Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

High Court News : बाद में पैसा जमा कर देने से अपराध खत्म नहीं हो सकता

मप्र हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पैसा जमा नहीं करने के मामले में एक सिक्योरिटी कंपनी के मालिक की 34 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कंपनी मालिक पर मुकदमा चलेगा।
बाद में पैसा जमा कर देने से अपराध खत्म नहीं हो सकता
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। भोपाल की एक सिक्योरिटी कंपनी के मालिक की उन 34 याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत में चल रहे मुकदमों को चुनौती दी गई थी। आवेदक का दावा था कि उसने 1.76 करोड़ रुपए की राशि जमा कर दी है, इसलिए उसके खिलाफ चल रहा मुकदमा खारिज किया जाए। जस्टिस बीपी शर्मा की अदालत ने इस दावे को ठुकराते हुए कहा कि बाद में पैसा जमा करने पर केस खत्म किए जाते हैं तो मालिक जानबूझकर कर्मचारियों का पैसा रोकना शुरू कर देंगे। 

    याचिकाकर्ता के खिलाफ चलेगा केस

    बेंच ने यह भी कहा कि बाद में पैसा जमा कर देने भर से अपराध खत्म नहीं हो जाता। चूंकि याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध दिखाई  दे रहा, इसलिए उसके खिलाफ मुकदमा चलेगा। 

    पीएफ ऑफिस ने दायर किया था परिवाद

    कोर्ट ने यह फैसला भोपाल के एमपी नगर में स्थित मे. एमपी सिक्योरिटी फोर्स के मालिक एलएल सोनी की याचिका पर दिया। आवेदक के खिलाफ रीजनल प्रोविडेंट फण्ड कमिश्नर कार्यालय के एन्फोर्समेंट ऑफिसर ने निचली अदालत में एक परिवाद दाखिल किया था। परिवाद में आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता कंपनी ने अपने कर्मचारियों के वेतन से वर्ष 2008 से 2012 के बीच पीएफ की राशि तो काटी तो, लेकिन वह जमा नहीं कराई गई। आवेदक की ओर से दावा किया गया कि विवादित 1.76 करोड़ रूपए की राशि उसने जमा कर दी है, ऐसे में उसके खिलाफ चल रहे मुकदमे को खारिज किया जाए। 

    समय पर पैसा जमा नहीं किया

    इन दलीलों का विरोध करते हुए एन्फोर्समेंट ऑफिसर की ओर से अधिवक्ता अभिषेक अरजरिया व राहुल चौरसिया ने अदालत को बताया कि कुछ मामलों में गवाही शुरू हो चुकी है और कुछ अंतिम चरण में हैं। कुछ मामलों में ट्रायल पूरा हो चुका है और अदालत ने सजा भी सुनाई है। पूरे मामले पर गौर करके अदालत ने अपने फैसले में कहा कि समय पर याचिकाकर्ता ने पैसा जमा नहीं किया। यह अपने आप में एक अपराध है। ऐसे में याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी जा सकती। इस मत के साथ अदालत ने सभी 34 याचिकाएं खारिज कर दीं। हालांकि अदालत ने ट्रायल कोर्ट को कहा है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ चल रहे मुकदमे की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए। 

    जमीन हड़पने की साजिश नाकाम, खरीदार की हुई जीत

    जबलपुर की 2 एकड़ जमीन को लेकर 30 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार खरीदार के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिन्दल और जस्टिस विजय विश्नोई की डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इंकार करके रश्मि अवस्थी की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।

    जबलपुर के रेंगवा की जमीन का मामला

    यह मामला जबलपुर के रेंगवा में स्थित 2 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसे बेचने का सौदा दीक्षितपुरा में रहने वाले योगेश कुमार अवस्थी ने वर्ष 1995 में सुभाष चंद्र केशरवानी से किया था। इस सौदे से मुकरने पर विवाद शुरु हुआ। मामला निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गया, जहां हर अदालत ने सुभाष चंद्र केशरवानी के पक्ष में फैसला सुनाया।

    गुपचुप तरीके से बेच दी जमीन

    इसके बाद जब जमीन पर कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरु हुई, तभी योगेश कुमार अवस्थी की बेटी रश्मि अवस्थी ने अपनी मां गीता और भाई राजेश के साथ मिलकर विवादित जमीन हड़पने की नीयत से उसके तीन हिस्से मे. बालाजी गोल्डन टाउन, शकुन राय और शाहिदा नाज को गुपचुप तरीके से बेच दिए। मामला फिर से कोर्ट में पहुंचा। हाईकोर्ट के जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की अदालत ने 12 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि इस जमीन को बेचने का हक रश्मि अवस्थी को नहीं था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ रश्मि अवस्थी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति दाखिल की गई थी, जो प्रारंभिक सुनवाई में ही खारिज कर दी। सुको में सुनवाई के दौरान सुभाष चंद्र केशरवानी की ओर से अधिवक्ता नीलम सिंह ने पैरवी की। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

    Latest Posts