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मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के बंटवारे पर हाईकोर्ट सख्त, 4 हफ्ते में सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विभाजन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में जबलपुर और उज्जैन के बीच संसाधनों, कॉलेजों, जिलों और छात्रों के असमान बंटवारे का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के बंटवारे पर हाईकोर्ट सख्त, 4 हफ्ते में सरकार से मांगा जवाब

पीपुल्स संवाददाता, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विभाजन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। यूनिवर्सिटी के विभाजन के बाद उज्जैन में नई यूनिवर्सिटी खोली जा रही है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की डिवीजन बेंच ने मामले में अनावेदकों को चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

2011 के एक्ट में संशोधन को दी चुनौती

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपाण्डे और रजत भार्गव की ओर से यह याचिका दायर की गई है। याचिका में मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2011 में किए गए संशोधन और नए ‘मध्य प्रदेश धन्वंतरि विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026’ की वैधता को चुनौती दी गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी के विभाजन से जबलपुर शहर के अधिकारों और गरिमा को नुकसान पहुंचा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि विभाजन के बाद संसाधनों और क्षेत्राधिकार का समान और उचित बंटवारा नहीं किया गया, जिससे जबलपुर के साथ भेदभाव हुआ है।

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आंकड़ों में सामने आया अंतर

याचिका में यूनिवर्सिटी के विभाजन के बाद दोनों संस्थानों के बीच क्षेत्राधिकार और छात्रों की संख्या में अंतर का भी उल्लेख किया गया है।

उज्जैन यूनिवर्सिटी: 6 संभाग, 31 जिले, करीब 80 में से 64 कॉलेज और लगभग 14 हजार छात्र

जबलपुर यूनिवर्सिटी: 4 संभाग, 24 जिले, सिर्फ 16 कॉलेज और करीब 2 हजार छात्र

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि आंकड़े दोनों यूनिवर्सिटी के बीच असमान वितरण को दिखाते हैं।

मेडिकल एजुकेशन सिस्टम पर असर का दावा

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने डिवीजन बेंच के सामने दलील दी कि इस तरह का असमान वितरण संविधान में दिए गए समानता के अधिकार के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी के विभाजन का असर सिर्फ संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेशभर के मेडिकल छात्रों, संबद्ध कॉलेजों, शिक्षकों और शोध गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। अब हाईकोर्ट के नोटिस के बाद संबंधित पक्षों के जवाब पर अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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