UP News:भदोही में पूर्व विधायक विजय मिश्रा को 10 साल की सजा, जानें क्या है पूरा मामला

भदोही। 2020 में दर्ज मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फैसला सुनाया। सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए कड़ी सजा दी गई है। मामला संपत्ति कब्जाने और अवैध ट्रांजैक्शन से जुड़ा है।
कोर्ट का फैसला, पूरे परिवार को सजा
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक विजय मिश्रा को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उनकी पत्नी रामलली मिश्रा और बेटे विष्णु मिश्रा को भी समान रूप से दोषी माना। तीनों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई है। वहीं बहू रूपा मिश्रा को चार साल की सजा दी गई है। इस फैसले के बाद परिवार को बड़ा झटका लगा है। इसके साथ ही अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए अपराध को गंभीर बताया है।
2020 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला वर्ष 2020 में गोपीगंज थाने में दर्ज किया गया था। विजय मिश्रा के रिश्तेदार कृष्ण मोहन तिवारी ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि मकान और फर्म पर जबरन कब्जा किया गया। साथ ही करोड़ों रुपये को फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर करने का आरोप भी लगाया गया। पुलिस ने जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई
इस केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की गई, जहां तेजी से प्रक्रिया पूरी हुई। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपों को सही पाया। शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट के फैसले की जानकारी दी। अदालत ने सबूतों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना। फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि मामला गंभीर आर्थिक और आपराधिक प्रकृति का है।
आगरा जेल में बंद हैं विजय मिश्रा
गौरतलब है कि विजय मिश्रा को इससे पहले भी एक अन्य मामले में सजा मिल चुकी है। प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें 46 साल पुराने हत्या मामले में दोषी ठहराया था। इस मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। फिलहाल वह आगरा जेल में बंद हैं। लगातार मिल रही सजाओं ने उनके राजनीतिक करियर पर गहरा असर डाला है।
पूर्व विधायक पर 77 केस दर्ज
विजय मिश्रा का राजनीतिक सफर उनके आपराधिक इतिहास के साथ जुड़ा रहा है। उन पर 77 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, अपहरण, गैंगस्टर और अन्य गंभीर धाराएं शामिल हैं। उन्होंने बाहुबल के दम पर राजनीति में अपनी पहचान बनाई। 2002 में पहली बार विधायक बने और लगातार कई चुनाव जीते। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर भदोही के ज्ञानपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, बाद में उन्होंने अलग-अलग दलों से चुनाव लड़कर जीत हासिल की। लेकिन उनका सियासी सफर हमेशा विवादों में घिरा रहा।












