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ईरानी हमलों के खिलाफ दुनिया एकजुट,होर्मुज में सुरक्षित रास्ते के लिए 6 देशों ने मिलाया हाथ

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के हमलों से ग्लोबल एनर्जी आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालात को संभालने के लिए ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने मिलकर जहाजों की सुरक्षा और बाजार स्थिरता के लिए संयुक्त कदम उठाने का फैसला किया है, साथ ही ईरान से हमले रोकने की अपील की है।
होर्मुज में सुरक्षित रास्ते के लिए 6 देशों ने मिलाया हाथ
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव अब अंतरराष्ट्रीय चिंता का बड़ा कारण बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। हाल ही में ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों और खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद हालात काफी गंभीर हो गए हैं। इसका असर अब पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर साफ दिखने लगा है।

    इसी स्थिति को देखते हुए यूरोप और एशिया के छह बड़े देशों ने मिलकर एक अहम कदम उठाया है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि वे होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। इसमें सैन्य और कूटनीतिक सहयोग दोनों शामिल होंगे, ताकि इस रास्ते को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके।

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    होर्मुज क्यों है इतना अहम?

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) अलग-अलग देशों तक पहुंचाई जाती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। पिछले कुछ दिनों में ईरान ने इस क्षेत्र में कई हमले किए हैं। ड्रोन और विस्फोटक नौकाओं के जरिए व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, जिससे जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैकड़ों जहाज इस इलाके के बाहर फंसे हुए हैं। इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ा है, जहां ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है।

    ऊर्जा ठिकानों पर हमले से बढ़ी चिंता

    स्थिति तब और बिगड़ गई जब कतर और सऊदी अरब के तेल और गैस संयंत्रों को निशाना बनाया गया। इन हमलों से उत्पादन पर असर पड़ा है। कतर की ऊर्जा कंपनी के अनुसार, उनकी करीब 17 प्रतिशत एलएनजी निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है। इससे हर साल अरबों डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। इन घटनाओं के बाद ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

    6 देशों की संयुक्त पहल

    इस संकट से निपटने के लिए छह देशों ने एकजुट होकर रणनीति बनाई है। इन देशों का कहना है कि वे मिलकर जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने की कोशिश करेंगे। साथ ही, उन्होंने ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए भी कदम उठाने की बात कही है। इसके तहत वे अन्य तेल उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने पर जोर देंगे, ताकि सप्लाई में कमी न आए और कीमतें नियंत्रण में रहें।

    ईरान से शांति की अपील

    इन देशों ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है और उसे तुरंत रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अस्थिरता पैदा करती हैं। बयान में यह भी कहा गया है कि नागरिक ढांचे और ऊर्जा सुविधाओं पर हमले पूरी तरह बंद होने चाहिए। साथ ही समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की बाधा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है।

    वैश्विक असर की आशंका

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। खासकर वे देश जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, उन्हें ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। तेल और गैस की सप्लाई में बाधा आने से कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर देखने को मिलेगा।

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    फिलहाल दुनिया की नजरें होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हुई हैं। 6 देशों की यह संयुक्त पहल हालात को संभालने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अगर यह प्रयास सफल होते हैं, तो जल्द ही जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सकती है और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि, स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या तनाव कम होता है या यह संकट और गहराता है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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