कोलकाता। ईद-उल-फितर के मौके पर कोलकाता की ऐतिहासिक रेड रोड एक बार फिर राजनीतिक संदेशों का केंद्र बन गई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हर साल की तरह इस बार भी ईद की नमाज में शामिल हुईं और उसके बाद आयोजित सभा को संबोधित किया। अपने भाषण में ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि, SIR प्रक्रिया के जरिए लोगों के नाम लिस्ट से हटाए जा रहे हैं, जिससे नागरिकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। ममता ने साफ शब्दों में कहा कि, उनकी सरकार बंगाल के हर नागरिक के साथ खड़ी है और किसी को भी लोगों के अधिकार छीनने नहीं देगी।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत नागरिक अधिकारों और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे से की। उन्होंने दावा किया कि, इस प्रक्रिया के कारण कई लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर उनकी सरकार ने हर स्तर पर आवाज उठाई है।
ममता ने कहा कि, हमने इस मामले को कोलकाता से दिल्ली तक उठाया है। कलकत्ता हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक हमने लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंत में न्याय मिलेगा और जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
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ईद के मौके पर ममता बनर्जी ने खास तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार हर नागरिक की सुरक्षा और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि, अगर किसी संकट के समय कोई उनके साथ खड़ा न हो, तो भी राज्य सरकार और वह खुद लोगों के लिए ढाल बनकर खड़ी रहेंगी।
ममता ने कहा कि, अगर आप खुद को अकेला महसूस करें और आपके साथ कोई न हो, तो हम आपके परिवार के सदस्य की तरह आपके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि, बंगाल में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी समुदाय मिल-जुलकर रहते हैं और राज्य की यही पहचान है।
अपने भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि, केंद्र सरकार लोगों के अधिकारों को छीनने की कोशिश कर रही है और राज्य सरकार को नियंत्रित करना चाहती है।
ममता बनर्जी ने कहा कि, हम मोदी जी को हमारे अधिकार छीनने नहीं देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के काम में हस्तक्षेप कर रही है और ऐसा माहौल बना रही है जैसे राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया हो।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, विदेशों में जब प्रधानमंत्री अन्य देशों के नेताओं से मिलते हैं, तो धर्म या जाति की बात नहीं होती। लेकिन भारत लौटने के बाद वही लोग समाज को बांटने की राजनीति करने लगते हैं। ममता ने कहा कि देश में इस तरह की राजनीति से सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचता है।
ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि बीजेपी देश को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पैसे लेकर वोट बांटने का काम कर रहे हैं और जनता ऐसे लोगों को पहचान चुकी है।
उन्होंने कहा कि, कुछ लोग बीजेपी से पैसे लेकर वोट बांटने की साजिश में शामिल हैं। लेकिन बंगाल की जनता उन्हें पहचान चुकी है। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी हर संस्था और हर व्यवस्था पर कब्जा करना चाहती है।
पश्चिम बंगाल में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राज्य की 294 सीटों के लिए चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होगी। ऐसे में ममता बनर्जी का यह भाषण राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
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अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि, केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से राज्य में एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। ममता ने कहा कि, राज्य सरकार को जबरदस्ती नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार डरने वाली नहीं है।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में लोगों को हिम्मत और संघर्ष का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग डरते हैं, वे हार जाते हैं, लेकिन जो लड़ते हैं वही अंत में जीतते हैं। उन्होंने कहा कि, उनकी पार्टी हर हाल में लोगों के अधिकारों के लिए लड़ती रहेगी।
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अपने भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने एक मशहूर उर्दू शेर भी पढ़ा। उन्होंने कहा कि, मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूर-ए-खुदा होता है। इस शेर के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि विरोधियों की कोशिशों के बावजूद अंत में वही होगा जो ऊपरवाले की मर्जी होगी।
कोलकाता की रेड रोड पर ईद के मौके पर होने वाली सभा कई सालों से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह मंच केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यहां से अक्सर बड़े राजनीतिक संदेश भी दिए जाते हैं। ममता बनर्जी हर साल इस मंच पर शामिल होकर अल्पसंख्यक समुदाय के साथ एकजुटता का संदेश देती हैं।
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अपने भाषण में ममता बनर्जी ने बंगाल की सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बंगाल में सभी समुदाय मिलकर रहते हैं और किसी को भी इस सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का मकसद केवल राजनीति नहीं बल्कि समाज में एकता बनाए रखना भी है।
ईद के मौके पर दिया गया ममता बनर्जी का यह भाषण अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस इसे लोगों के अधिकारों की रक्षा का संदेश बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा मान रहा है। आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।