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MP OBC Reservation:27% आरक्षण पर हाईकोर्ट की सख्ती, 2 अप्रैल तक जवाब; 16 से फाइनल सुनवाई

27% ओबीसी आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में अब बड़ा अपडेट सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने इस बहुचर्चित मामले में सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को 2 अप्रैल तक अपने-अपने जवाब और संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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27% आरक्षण पर हाईकोर्ट की सख्ती, 2 अप्रैल तक जवाब; 16 से फाइनल सुनवाई
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में अब बड़ा अपडेट सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने इस बहुचर्चित मामले में सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को 2 अप्रैल तक अपने-अपने जवाब और संबंधित दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं।

    2 अप्रैल तक दस्तावेज जमा करने का आदेश, 16 से अंतिम सुनवाई

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अब देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी पक्षों को तय समय सीमा यानी 2 अप्रैल तक अपने तर्क और जरूरी दस्तावेज कोर्ट में जमा करने होंगे, ताकि आगे की सुनवाई बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि सभी पक्षों की दलीलें और दस्तावेज मिलने के बाद 16 अप्रैल से इस मामले की अंतिम सुनवाई (फाइनल हियरिंग) शुरू की जाएगी। यह सुनवाई नियमित रूप से चलेगी जिससे मामले का जल्द समाधान निकल सके।

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    सुप्रीम कोर्ट के बाद फिर हाईकोर्ट में लौटा मामला

    इस केस में बड़ा मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने 21 फरवरी 2026 को आदेश देते हुए ओबीसी आरक्षण से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं को वापस हाईकोर्ट भेज दिया। इसके बाद एक बार फिर इस मामले की सुनवाई का केंद्र मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बन गया है।

    करीब 17 महीने बाद फिर शुरू हुई सुनवाई

    इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर लगभग 17 महीने बाद हाईकोर्ट में दोबारा बहस शुरू हुई है। इससे पहले सितंबर 2024 में इस मामले से जुड़ी करीब 10 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दी गई थीं।

    लंबे समय से लंबित, अब तेजी से होगी सुनवाई

    सामान्य वर्ग के याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील आदित्य संघी ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि यह मामला पिछले छह साल से लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद यह मामला लंबे समय तक केवल लिस्टिंग में ही अटका रहा। इस पर कोर्ट ने सहमति जताते हुए कहा कि अब समय बर्बाद नहीं किया जाएगा और तय समय सीमा के भीतर सुनवाई पूरी की जाएगी।

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    बार-बार हस्तक्षेप से देरी पर भी उठे सवाल

    सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि बार-बार इंटरवेंशन एप्लिकेशन (हस्तक्षेप आवेदन) दायर कर मामले को टालने की कोशिश की गई, जिससे सुनवाई में लगातार देरी होती रही। कोर्ट कहा कि अब इस तरह की देरी को रोकते हुए सीधे सुनवाई पर फोकस किया जाएगा।

    Sumit  Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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