माध्यम से उनकी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संरक्षित और प्रचारित करने का भी प्रयास किया जाएगा।

    सरकार का उद्देश्य

    सरकार का लक्ष्य है कि शालिनी एप के जरिए आदिवासी समुदाय को सशक्त, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाया जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर योजनाओं की जानकारी और प्रेरक कहानियों के माध्यम से युवा पीढ़ी में उत्साह, पहचान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी। इस एप के जरिए आदिवासियों तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच तेज और प्रभावशाली होगी।

    Aditi Rawat
    By Aditi Rawat

    अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

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