
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने को राज्यसभा सभापति ने मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राज्यसभा में बीजेपी की ताकत और बढ़ गई है। पहले बीजेपी के 106 सांसद थे, जो अब बढ़कर 113 हो गए हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसदों की संख्या 10 से घटकर सिर्फ 3 रह गई है। इस बदलाव को राजनीति की भाषा में बड़ा पावर शिफ्ट माना जा रहा है।
राघव चड्ढा ने कुछ दिन पहले ही ऐलान किया था कि वह आम आदमी पार्टी छोड़ रहे हैं। उनके साथ छह अन्य राज्यसभा सांसद भी पार्टी से अलग होकर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों और विचारधारा से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेतृत्व में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है।
राघव चड्ढा के साथ जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी, उनमें अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर सांसद पंजाब से आते हैं। केवल स्वाति मालीवाल दिल्ली से राज्यसभा सदस्य हैं।

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बीजेपी ने इन नेताओं का खुले दिल से स्वागत किया। पार्टी अध्यक्ष नीतिन नवीन ने सभी सांसदों को मिठाई खिलाकर पार्टी में शामिल कराया। यह बीजेपी के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है। इससे पार्टी को राज्यसभा में मजबूती मिली है और भविष्य में कानून पास कराने में भी सहूलियत हो सकती है।
राघव चड्ढा ने राज्यसभा में कहा कि संविधान के अनुसार, अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं, तो इसे मान्यता मिल सकती है। AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने पार्टी छोड़ी, जो इस नियम के तहत आता है। इसी वजह से सभापति ने इस विलय को स्वीकार कर लिया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पंजाब में विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। AAP कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इन नेताओं के खिलाफ नाराजगी जताई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह जनता के विश्वास के साथ धोखा है। उन्होंने इसे विश्वासघात बताया और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।