भोपाल में शिक्षक भर्ती विरोध प्रदर्शन, 26वें दिन नीलम पार्क से DPI तक निकाली रैली; पद बढ़ाने की मांग

भोपाल। रैली में पांच दिनों से निर्जला उपवास पर बैठे अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत को ठेले पर बैठाकर शामिल किया गया। उन्होंने हाथों में महात्मा गांधी और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र लेकर विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने वर्ग-2 में प्रत्येक विषय में कम से कम 3 हजार या पूरे वर्ग-2 में न्यूनतम 10 हजार पद बढ़ाने की मांग की है। वहीं वर्ग-3 में पदों की संख्या बढ़ाकर न्यूनतम 25 हजार करने और दोनों वर्गों में जल्द द्वितीय काउंसलिंग शुरू करने की मांग की जा रही है।
ठेले पर रैली में शामिल हुए निर्जला उपवास कर रहे नरेंद्र
नरेंद्र राजपूत पिछले पांच दिनों से निर्जला भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अन्न और जल का त्याग करने के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने की बात आंदोलनकारियों ने कही। रैली के दौरान नरेंद्र को ठेले पर बैठाकर DPI कार्यालय तक ले जाया गया। उन्होंने हाथों में महात्मा गांधी और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र लेकर विरोध दर्ज कराया।
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महिला अभ्यर्थी के चक्कर खाकर गिरने की भी जानकारी
रैली के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी मौजूद रहे। इसी बीच एक महिला अभ्यर्थी के अचानक चक्कर खाकर गिरने की जानकारी भी सामने आई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि पद वृद्धि और द्वितीय काउंसलिंग की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
वर्ग-2 में 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती वर्ग-2 में प्रत्येक विषय में कम से कम 3 हजार पद और पूरे वर्ग-2 में न्यूनतम 10 हजार पदों की तत्काल वृद्धि की मांग कर रहे हैं। वहीं प्राथमिक शिक्षक भर्ती वर्ग-3 में पदों की संख्या बढ़ाकर न्यूनतम 25 हजार करने की मांग है। इसके साथ ही दोनों वर्गों में द्वितीय काउंसलिंग प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग भी की जा रही है।
अधिकारियों पर शिक्षा मंत्री के निर्देश नहीं मानने का आरोप
नरेंद्र राजपूत का कहना है कि सिस्टम के दोहरे मापदंड के कारण उन्हें एक ही आंदोलन में दूसरी बार निर्जला उपवास करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारी शिक्षा मंत्री के निर्देशों पर भी अमल नहीं कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकीय पद रिक्त होने के बावजूद भर्ती में अपेक्षाकृत कम पद रखे गए हैं।
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1.15 लाख से ज्यादा शिक्षक पद रिक्त होने का दावा
अभ्यर्थियों ने विधानसभा में दिए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि प्रदेश में 2,89,005 स्वीकृत शिक्षक पदों में से 1,74,419 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि करीब 1,15,678 पद रिक्त हैं। उनका कहना है कि प्रदेश के 83,514 विद्यालयों में 1,968 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है, जबकि 46,417 विद्यालयों में मात्र दो शिक्षक कार्यरत हैं। अभ्यर्थियों का तर्क है कि रिक्तियों के अनुरूप पद बढ़ाकर भर्ती की जाए तो युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है।




















