भोपाल। पवित्र रमजान महीने के 30 रोजे पूरे होने के बाद शनिवार को राजधानी भोपाल समेत पूरे मध्य प्रदेश में ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह, अकीदत और भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही शहर की मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
गुरुवार को चांद नजर नहीं आने के बाद भोपाल के शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने 21 मार्च को ईद मनाने का ऐलान किया था। उसी के अनुसार शनिवार सुबह ईद की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और देश में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की की दुआ मांगी।
राजधानी भोपाल में ईद की नमाज अलग-अलग समय पर शहर की प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में अदा की गई।
ताज-उल-मसाजिद में मौलाना हस्सान साहब की सरपरस्ती में खास दुआ कराई गई। नमाज में बड़ी संख्या में नमाजियों ने हिस्सा लिया और देश की खुशहाली तथा शांति के लिए दुआ मांगी।

ईद के मौके पर मस्जिदों में इतनी ज्यादा भीड़ रही कि कई जगह लोगों को मस्जिद के अंदर जगह नहीं मिल सकी। भोपाल के ईदगाह में कई लोग अंदर नहीं जा पाए तो उन्होंने बाहर सड़क पर ही नमाज अदा की। शहर के कई इलाकों में मस्जिदों के आसपास सड़कों तक नमाजियों की कतारें दिखाई दीं। इस दौरान पूरे शहर में ईद की रौनक देखने को मिली और लोगों के चेहरों पर त्योहार की खुशी साफ नजर आई।
मसाजिद कमेटी की ओर से नमाज से पहले फित्रा अदा करने की अपील की गई थी। जानकारी के अनुसार, गेहूं के हिसाब से प्रति व्यक्ति लगभग 70 रुपए फित्रा तय किया गया। वहीं चांदी के भाव के आधार पर अधिकतम फित्रा करीब 1650 रुपए तक हो सकता है। फित्रा देने का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों की मदद करना होता है ताकि वे भी ईद की खुशी में शामिल हो सकें।
[featured type="Featured"]
अशोका गार्डन स्थित सकलैनी जामा मस्जिद में हर साल की तरह इस बार भी दो जमात में नमाज अदा की गई।
मस्जिद कमेटी के अनुसार, यहां दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। पूरे इलाके में ईद का उत्साह और रौनक देखने को मिली।
ईद के मौके पर शहर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। भोपाल के संवेदनशील इलाकों और प्रमुख मस्जिदों के आसपास सुबह से ही पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि नमाज और त्योहार का आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
ईद के मौके पर भीड़ को देखते हुए भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने कई मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया। सुबह 6 बजे से 11 बजे तक कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया। कुछ मार्गों पर वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया। लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई ताकि नमाज के दौरान भीड़ और यातायात को नियंत्रित किया जा सके।
ईद से पहले पुराने भोपाल के बाजार पूरी तरह सज गए थे।
त्योहार के चलते बाजारों में काफी रौनक रही और लोगों ने जमकर खरीदारी की।
यह भी पढ़ें: भोपाल: ईद-उल-फितर पर ट्रैफिक प्लान लागू: कई रूट डायवर्ट, भारी वाहनों की एंट्री पर रोक
केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के कई अन्य शहरों में भी ईद का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है।
मंदसौर
मंदसौर में हजारों लोग ईद की नमाज अदा करने के लिए ईदगाह में जुटे। यहां शहर काजी आसिफ उल्लाह ने नमाज अदा कराई।
रतलाम
रतलाम के लक्कड़पीठा स्थित पुरानी ईदगाह में शहर काजी अहमद अली ने विशेष नमाज कराई। इस मौके पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में खास उत्साह देखने को मिला। महापौर प्रहलाद पटेल और अन्य जनप्रतिनिधि भी ईदगाह पहुंचे और लोगों को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
[breaking type="Breaking"]
भिंड
भिंड में भी सुबह मस्जिदों में ईद की नमाज अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने देश में शांति और खुशहाली की दुआ मांगी। यहां विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जामा मस्जिद पहुंचकर लोगों को ईद की बधाई दी और भाईचारे का संदेश दिया।
रायसेन
रायसेन में ईदगाह पर हजारों लोग नमाज के लिए जुटे। भीड़ इतनी ज्यादा रही कि कई लोग ईदगाह के बाहर सड़क पर बैठकर नमाज पढ़ते नजर आए। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी।
उज्जैन
उज्जैन में भी ईद को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। यहां शहर काजी ने कहा कि, कल से हिंदू नववर्ष की शुरुआत हुई और आज ईद है, यह इस बात का संदेश है कि सभी धर्मों के लोग मिलकर रहें और समाज में भाईचारा बनाए रखें।
यह भी पढ़ें: 21 मार्च को मनाई जाएगी ईद: नमाज के समय तय, फित्रा की दरें घोषित; सुन्नी और शिया मस्जिदों में अलग-अलग इंतजाम
रमजान का आखिरी शुक्रवार यानी अलविदा जुमा इस्लाम में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन रमजान की विदाई का संकेत होता है और रोजेदारों को यह याद दिलाता है कि जिस तरह पूरे महीने इबादत, संयम और नेक काम किए गए, वह जीवन में हमेशा जारी रहने चाहिए।
इस दिन कई लोग जकात और सदका अदा करते हैं, जिसे इस्लाम में पुण्य का काम माना जाता है।
ईद-उल-फितर केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि भाईचारे, प्रेम और इंसानियत का संदेश देने वाला पर्व है। रमजान के महीने में रोजेदार पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर इबादत करते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। ईद उसी इबादत और संयम के बाद आने वाली खुशी का त्योहार है। इस दिन लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं, ईद की मुबारकबाद देते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं।