बंगाल नगरपालिका भर्ती घोटाला :ED ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस को किया गिरफ्तार, जॉब के बदले लोगों से लिए पैसे-फ्लैट

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नगरपालिका भर्ती घोटाले में गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार देर रात करीब 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने यह कार्रवाई की।
सुजीत बोस अपने बेटे समुद्र बोस के साथ सुबह करीब 10:30 बजे साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी दफ्तर पहुंचे थे। पूछताछ के दौरान एजेंसी ने उन्हें कई दस्तावेज और बैंक लेन-देन से जुड़े सबूत दिखाए। इसके बाद देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब उन्हें विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया जाएगा।
क्या हैं सुजीत बोस पर आरोप?
ईडी का आरोप है कि सुजीत बोस ने 2014 से 2018 के बीच साउथ दमदम नगरपालिका में करीब 150 लोगों की अवैध भर्ती करवाई। जांच एजेंसी का दावा है कि नौकरी दिलाने के बदले उन्होंने पैसे और कई फ्लैट लिए। उस समय सुजीत बोस दक्षिण दमदम नगरपालिका के उपाध्यक्ष थे।
एजेंसी के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर हेरफेर किया गया और अयोग्य उम्मीदवारों को पैसे लेकर नौकरी दी गई। ईडी को जांच में ऐसे बैंक खातों के भी सबूत मिले हैं, जिनमें भारी मात्रा में नकद जमा कराया गया था। एजेंसी का कहना है कि भर्ती घोटाले से मिली रकम से खरीदी गई संपत्तियों को “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” माना गया है।
11 दिन में दो बार पूछताछ, फिर गिरफ्तारी
विधानसभा चुनाव के दौरान भी ईडी लगातार सुजीत बोस को नोटिस भेज रही थी। बताया जा रहा है कि 6 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने वाले दिन भी उन्हें नोटिस मिला था। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनाव प्रचार में व्यस्तता का हवाला देते हुए राहत मांगी थी। चुनाव खत्म होने के बाद वे 1 मई को पहली बार ईडी के सामने पेश हुए। फिर 11 मई को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया, जहां लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या है नगर निगम भर्ती घोटाला?
पश्चिम बंगाल का नगरपालिका भर्ती घोटाला राज्य के कई नगर निगम और नगरपालिकाओं में कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़ा मामला है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, 2014 से 2018 के बीच कई नगर निकायों में नौकरी देने के बदले रिश्वत ली गई।
इस घोटाले का खुलासा सबसे पहले शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के दौरान हुआ। वर्ष 2023 में ईडी ने रियल एस्टेट कारोबारी और फिल्म निर्माता अयान सील के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसी दौरान कई नगरपालिकाओं में फर्जी भर्ती के दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले।
किन नगरपालिकाओं में हुई जांच?
ईडी और सीबीआई की जांच में सामने आया कि, यह घोटाला सिर्फ एक नगरपालिका तक सीमित नहीं था। जांच के दायरे में कई नगरपालिकाएं आईं, जिनमें शामिल हैं-
- साउथ दमदम
- दमदम
- कमरहाटी
- बरानगर
- न्यू बैरकपुर
- टीटागढ़
- हलिशहर
- कांचरापाड़ा
इन नगरपालिकाओं में कथित तौर पर क्लर्क, स्वीपर, चपरासी, ड्राइवर, हेल्पर, एम्बुलेंस अटेंडेंट और अन्य पदों पर अवैध नियुक्तियां की गईं।
कैसे होता था भर्ती घोटाला?
जांच एजेंसी के मुताबिक, विभिन्न नगरपालिकाओं की परीक्षा से जुड़े ठेके ABS Infozon Pvt Ltd नाम की कंपनी को दिए गए थे। इस कंपनी के निदेशक अयान सील बताए जाते हैं। कंपनी को प्रश्नपत्र छापने, ओएमआर शीट तैयार करने, मूल्यांकन और मेरिट लिस्ट बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। ईडी का आरोप है कि ओएमआर शीट में हेरफेर कर पैसों के बदले अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाई गई।
ED की छापेमारी में क्या मिला?
ईडी ने 10 अक्टूबर 2025 को पश्चिम बंगाल में 13 जगहों पर छापेमारी की थी। इनमें सुजीत बोस का दफ्तर और उनसे जुड़े कई ठिकाने शामिल थे। जांच एजेंसी ने इस दौरान 45 लाख रुपए नकद बरामद किए थे। साथ ही कई अहम दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े कागजात भी जब्त किए गए।
जांच के दायरे में परिवार और करीबी
ईडी पहले भी सुजीत बोस की पत्नी, बेटे और बेटी को पूछताछ के लिए तलब कर चुकी है। जांच एजेंसी ने उनके घर, कार्यालय और वीआईपी रोड के पास स्थित उनके बेटे के रेस्टोरेंट पर भी तलाशी अभियान चलाया था। जांचकर्ताओं का दावा है कि छापेमारी के दौरान ऐसे दस्तावेज मिले, जो भर्ती घोटाले में उनकी कथित संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।
राजनीतिक साजिश बताकर करते रहे बचाव
सुजीत बोस पहले से ही ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताते रहे हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि, सुजीत बोस की हालत इतनी खराब नहीं है कि उन्हें पैसे कमाने के लिए नौकरी बेचनी पड़े। यह चुनाव आयोग और ईडी की साजिश है।
चुनाव में मिली थी हार
बिधाननगर सीट से तीन बार विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार शरदवत मुखर्जी से करीब 37 हजार वोटों से हार गए थे। चुनावी हार के कुछ ही समय बाद अब उनकी गिरफ्तारी ने बंगाल की राजनीति को फिर गर्म कर दिया है।
कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं सामने
ईडी अब इस पूरे मामले में पैसों के लेन-देन, संपत्तियों की खरीद और अन्य नेताओं व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी का दावा है कि, यह घोटाला करोड़ों रुपए की अवैध उगाही से जुड़ा हो सकता है और आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।











