लेफ्ट नो वेयर लेफ्ट:50 साल बाद देश में कहीं नहीं बची लेफ्ट की सरकार, साल 2016 में केरल में बनी थी वामपंथी सरकार

एक बड़े राजनीतिक बदलाव के बीच देश में केरल में बची एकमात्र वामपंथी सरकार भी सत्ता से बाहर हो गई है। पिछले 50 साल में यह पहली बार हुआ है जब वामपंथी भारत के किसी राज्य में सत्ता में नहीं हैं।
50 साल बाद देश में कहीं नहीं बची लेफ्ट की सरकार, साल 2016 में केरल में बनी थी वामपंथी सरकार

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में लेफ्ट ब्लॉक साल 1977 से लेकर 2011 तक पावर में था। इसके बाद 1993 से लेकर 2018 तक त्रिपुरा में वामपंथी सरकार थी। इस बीच 2016 में केरल में लेफ्ट की सरकार बनी, इसके बाद 2021 में ट्रेंड (एक-एक बार यूडीएफ, एलडीएफ का चुनाव जीतना) को तोड़ते हुए फिर से राज्य में वामपंथी सरकार बनी। 

ममता ने बाहर किया सत्ता से

जहां पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने वामपंथियों को सरकार से बाहर किया तो त्रिपुरा में भाजपा की जीत से यह पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। पश्चिम बंगाल में 34 साल वामपंथी सरकार रही जो एक गिनीज रिकॉर्ड है, वहीं त्रिपुरा में 25 साल तक वामपंथियों ने शासन किया। 

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सिलसिला खत्म हुआ

साल 2026 के विधानसभा चुनावों ने पिनराई विजयन सरकार की हार से 1977 से चला आ रहा सिलसिला खत्म हो गया है। वाम पार्टियों के लिए इससे भी खराब यह है कि राष्ट्रीय राजनीति में भी लेफ्ट पार्टियों का प्रतिनिधित्व बीते सालों में घटता ही गया है। 

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लगातार हो रही गिरावट

साल 2004 के चुनावों में सबसे अच्छे प्रदर्शन के बाद से लेफ्ट की सीटें लगातार गिरती ही जा रही हैं। साल 2004 में लेफ्ट पार्टियों ने लोकसभा में 59 सीटें जीती थीं। इसके साथ ही लेफ्ट पार्टियां देश में बड़ी राजनीतिक शक्ति बनकर सामने आई थीं। उस समय सीपीएम के 43 सांसद थे। तब की यूपीए सरकार के राजनीतिक निर्णयों में भी लेफ्ट पार्टीज का दखल दिखाई देता था। इस दौरान मनमोहन सिंह सरकार की इंडो-यूएस सिविल न्यूक्लियर डील में वाम का विरोध साफ दिखाई दिया था। लेफ्ट ने सरकार से 2008 में अपना समर्थन वापस ले लिया था। इसके अगले ही साल हुए लोकसभा चुनाव में लेफ्ट पार्टियां 24 सीटों तक सिमट गईं। इसके बाद 2014 के चुनाव नें इन्हें 5, फिर 2019 के चुनाव में 5 ही सीटें लोकसभा में मिल सकीं। सीपीएम और सीपीआई के लोकसभा में वर्तमान में 6 सांसद हैं। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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