दोगले पाकिस्तान की खुली पोल!ईरानी विमानों को एयरबेस में छिपाकर अमेरिका को दिया धोखा

ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए तनाव और युद्धविराम के बाद अब पाकिस्तान की भूमिका पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह दी थी, ताकि वे अमेरिकी हमलों से बच सकें। सबसे बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान दुनिया के सामने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच शांति कराने वाला देश बता रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे कुछ और ही खेल चलता दिखा।
पाकिस्तानी एयरबेस पर उतारे गए ईरानी विमान
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के दौरान ईरान ने अपने कई सैन्य और निगरानी विमानों को पाकिस्तान भेज दिया था। ये विमान रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान एयरफोर्स के नूर खान एयरबेस पर उतारे गए। इन विमानों में ईरानी वायुसेना का एक खास जासूसी विमान RC-130 भी शामिल था।
यह विमान दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि उसके महत्वपूर्ण विमान अमेरिकी एयरस्ट्राइक से बच सकें।
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अमेरिकी नेता ने भी जताई चिंता
अमेरिका के वरिष्ठ सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस रिपोर्ट पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अगर यह खबर सही साबित होती है, तो अमेरिका को पाकिस्तान की भूमिका पर दोबारा विचार करना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के पुराने बयानों को देखते हुए उन्हें इस तरह की खबर पर ज्यादा हैरानी नहीं होगी।
पाकिस्तान की नीयत पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने पाकिस्तान की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने वाला देश बता रहा था, दूसरी तरफ उसी समय वह ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर शरण देता नजर आया। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है।
पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नूर खान एयरबेस एक घनी आबादी वाले इलाके में है। वहां अगर इतने बड़े स्तर पर सैन्य गतिविधियां होतीं, तो उन्हें छिपाना आसान नहीं होता।
अफगानिस्तान में भी छिपाए गए विमान?
रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि ईरान ने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान भेजा था। एक अफगान नागरिक उड्डयन अधिकारी के अनुसार, ईरानी एयरलाइन महन एयर का एक विमान काबुल में उतरा था और ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने के बाद भी वहीं रुका रहा। हालांकि, तालिबान सरकार ने इन खबरों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने विमान अफगानिस्तान भेजने की जरूरत ही नहीं थी।
पाकिस्तान क्यों फंसा मुश्किल स्थिति में?
एक तरफ पाकिस्तान को अमेरिका के साथ अपने संबंध बनाए रखने हैं, क्योंकि आर्थिक और सैन्य मदद के लिए वह लंबे समय से वाशिंगटन पर निर्भर रहा है। दूसरी तरफ पाकिस्तान चीन और ईरान को भी नाराज नहीं करना चाहता। चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है और ईरान का करीबी सहयोगी भी।
चीन का बड़ा रोल
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान द्वारा खरीदे गए करीब 80 प्रतिशत हथियार चीन से आए थे। यानी पाकिस्तान की सैन्य ताकत काफी हद तक चीन पर निर्भर है। ऐसे में पाकिस्तान खुलकर अमेरिका के पक्ष में जाने का जोखिम नहीं उठा सकता।
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युद्धविराम के बाद भी खत्म नहीं हुआ तनाव
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बरकरार है। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, तेहरान ने अमेरिका के सामने कई बड़ी मांगें रखी हैं। इनमें युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा, होर्मुज पर ईरान की संप्रभुता की मान्यता और अमेरिकी प्रतिबंध हटाने की मांग शामिल है।











