जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज डूबा :4 शव मिले, कई लापता, 15 को बचाया; राहत-बचाव कार्य जारी, CM ने अधिकारियों को दिए निर्देश

मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम में गुरुवार शाम बड़ा हादसा हो गया। यहां पर्यटकों से भरा क्रूज अचानक डूब गया। इस हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। बताया जा रहा है कि क्रूज में करीब 35 लोग सवार थे, जिनमें से कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। घटना में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के मुताबिक, शाम करीब 5:30 बजे सैलानी क्रूज से नर्मदा नदी की सैर कर रहे थे। तभी खमरिया टापू के पास अचानक तेज आंधी और लहरें उठने लगीं। तेज हवा के कारण क्रूज का संतुलन बिगड़ गया और वह पलटकर डैम में डूब गई।
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हादसा इतना अचानक हुआ कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। हालांकि, करीब 15 लोग किसी तरह तैरकर किनारे तक पहुंच गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
क्रूज के डूबने का LIVE VIDEO
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि SDRF और स्थानीय गोताखोरों की टीम मौके पर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। अंधेरा होने के बावजूद लापता लोगों की तलाश जारी है।
डैम के जलस्तर और गहराई के कारण बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि खराब मौसम के बावजूद क्रूज को चलाने में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई।
CM मोहन यादव ने अधिकारियों को दिए निर्देश
बरगी डैम में हुए हादसे को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुख जताया और एक्स पर लिखा- आज जबलपुर में तेज आंधी-तूफान के कारण बरगी डैम में हुए दुखद क्रूज हादसे को लेकर स्थानीय प्रशासन एवं रेस्क्यू फोर्स का ऑपरेशन लगातार जारी है। इसके साथ ही उन्होंने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह जी, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी जी, संभाग प्रभारी एसीएस, एडीजी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि 15 नागरिकों को सकुशल बचा लिया गया है। जो लापता हैं, उन्हें जल्द से जल्द ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है। संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार पूर्ण संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता सुनिश्चित की जा रही है।
क्या है बरगी डैम?
बरगी डैम नर्मदा नदी पर बना जबलपुर का एक बड़ा और महत्वपूर्ण बांध है। इसका निर्माण 1974 में शुरू हुआ था और 1990 में पूरा हुआ। इसे ‘रानी अवंतीबाई लोधी सागर परियोजना’ भी कहा जाता है। यह बांध सिंचाई और बिजली उत्पादन के साथ-साथ पर्यटन के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां लोग क्रूज सफारी, बोटिंग और वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद लेने आते हैं। करीब 5.4 किलोमीटर लंबे इस बांध की गहराई और फैलाव इसे सुंदर तो बनाते हैं, लेकिन हादसों की स्थिति में खतरनाक भी साबित हो सकते हैं।











