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सोहागपुर :सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में गिद्धों की गिनती जारी, दो दिनों में 561 गिद्ध किए गए रिकॉर्ड

22 मई को हुई गणना में 195 घोसलों में कुल 246 गिद्ध दर्ज किए गए। इनमें 228 वयस्क और 18 अवयस्क गिद्ध शामिल थे। प्रजातियों के आधार पर देखें तो इनमें 237 भारतीय देशी गिद्ध, 5 सफेद पीठ वाले गिद्ध और 4 सफेद गिद्ध पाए गए। 
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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में गिद्धों की गिनती जारी, दो दिनों में 561 गिद्ध किए गए रिकॉर्ड

सोहागपुर। मध्यप्रदेश में गिद्धों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना 2026-27 के तहत हुई ग्रीष्मकालीन गणना में इस बार 10 हजार 742 गिद्ध पाए गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में करीब 1200 ज्यादा हैं। वन विभाग ने इसे वन्यजीव संरक्षण और बेहतर पर्यावरण प्रबंधन का सकारात्मक संकेत बताया है।

दो दिन में 315 गिद्ध हुए दर्ज

इसी अभियान के तहत 22 से 24 मई 2026 तक प्रदेशभर में गिद्धों की गणना की जा रही है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर सर्वे किया गया, जहां दो दिन की गणना में 315 गिद्ध दर्ज किए गए। सहायक संचालक आशीष खोबरागड़े ने बताया कि टाइगर रिजर्व के नर्मदापुरम क्षेत्र की 186 बीटों में करीब 500 वनकर्मी गिद्धों की निगरानी और गणना में लगे हुए हैं।

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दो दिन की गणना में बढ़ी गिद्धों की संख्या

22 मई को हुई गणना में 195 घोसलों में कुल 246 गिद्ध दर्ज किए गए। इनमें 228 वयस्क और 18 अवयस्क गिद्ध शामिल थे। प्रजातियों के आधार पर देखें तो इनमें 237 भारतीय देशी गिद्ध, 5 सफेद पीठ वाले गिद्ध और 4 सफेद गिद्ध पाए गए। वहीं, 23 मई की गणना में संख्या बढ़कर 315 तक पहुंच गई। इस दौरान 285 वयस्क और 30 अवयस्क गिद्ध दर्ज किए गए। इनमें 299 भारतीय देशी गिद्ध, 5 सफेद पीठ वाले गिद्ध और 11 सफेद गिद्ध शामिल रहे।

क्यों जरूरी है गिद्धों की यह गणना?

गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी माना जाता है। ये मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को साफ रखने और संक्रमण फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। पिछले वर्षों में दवाइयों के दुष्प्रभाव, भोजन की कमी और आवास खत्म होने जैसी वजहों से गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई थी। ऐसे में उनकी नियमित गणना वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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जैव विविधता और संरक्षण के लिए अहम डेटा

क्षेत्र संचालक राखी नंदा के मुताबिक, गिद्ध गणना केवल संख्या जानने का काम नहीं है, बल्कि इससे वन क्षेत्रों की जैव विविधता, प्रजातियों की स्थिति और संरक्षण रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है।

इस अभियान से यह समझने में भी मदद मिलेगी कि गिद्धों की कौन-सी प्रजातियां किस क्षेत्र में ज्यादा मौजूद हैं और उनके संरक्षण के लिए किन कदमों की जरूरत है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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