मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमत और एआई टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग के कारण स्मार्टफोन उद्योग की लागत बढ़ती जा रही है। ऐसे में कई कंपनियां अपने फोन की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले महीनों में दुनिया भर में स्मार्टफोन महंगे हो सकते हैं और खासकर बजट, मिड-रेंज सेगमेंट के यूजर्स पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है।
स्मार्टफोन बनाने में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की कीमतें पिछले कुछ समय में तेजी से बढ़ी हैं। खास तौर पर DRAM और NAND Flash जैसी चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक बीते साल की कंपेरिजन में इन चिप्स की कीमतों में 80 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसका सीधा असर स्मार्टफोन कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ रहा है। बढ़ती लागत को बैलेंस करने के लिए कंपनियां अब अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में बदलाव करने की तैयारी कर रही हैं।
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दुनियाभर में Artificial Intelligence (एआई) की बढ़ती लोकप्रियता भी मेमोरी चिप्स की मांग को तेजी से बढ़ा रही है। एआई सर्वर और बड़े डेटा सेंटर के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप्स की जरूरत होती है। इस वजह से चिप मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब ज्यादा संसाधन एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। नतीजतन स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए उपलब्ध चिप्स की सप्लाई कम हो गई है और उनकी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Oppo 16 मार्च से अपने कुछ मौजूदा स्मार्टफोन मॉडल्स की कीमत बढ़ा सकता है। खास तौर पर कंपनी की A और K सीरीज जैसे मिड-रेंज और बजट स्मार्टफोन इस बदलाव से प्रभावित हो सकते हैं। सिर्फ Oppo ही नहीं, बल्कि Vivo, Honor और अन्य चीनी स्मार्टफोन ब्रांड भी इसी तरह के प्राइस एडजस्टमेंट पर विचार कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो यह पिछले 5 सालों में स्मार्टफोन इंडस्ट्री में सबसे बड़ी दामों में बढ़ोत्तरी मानी जा सकती है।