विजय की तमिलनाडु में सिनेमेटिक एंट्री,सीएम बनने के करीब

नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को आए चुनाव परिणामों ने ‘थलपति’ विजय की सिनेमेटिक एंट्री दिखा दी। उनकी पार्टी टीवीके को शुरुआत में एक तोड़फोड़ करने वाली ताकत माना जा रहा था, लेकिन अब यह राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती दिख रही है। टीवीके ने इस जीत के साथ तमिलनाडु की दो-दलीय परंपरा को तोड़ दिया है। दशकों से यहां डीएमके और एआईएडीएमके का शासन चलता रहा है। राज्य की जनता दोनों ही पार्टियों को सरकार बनाने के अल्टरनेट मौके देती रही है। लेकिन ‘थलपति’ (लीडर) बनकर आए विजय ने यह पुराना गणित पूरी तरह बदल दिया है। उनकी पार्टी 234 विधानसभा सीटों में से तीन अंकों (करीब 107 सीटों) पर बढ़त बनाए हुए है और बहुमत के आंकड़े 118 से कुछ सीट पीछे है। हालांकि, वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन अकेले दम पर सरकार बनाना मुश्किल दिख रहा है।
इस रिजल्ट ने देश में बड़ी डिबेट भी खड़ी कर दी है कि क्या यह नया ट्रेंड है या फिर सेलिब्रिटी के कारण एक बार होने वाली जीत है। तमिलनाडु जैसे राज्य को के. कामराज, एम. करुणानिधि, एमजी रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे दिग्गज नेताओं ने आकार दिया है। ऐसे में टीवीके की एंट्री किसी बड़े राजनीतिक भूचाल से कम नहीं मानी जा रही, क्योंकि इसने राज्य में दो पार्टियों के शासन की परिपाटी को तोड़ दिया है। अब राजनीतिक स्पॉटलाइट विजय की तरफ है।
अकेले चलने का निर्णय लिया
टीवीके के संस्थापक विजय ने अपने राजनीतिक सपनों को अकेले ही आकार देने का फैसला किया था। उनके पिता और पूर्व फिल्ममेकर चंद्रशेखर ने कहा कि विजय ने अपनी राजनीतिक यात्रा अकेले ही तय करने का निश्चय किया था।
चंद्रशेखर ने कहा कि विजय ने 1980 के दशक में चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में अपना काम शुरू किया था। उन्होंने कहा कि विजय हमेशा से ही तमिलनाडु के विकास के लिए कुछ करना चाहते थे। उनका विजन अब जोरदार राजनीतिक डेब्यू में बदल गया है। चंद्रशेखर ने कहा कि एक मनुष्य के रूप में आपको सिर्फ आर्टिस्ट ही नहीं होना चाहिए, आपके पास सोशल थिंकिंग भी होनी चाहिए। पिछले 30 साल से विजय के मन में तमिलनाडु के लिए कुछ करने का विचार था और अब वह राज्य के सीएम बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2024 में पार्टी बनने के बाद से विजय ने जबरदस्त पॉलिटिकल कॉन्फिडेंस दिखाया है। पिछले दो सालों से उन्हें विश्वास था कि वे राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर आगे आएंगे।
कांग्रेस फैक्टर
क्योंकि विजय की पार्टी बहुमत से कुछ ही सीट पीछे है, तो वह कांग्रेस का साथ ले सकती है। ऐसे में कांग्रेस भी अपने विकल्पों को तोल सकती है और फाइनल आंकड़ों का इंतजार कर सकती है। हालांकि, कांग्रेस अपने राष्ट्रीय रुख को बरकरार रखते हुए विजय को समर्थन देने से इनकार कर सकती है। इससे उसका कोई भी मूव पॉलिटिकली सेंसिटिव हो सकता है।
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एआईएडीएमके भी है एक प्लेयर
हालांकि जे. जयललिता की मौत के बाद से एआईएडीएमके अपनी पहले जैसी ताकत को पाने की कोशिश में है, लेकिन पार्टी अभी भी राज्य की राजनीति में एक बड़ा फैक्टर बनी हुई है।












