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MP:प्रकृति के करीब, ग्रीन टूरिज्म की ओर कदम, क्यों होमस्टे बन गए पर्यटकों की पहली पसंद

मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में प्रदेश भर में 241 नए होमस्टे लॉन्च किए हैं। इसके चलते प्रदेश के 37 जिलों के 100 से अधिक गांव तेजी से एमपी टूरिज्म मैप पर उभरने लगे हैं। ये होमस्टे न सिर्फ पर्यटकों को प्रकृति और संस्कृति के करीब लाते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण पर्यटन को भी मजबूती दे रहे हैं।
प्रकृति के करीब, ग्रीन टूरिज्म की ओर कदम, क्यों होमस्टे बन गए पर्यटकों की पहली पसंद
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    देश के दिल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश को अपनी प्राकृतिक सुंदरता, वाइल्डलाइफ और खासतौर पर धार्मिक पर्यटन के लिए एक नई पहचान मिल रही है। यह पहचान है इको-फ्रेंडली टूरिज्म के तेजी से उभरते ट्रेंड में आए होमस्टे की। होमस्टे टूरिज्म एक ऐसा नया मॉडल है, जिसने पारंपरिक लग्जरी होटल्स की मांग को भी प्रभावित किया है।

    आज के समय में युवाओं से लेकर फैमिली तक, सभी को ग्रामीण अंचल और पारंपरिक परिवेश का अनुभव बेहद पसंद आ रहा है। इसी वजह से मध्य प्रदेश में वाइल्डलाइफ, धार्मिक स्थल और अन्य पर्यटन क्षेत्रों में पर्यटक अब होमस्टे में रुचि दिखा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप पर्यटक सिर्फ घूमने नहीं आते, बल्कि इन जगहों पर दो-चार दिन अतिरिक्त रहकर अनुभव का पूरा आनंद लेते हैं।

    होमस्टे को बढ़ावा

    मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में प्रदेश भर में 241 नए होमस्टे लॉन्च किए हैं, जिसके चलते प्रदेश के 37 जिलों के 100 से अधिक गांव एमपी टूरिज्म मैप पर तेजी से उभर रहे हैं। चाहे यह ओरछा के शांत घाट हों, अमरकंटक की धुंधली सुबह, पचमढ़ी की पहाड़ियां या कान्हा, पेंच, पन्ना, बांधवगढ़ के जंगल, हर जगह अब होमस्टे उपलब्ध हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2025-26 तक प्रदेश में 1000 से अधिक होमस्टे तैयार हो जाएं। इनमें से कई को हेलिकॉप्टर और डिजिटल बुकिंग से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है।

    ग्रामीणों का योगदान

    कई ग्रामीणों ने अपने ही घरों में छोटे लेकिन खूबसूरत ठहराव तैयार कर लिए हैं। यहां न तो रिसेप्शन की औपचारिकता है और न ही होटल जैसी दूरी। हर मेहमान का स्वागत ‘अतिथि देवो भवः’ के भाव के साथ किया जाता है, जिससे पर्यटक को घर जैसी गर्माहट और अपनापन महसूस होता है।

    क्यों भा रहे हैं होमस्टे

    होमस्टे पर्यटन के पांच मुख्य कारण हैं। शांति की तलाश में आए पर्यटक यहां होटल जैसी सुविधाओं के साथ घर जैसी गर्माहट पाते हैं। देसी व्यंजन, लोकगीत और मिट्टी एवं भूसे से बने घर उन्हें खास अनुभव देते हैं। कम खर्च में ज्यादा अनुभव भी इन होमस्टे की खूबी है। जहां होटल में 5-7 हजार रुपये खर्च होते हैं, वहीं होमस्टे में 1500-2500 रुपये में वैसी ही सुविधाएं मिलती हैं, साथ ही लोकल टूर और होस्ट की गाइडेंस बोनस के रूप में मिलती है।

    इको फ्रेंडली टूरिज्म

    इन होमस्टे से प्रदेश की लोकल इकॉनमी को भी सीधे लाभ मिल रहा है। जो पैसा पर्यटक होमस्टे में खर्च करता है, वह सीधे होस्ट और उसके परिवार तक पहुंचता है। एमपी टूरिज्म बोर्ड ने होमस्टे को ‘Responsible Tourism Mission’ से जोड़ा है। प्लास्टिक कम और स्थानीय संसाधनों का अधिक उपयोग कर, ये होमस्टे पर्यटक की इको-फ्रेंडली यात्रा का जरिया बन रहे हैं।

    ऑनलाइन बुकिंग आसान

    अगर आप भी कुछ दिन सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो आप MP Tourism Homestay Scheme की आधिकारिक वेबसाइट https://mphomestay.mponline.gov.in

    पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। यहां जिले के हिसाब से होमस्टे की लिस्ट उपलब्ध है, जिसमें होमस्टे का नाम, दाम, सुविधाएं, होस्ट की प्रोफाइल और मोबाइल नंबर दी गई है। आप चाहें तो फोन या वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से बुकिंग कर सकते हैं।

    Aditi Rawat
    By Aditi Rawat

    अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

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