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Stock Market Crash:10 मिनट में निवेशकों के ₹12 लाख करोड़ डूबे, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों में निवेशकों की करीब ₹12.39 लाख करोड़ की संपत्ति घट गई।
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10 मिनट में निवेशकों के ₹12 लाख करोड़ डूबे, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों में निवेशकों की करीब ₹12.39 लाख करोड़ की संपत्ति घट गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख इंडेक्स करीब 3% तक गिर गए।

    सेंसेक्स 2400 अंक टूटा, निफ्टी 700 अंक फिसला

    कारोबार की शुरुआत होते ही BSE Sensex करीब 2400 अंक गिरकर 76,400 के आसपास पहुंच गया। वहीं Nifty 50 भी 700 अंकों से ज्यादा टूटकर करीब 23,750 के स्तर तक आ गया। इस तेज गिरावट से BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर करीब ₹437 लाख करोड़ रह गया।

    लगभग सभी सेक्टर में बिकवाली

    सोमवार को बाजार में लगभग हर सेक्टर में दबाव देखा गया। InterGlobe Aviation (IndiGo) का शेयर करीब 8% तक गिरा। वहीं Tata Steel, Larsen & Toubro, SBI और Maruti Suzuki जैसे बड़े शेयरों में भी करीब 5% तक गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में Nifty PSU Bank सबसे ज्यादा प्रभावित रहा और इसमें 5% से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा Nifty Auto, Nifty Realty और Nifty Private Bank इंडेक्स भी 3-4% तक टूट गए।

    कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार

    बाजार में गिरावट का बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में WTI क्रूड करीब 118 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड भी लगभग 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार है जब तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंची हैं।

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    मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ी वैश्विक चिंता

    विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 20% हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है, इसलिए यहां संकट बढ़ने से वैश्विक बाजारों पर सीधा असर पड़ रहा है।

    रुपए में बढ़ी कमजोरी, बॉन्ड यील्ड बढ़ी

    तेल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर करीब 92 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं अमेरिका में 10-year ट्रेजरी यील्ड लगभग 4.20% तक बढ़ गई है, जिससे निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।

    Sumit Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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